समस्तीपुर के शिव काली दुर्गा हनुमान मंदिर में दुर्गा पूजा की तैयारियां चल रही हैं। इस बार कोलकाता के दक्षिणेश्वर काली मंदिर की तरह 110 फीट ऊंचा पंडाल बनाया जा रहा है। यह पंडाल श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण का केंद्र होगा। पंडाल को आकर्षक बनाने के लिए 15 कारीगर एक महीने से काम कर रहे हैं। यहां मां दुर्गा की 26 फीट ऊंची प्रतिमा भी तैयार हो रही है। इसे बनाने में करीब 10 कारीगर एक महीने से जुटे हैं। पूजा समिति ने श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक कार्यक्रम भी रखे हैं। पंडाल और प्रतिमा का काम तेजी से चल रहा है। आयोजकों को उम्मीद है कि पूजा शुरू होने तक यह पूरा हो जाएगा। अष्टमी से विसर्जन तक दिखेगी वृंदावन की झांकी इस बार शिव काली दुर्गा हनुमान मंदिर में मां दुर्गा के दर्शन के साथ श्रद्धालुओं को वृंदावन की झांकी देखने का भी अवसर मिलेगा। पूजा समिति की ओर से अष्टमी से लेकर प्रतिमा विसर्जन तक वृंदावन की झांकी का आयोजन किया जाएगा। आयोजकों के मुताबिक, इस विशेष आयोजन के जरिए श्रद्धालुओं को धार्मिक और आध्यात्मिक माहौल से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। पंडाल की भव्यता, मां दुर्गा की विशाल प्रतिमा और वृंदावन की झांकी को लेकर पूजा समिति के सदस्य उत्साहित हैं। पूजा के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों को विधि-विधान से संपन्न कराने की भी व्यवस्था की गई है। आयोजकों ने बताया कि संस्कृत महाविद्यालय, हसुआ के प्राचार्य राम सजीवन झा के पुरोहितत्व में पूजा-अर्चना कराई जाती है। पूजा समिति की कोशिश है कि सभी धार्मिक कार्यक्रम परंपरागत तरीके से संपन्न हों और श्रद्धालु शांतिपूर्ण वातावरण में मां दुर्गा का दर्शन कर सकें। 1990 से हो रहा है दुर्गा पूजा का आयोजन पूजा समिति के सदस्य महेंद्र प्रधान ने बताया कि शिव काली दुर्गा हनुमान मंदिर में वर्ष 1990 से दुर्गा पूजा का आयोजन किया जा रहा है। प्रत्येक वर्ष पूजा को पहले से अधिक आकर्षक और भव्य बनाने का प्रयास किया जाता है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस बार दक्षिणेश्वर काली मंदिर की तर्ज पर 110 फीट ऊंचा पंडाल और 26 फीट ऊंची मां दुर्गा की प्रतिमा तैयार कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि पूजा का आयोजन ग्रामीणों के सहयोग से किया जाता है। इसमें गांव के लोगों की सक्रिय भागीदारी रहती है। महेंद्र प्रधान के अनुसार, दुर्गा पूजा के आयोजन पर इस वर्ष करीब 15 से 20 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। पंडाल निर्माण, प्रतिमा तैयार करने और अन्य धार्मिक व्यवस्थाओं पर राशि खर्च की जाएगी। ग्रामीणों के सहयोग से होने वाला यह आयोजन क्षेत्र में धार्मिक आस्था और सामूहिक सहभागिता का प्रतीक बन चुका है। ग्रामीणों के सहयोग से सजता है पूजा पंडाल
करीब तीन दशक से अधिक समय से आयोजित हो रही इस पूजा में हर वर्ष कुछ नया करने की परंपरा रही है। इस बार विशाल पंडाल, मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा और वृंदावन की झांकी के माध्यम से आयोजन को खास बनाने की तैयारी है। कारीगरों की मेहनत और ग्रामीणों के सहयोग से मंदिर परिसर को आकर्षक रूप दिया जा रहा है। पूजा समिति को उम्मीद है कि इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन के लिए पहुंचेंगे और धार्मिक आयोजनों में भाग लेंगे। शिव काली दुर्गा हनुमान मंदिर में चल रही तैयारियों से इलाके में दुर्गा पूजा को लेकर उत्साह का माहौल है। अब श्रद्धालुओं को पंडाल निर्माण पूरा होने और मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा के दर्शन का इंतजार है। समस्तीपुर के शिव काली दुर्गा हनुमान मंदिर में दुर्गा पूजा की तैयारियां चल रही हैं। इस बार कोलकाता के दक्षिणेश्वर काली मंदिर की तरह 110 फीट ऊंचा पंडाल बनाया जा रहा है। यह पंडाल श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण का केंद्र होगा। पंडाल को आकर्षक बनाने के लिए 15 कारीगर एक महीने से काम कर रहे हैं। यहां मां दुर्गा की 26 फीट ऊंची प्रतिमा भी तैयार हो रही है। इसे बनाने में करीब 10 कारीगर एक महीने से जुटे हैं। पूजा समिति ने श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक कार्यक्रम भी रखे हैं। पंडाल और प्रतिमा का काम तेजी से चल रहा है। आयोजकों को उम्मीद है कि पूजा शुरू होने तक यह पूरा हो जाएगा। अष्टमी से विसर्जन तक दिखेगी वृंदावन की झांकी इस बार शिव काली दुर्गा हनुमान मंदिर में मां दुर्गा के दर्शन के साथ श्रद्धालुओं को वृंदावन की झांकी देखने का भी अवसर मिलेगा। पूजा समिति की ओर से अष्टमी से लेकर प्रतिमा विसर्जन तक वृंदावन की झांकी का आयोजन किया जाएगा। आयोजकों के मुताबिक, इस विशेष आयोजन के जरिए श्रद्धालुओं को धार्मिक और आध्यात्मिक माहौल से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। पंडाल की भव्यता, मां दुर्गा की विशाल प्रतिमा और वृंदावन की झांकी को लेकर पूजा समिति के सदस्य उत्साहित हैं। पूजा के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों को विधि-विधान से संपन्न कराने की भी व्यवस्था की गई है। आयोजकों ने बताया कि संस्कृत महाविद्यालय, हसुआ के प्राचार्य राम सजीवन झा के पुरोहितत्व में पूजा-अर्चना कराई जाती है। पूजा समिति की कोशिश है कि सभी धार्मिक कार्यक्रम परंपरागत तरीके से संपन्न हों और श्रद्धालु शांतिपूर्ण वातावरण में मां दुर्गा का दर्शन कर सकें। 1990 से हो रहा है दुर्गा पूजा का आयोजन पूजा समिति के सदस्य महेंद्र प्रधान ने बताया कि शिव काली दुर्गा हनुमान मंदिर में वर्ष 1990 से दुर्गा पूजा का आयोजन किया जा रहा है। प्रत्येक वर्ष पूजा को पहले से अधिक आकर्षक और भव्य बनाने का प्रयास किया जाता है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस बार दक्षिणेश्वर काली मंदिर की तर्ज पर 110 फीट ऊंचा पंडाल और 26 फीट ऊंची मां दुर्गा की प्रतिमा तैयार कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि पूजा का आयोजन ग्रामीणों के सहयोग से किया जाता है। इसमें गांव के लोगों की सक्रिय भागीदारी रहती है। महेंद्र प्रधान के अनुसार, दुर्गा पूजा के आयोजन पर इस वर्ष करीब 15 से 20 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। पंडाल निर्माण, प्रतिमा तैयार करने और अन्य धार्मिक व्यवस्थाओं पर राशि खर्च की जाएगी। ग्रामीणों के सहयोग से होने वाला यह आयोजन क्षेत्र में धार्मिक आस्था और सामूहिक सहभागिता का प्रतीक बन चुका है। ग्रामीणों के सहयोग से सजता है पूजा पंडाल
करीब तीन दशक से अधिक समय से आयोजित हो रही इस पूजा में हर वर्ष कुछ नया करने की परंपरा रही है। इस बार विशाल पंडाल, मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा और वृंदावन की झांकी के माध्यम से आयोजन को खास बनाने की तैयारी है। कारीगरों की मेहनत और ग्रामीणों के सहयोग से मंदिर परिसर को आकर्षक रूप दिया जा रहा है। पूजा समिति को उम्मीद है कि इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन के लिए पहुंचेंगे और धार्मिक आयोजनों में भाग लेंगे। शिव काली दुर्गा हनुमान मंदिर में चल रही तैयारियों से इलाके में दुर्गा पूजा को लेकर उत्साह का माहौल है। अब श्रद्धालुओं को पंडाल निर्माण पूरा होने और मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा के दर्शन का इंतजार है।

