तिलक वर्मा के आउट होते ही ईस्ट जोन ने जीत लिया था दलीप ट्रॉफी 2026 का खिताब, जानें BCCI का क्या है नियम

तिलक वर्मा के आउट होते ही ईस्ट जोन ने जीत लिया था दलीप ट्रॉफी 2026 का खिताब, जानें BCCI का क्या है नियम

East Zone vs South Zone Final: चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में ईस्ट जोन की टीम गुरुवार को दलीप ट्रॉफी का खिताब जीत लेगी। इस मैच का नतीजा चौथे दिन ही तय हो गया था, जब साउथ जोन के कप्तान तिलक वर्मा आउट हुए। उनके आउट होते ही साउथ जोन की पूरी पारी ऑलआउट हो गई और ईस्ट जोन ने 372 रन की बढ़त हासिल कर ली। बढ़त हासिल करते ही ईस्ट जोन के नाम खिताब दर्ज हो गया, लेकिन मैच खत्म होने तक उन्हें ट्रॉफी के लिए इंतजार करना होगा। चलिए जानते हैं फाइनल के लिए क्या है नियम और कैसे मैच का रिजल्ट न निकलने पर भी ईस्ट जोन चैंपियन बन गई।

फाइनल के लिए BCCI के 3 अहम नियम

दलीप ट्रॉफी में भारत की जोनल टीमें आपस में भिड़ती हैं। इसमें सभी मुकाबले नॉकआउट के तौर पर होते हैं और मैच ड्रॉ होने की स्थिति में भी हारने और जीतने वाली टीमें तय हो जाती हैं। इससे क्रिकेट फैंस के मन में हमेशा एक सवाल होता है कि आखिर किस नियम के तहत ये फैसला लिया जाता है? अगर पांच दिन का मैच ड्रॉ पर खत्म हो जाए, तो ट्रॉफी किसे मिलेगी?

पहला नियम: फर्स्ट-इनिंग्स लीड

सबसे पहले और सबसे अहम नियम यह है कि अगर मैच ड्रॉ होता है, तो जिस टीम ने पहली पारी में ज्यादा रन बनाए हों, उसे विजेता घोषित कर दिया जाता है। इसे फर्स्ट-इनिंग्स लीड कहते हैं। इसी वजह से 2026 के फाइनल में ईस्ट जोन के कप्तान ईशान किशन ने दो दिन तक लगातार बल्लेबाजी की और 708 रन बनाए, फिर भी पारी घोषित नहीं की। उनका मकसद था कि साउथ जोन को पहली पारी में उनका स्कोर पार करना मुश्किल हो जाए, ताकि मैच ड्रॉ होने पर भी ट्रॉफी ईस्ट जोन के नाम रहे।

दूसरा नियम: औसत स्कोर प्रति विकेट

कभी-कभी ऐसा भी हो सकता है कि दोनों टीमों की पहली पारी के रन बिल्कुल बराबर हों। ऐसी स्थिति में BCCI का दूसरा नियम लागू होता है। इसके तहत दोनों टीमों के औसत स्कोर प्रति विकेट की तुलना की जाती है। यानी कुल रनों को विकेटों से भाग देकर देखा जाता है कि किस टीम का औसत बेहतर रहा। जिस टीम का औसत ज्यादा होगा, वही विजेता होगी। लेकिन इसके लिए मैच की चौथी पारी में कम से कम 60 ओवर का खेल होना जरूरी है।

तीसरा नियम: टॉस से फैसला

अगर इन दोनों नियमों से बात नहीं बनती और मामला बराबरी पर अटकता है, तो फिर BCCI का आखिरी नियम लागू होता है, जहां टॉस उछालकर मैच का फैसला किया जाता है। जिस टीम के पाले में सिक्का गिरा, वो टीम चैंपियन बन जाती है।

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