केंद्र सरकार ने देश के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्रों में शामिल ‘चिकन नेक’ में रेल संपर्क को मजबूत बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रेल मंत्रालय ने डुमदंगी (टिन माइल हाट)-रंगापानी-बागडोगरा के बीच प्रस्तावित 35.76 किलोमीटर लंबी नई रेल परियोजना को विशेष रेल परियोजना घोषित किया है। यह घोषणा 3 जुलाई 2026 को जारी अधिसूचना संख्या एस.ओ. 3742(ई) के तहत की गई है। यह परियोजना ऐसे समय में आगे बढ़ रही है जब पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले संकरे गलियारे यानी ‘चिकन नेक’ क्षेत्र में रेलवे आधारभूत संरचना को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इस क्षेत्र में पहले से ही प्रस्तावित ठाकुरगंज-चतरहाट नई बड़ी रेल लाइन की प्रक्रिया जारी है। बंगाल क्षेत्र के रेल नेटवर्क को मिलेगी मजबूती डुमदंगी से रंगापानी होते हुए बागडोगरा तक नई रेल लाइन को विशेष परियोजना का दर्जा मिलने से इस पूरे इलाके में रेल संपर्क के विस्तार की संभावनाएं बढ़ी हैं। रेल विशेषज्ञों का मानना है कि ठाकुरगंज-चतरहाट और डुमदंगी-रंगापानी-बागडोगरा परियोजनाएं मिलकर सीमांचल और उत्तर बंगाल क्षेत्र के रेल नेटवर्क को नई मजबूती प्रदान करेंगी। डुमदंगी स्टेशन एनजेपी-किशनगंज रेलखंड का एक महत्वपूर्ण स्टेशन है। यह अलुआबाड़ी रोड से लगभग 26 किलोमीटर और न्यू जलपाईगुड़ी से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित है। टिन माइल हाट के आगे और चतरहाट से पहले स्थित होने के कारण इसकी भौगोलिक स्थिति इस परियोजना को विशेष महत्व देती है। प्रस्तावित रेल लाइन डुमदंगी से शुरू होकर रंगापानी के रास्ते बागडोगरा तक पहुंचेगी। संवेदनशील क्षेत्र में आता है बागडोगरा बागडोगरा केवल एक प्रमुख परिवहन केंद्र ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां भारतीय वायुसेना की महत्वपूर्ण उपस्थिति है और यह इलाका अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के निकट स्थित संवेदनशील क्षेत्र में आता है। ऐसे में मजबूत रेल संपर्क यात्रियों और माल परिवहन के साथ-साथ आवश्यकता पड़ने पर रसद, उपकरण और अन्य संसाधनों की तेज आवाजाही में भी अहम भूमिका निभाएगा। लेकिन इसके रणनीतिक और आर्थिक महत्व को दूरी के आधार पर नहीं आंका जा सकता। डुमदंगी, रंगापानी और बागडोगरा को रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली यह कड़ी चिकन नेक क्षेत्र में परिवहन क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ पूर्वोत्तर भारत से संपर्क को और सुदृढ़ करने में सहायक हो सकती है। रेल मंत्रालय द्वारा विशेष परियोजना का दर्जा दिए जाने के बाद अब इस रेल लाइन को लेकर क्षेत्र में नई उम्मीदें जगी हैं। आने वाले वर्षों में यह परियोजना न केवल सीमांचल और उत्तर बंगाल के लोगों को बेहतर रेल सुविधा दे सकती है, बल्कि देश की रणनीतिक जरूरतों को भी मजबूती प्रदान कर सकती है। केंद्र सरकार ने देश के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्रों में शामिल ‘चिकन नेक’ में रेल संपर्क को मजबूत बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रेल मंत्रालय ने डुमदंगी (टिन माइल हाट)-रंगापानी-बागडोगरा के बीच प्रस्तावित 35.76 किलोमीटर लंबी नई रेल परियोजना को विशेष रेल परियोजना घोषित किया है। यह घोषणा 3 जुलाई 2026 को जारी अधिसूचना संख्या एस.ओ. 3742(ई) के तहत की गई है। यह परियोजना ऐसे समय में आगे बढ़ रही है जब पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले संकरे गलियारे यानी ‘चिकन नेक’ क्षेत्र में रेलवे आधारभूत संरचना को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इस क्षेत्र में पहले से ही प्रस्तावित ठाकुरगंज-चतरहाट नई बड़ी रेल लाइन की प्रक्रिया जारी है। बंगाल क्षेत्र के रेल नेटवर्क को मिलेगी मजबूती डुमदंगी से रंगापानी होते हुए बागडोगरा तक नई रेल लाइन को विशेष परियोजना का दर्जा मिलने से इस पूरे इलाके में रेल संपर्क के विस्तार की संभावनाएं बढ़ी हैं। रेल विशेषज्ञों का मानना है कि ठाकुरगंज-चतरहाट और डुमदंगी-रंगापानी-बागडोगरा परियोजनाएं मिलकर सीमांचल और उत्तर बंगाल क्षेत्र के रेल नेटवर्क को नई मजबूती प्रदान करेंगी। डुमदंगी स्टेशन एनजेपी-किशनगंज रेलखंड का एक महत्वपूर्ण स्टेशन है। यह अलुआबाड़ी रोड से लगभग 26 किलोमीटर और न्यू जलपाईगुड़ी से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित है। टिन माइल हाट के आगे और चतरहाट से पहले स्थित होने के कारण इसकी भौगोलिक स्थिति इस परियोजना को विशेष महत्व देती है। प्रस्तावित रेल लाइन डुमदंगी से शुरू होकर रंगापानी के रास्ते बागडोगरा तक पहुंचेगी। संवेदनशील क्षेत्र में आता है बागडोगरा बागडोगरा केवल एक प्रमुख परिवहन केंद्र ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां भारतीय वायुसेना की महत्वपूर्ण उपस्थिति है और यह इलाका अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के निकट स्थित संवेदनशील क्षेत्र में आता है। ऐसे में मजबूत रेल संपर्क यात्रियों और माल परिवहन के साथ-साथ आवश्यकता पड़ने पर रसद, उपकरण और अन्य संसाधनों की तेज आवाजाही में भी अहम भूमिका निभाएगा। लेकिन इसके रणनीतिक और आर्थिक महत्व को दूरी के आधार पर नहीं आंका जा सकता। डुमदंगी, रंगापानी और बागडोगरा को रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली यह कड़ी चिकन नेक क्षेत्र में परिवहन क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ पूर्वोत्तर भारत से संपर्क को और सुदृढ़ करने में सहायक हो सकती है। रेल मंत्रालय द्वारा विशेष परियोजना का दर्जा दिए जाने के बाद अब इस रेल लाइन को लेकर क्षेत्र में नई उम्मीदें जगी हैं। आने वाले वर्षों में यह परियोजना न केवल सीमांचल और उत्तर बंगाल के लोगों को बेहतर रेल सुविधा दे सकती है, बल्कि देश की रणनीतिक जरूरतों को भी मजबूती प्रदान कर सकती है।

