डीएमसीएच इमरजेंसी में 55 घंटे बाद लौटी रौनक:पीजी डॉक्टरों की हड़ताल खत्म, काम पर लौटे; डीएम बोले- 24 घंटे में आरोपियों पर होगी कार्रवाई

डीएमसीएच इमरजेंसी में 55 घंटे बाद लौटी रौनक:पीजी डॉक्टरों की हड़ताल खत्म, काम पर लौटे; डीएम बोले- 24 घंटे में आरोपियों पर होगी कार्रवाई

उत्तर बिहार के सबसे बड़े अस्पताल डीएमसीएच में बुधवार रात करीब 11 बजे से जारी पीजी डॉक्टरों की हड़ताल खत्म हो गई है। जिलाधिकारी कौशल कुमार से बातचीत के बाद शुक्रवार देर रात डॉक्टरों ने हड़ताल वापस लेने की घोषणा की। इसके बाद इमरजेंसी सेवा फिर से शुरू कर दी गई। इमरजेंसी सेवा प्रभावित रहने से दरभंगा के अलावा मधुबनी, समस्तीपुर, बेगूसराय, सीतामढ़ी, सहरसा, सुपौल सहित आसपास के जिलों और नेपाल से इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। मरीज इधर-उधर भटकते नजर आए। अब पीजी डॉक्टरों के काम पर लौटने के बाद मरीजों को राहत मिली है। करीब डेढ़ घंटे तक चली वार्ता जिलाधिकारी कौशल कुमार ने अस्पताल अधीक्षक, उपाधीक्षक, प्राचार्य और जीडीए के अध्यक्ष डॉ. कुणाल कुमार झा समेत पीजी डॉक्टरों और छात्र-छात्राओं के साथ बैठक की। डॉक्टरों ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, अस्पताल में अनाधिकृत लोगों के प्रवेश पर रोक लगाने, हॉस्टल एवं मेडिसिन वार्ड की व्यवस्था सुधारने सहित कई मांगें रखी। जीडीए अध्यक्ष डॉ. कुणाल कुमार झा ने बताया कि जिलाधिकारी के साथ सकारात्मक वार्ता हुई है। डॉक्टरों की मांगों पर मौखिक और लिखित आश्वासन मिला है। मरीजों के हित को देखते हुए हड़ताल वापस लेने का निर्णय लिया गया है और इमरजेंसी सेवा फिर से शुरू कर दी गई है। डॉक्टरों की प्रमुख मांग अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर है। इमरजेंसी में सुरक्षा गार्ड और होमगार्ड की व्यवस्था की मांग की गई है। इसके अलावा हॉस्टल और मेडिसिन वार्ड की बदहाल स्थिति, जलजमाव, पेयजल और शौचालय जैसी समस्याओं से भी जिलाधिकारी को अवगत कराया गया। डीएम बोले- 24 घंटे में होगी कार्रवाई जिलाधिकारी कौशल कुमार ने कहा कि डॉक्टरों की मांगें काफी जायज हैं। अस्पताल में हुई कुछ घटनाओं के कारण आक्रोश था। अटेंडेंट द्वारा डॉक्टर और नर्स के साथ दुर्व्यवहार की शिकायतें भी सामने आई हैं। घटना के संबंध में शिकायत मिलने के बाद 24 घंटे के अंदर आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। डीएम ने अस्पताल में अनाधिकृत प्रवेश पर रोक लगाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी और वार्ड जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अनधिकृत लोगों की आवाजाही नहीं होनी चाहिए। अस्पताल में इलाज के दौरान मरीजों की निजता भी महत्वपूर्ण है। 15 सीसीटीवी खराब, 140 नए कैमरे लगेंगे डीएम ने बताया कि डीएमसीएच परिसर में करीब 193 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, जिनमें 10-15 कैमरों के खराब होने की जानकारी मिली है। इन्हें जल्द ठीक कराया जाएगा। इसके अलावा करीब 140 नए सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना है। पांच सदस्यीय डॉक्टरों की कमेटी ऐसे स्थानों को चिह्नित करेगी, जहां अतिरिक्त कैमरों की जरूरत है। इसके बाद डीएमसीएच परिसर के अधिक से अधिक हिस्से को सीसीटीवी की निगरानी में लाया जाएगा। पत्रकारों के प्रवेश को लेकर भी डीएम ने दी हिदायत जिलाधिकारी ने अस्पताल में मीडिया कर्मियों के प्रवेश को लेकर भी कहा कि पत्रकारों के लिए भी अस्पताल की आचार संहिता का पालन जरूरी है। सामान्य आवागमन वाले क्षेत्र में पत्रकार जा सकते हैं, लेकिन आईसीयू, इमरजेंसी और इलाज चल रहे वार्ड में मरीजों की निजता का ध्यान रखना होगा। उपचार के दौरान डॉक्टरों को भी बाधित नहीं किया जाना चाहिए। परिजन से विवाद के बाद शुरू हुआ था आंदोलन बुधवार रात मधुबनी जिले के पंडौल थाना क्षेत्र के मेघौल गांव निवासी शीला देवी के परिजन और ड्यूटी पर तैनात पीजी डॉक्टरों के बीच विवाद हुआ था। इसके बाद डॉक्टरों ने काम बंद कर दिया था।
आंदोलन के दौरान डॉक्टरों ने इमरजेंसी के बाहर धरना दिया और सुरक्षा सहित कई मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। धरना स्थल पर ‘डॉक्टर भी इंसान हैं’, ‘जो जीवन बचाते हैं उनको सुरक्षा दो’ सहित कई स्लोगन लिखी तख्तियां भी लगाई गई थी। घायल डॉक्टर ने हाथ की हड्डी टूटने का लगाया आरोप आंदोलन के दौरान घायल हुए डॉक्टर पंकज ने आरोप लगाया था कि इमरजेंसी बंद होने को लेकर पूछताछ करने पहुंचे कुछ लोगों के साथ विवाद हुआ। इसी दौरान उनके साथ मारपीट की गई, जिससे दाहिने हाथ की हथेली के पास की हड्डी टूट गई। उन्होंने हाथ में प्लास्टर कराने की बात कही थी। हालांकि, इस मामले में आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। गरीब मरीजों पर पड़ा सबसे अधिक असर करीब 55 घंटे तक इमरजेंसी सेवा प्रभावित रहने के कारण गंभीर मरीजों और उनके परिजनों को सबसे अधिक परेशानी हुई। कई मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ा, जहां इलाज में हजारों से लेकर लाखों ए तक खर्च होने की बात परिजनों ने कही। इस दौरान मरीजों के इलाज में देरी और कुछ मौतों की भी जानकारी सामने आई, हालांकि इन मौतों का हड़ताल से सीधा संबंध अलग से चिकित्सकीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
डीएमसीएच में दरभंगा के अलावा उत्तर बिहार के कई जिलों और नेपाल तक से मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में इमरजेंसी सेवा लंबे समय तक प्रभावित रहने का असर बड़ी संख्या में मरीजों पर पड़ा। अधीक्षक बोले- हमारे स्तर की मांग तत्काल पूरी होगी डीएमसीएच अधीक्षक डॉ. जगदीश चंद्र ने कहा कि डॉक्टरों से कई दौर की बातचीत की गई थी। उनके स्तर से जिन मांगों को पूरा किया जा सकता है, उन्हें तत्काल पूरा करने की तैयारी है। जिन मांगों का समाधान उनके स्तर से संभव नहीं है, उसके लिए स्वास्थ्य विभाग और वरीय अधिकारियों को पत्र भेजा गया है। उन्होंने बताया कि कर्पूरी चौक के पास नया हॉस्टल और मेडिसिन वार्ड निर्माणाधीन है। निर्माण पूरा होने के बाद वहां बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। फिलहाल जलजमाव की समस्या दूर करने के लिए पंपिंग सेट से पानी निकाला जा रहा है। डीएम के साथ वार्ता के बाद डॉक्टरों ने हड़ताल वापस ले ली है। देर रात से डीएमसीएच की इमरजेंसी सेवा फिर शुरू हो गई और मरीजों के उपचार की प्रक्रिया सामान्य करने की कवायद शुरू कर दी गई। उत्तर बिहार के सबसे बड़े अस्पताल डीएमसीएच में बुधवार रात करीब 11 बजे से जारी पीजी डॉक्टरों की हड़ताल खत्म हो गई है। जिलाधिकारी कौशल कुमार से बातचीत के बाद शुक्रवार देर रात डॉक्टरों ने हड़ताल वापस लेने की घोषणा की। इसके बाद इमरजेंसी सेवा फिर से शुरू कर दी गई। इमरजेंसी सेवा प्रभावित रहने से दरभंगा के अलावा मधुबनी, समस्तीपुर, बेगूसराय, सीतामढ़ी, सहरसा, सुपौल सहित आसपास के जिलों और नेपाल से इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। मरीज इधर-उधर भटकते नजर आए। अब पीजी डॉक्टरों के काम पर लौटने के बाद मरीजों को राहत मिली है। करीब डेढ़ घंटे तक चली वार्ता जिलाधिकारी कौशल कुमार ने अस्पताल अधीक्षक, उपाधीक्षक, प्राचार्य और जीडीए के अध्यक्ष डॉ. कुणाल कुमार झा समेत पीजी डॉक्टरों और छात्र-छात्राओं के साथ बैठक की। डॉक्टरों ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, अस्पताल में अनाधिकृत लोगों के प्रवेश पर रोक लगाने, हॉस्टल एवं मेडिसिन वार्ड की व्यवस्था सुधारने सहित कई मांगें रखी। जीडीए अध्यक्ष डॉ. कुणाल कुमार झा ने बताया कि जिलाधिकारी के साथ सकारात्मक वार्ता हुई है। डॉक्टरों की मांगों पर मौखिक और लिखित आश्वासन मिला है। मरीजों के हित को देखते हुए हड़ताल वापस लेने का निर्णय लिया गया है और इमरजेंसी सेवा फिर से शुरू कर दी गई है। डॉक्टरों की प्रमुख मांग अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर है। इमरजेंसी में सुरक्षा गार्ड और होमगार्ड की व्यवस्था की मांग की गई है। इसके अलावा हॉस्टल और मेडिसिन वार्ड की बदहाल स्थिति, जलजमाव, पेयजल और शौचालय जैसी समस्याओं से भी जिलाधिकारी को अवगत कराया गया। डीएम बोले- 24 घंटे में होगी कार्रवाई जिलाधिकारी कौशल कुमार ने कहा कि डॉक्टरों की मांगें काफी जायज हैं। अस्पताल में हुई कुछ घटनाओं के कारण आक्रोश था। अटेंडेंट द्वारा डॉक्टर और नर्स के साथ दुर्व्यवहार की शिकायतें भी सामने आई हैं। घटना के संबंध में शिकायत मिलने के बाद 24 घंटे के अंदर आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। डीएम ने अस्पताल में अनाधिकृत प्रवेश पर रोक लगाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी और वार्ड जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अनधिकृत लोगों की आवाजाही नहीं होनी चाहिए। अस्पताल में इलाज के दौरान मरीजों की निजता भी महत्वपूर्ण है। 15 सीसीटीवी खराब, 140 नए कैमरे लगेंगे डीएम ने बताया कि डीएमसीएच परिसर में करीब 193 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, जिनमें 10-15 कैमरों के खराब होने की जानकारी मिली है। इन्हें जल्द ठीक कराया जाएगा। इसके अलावा करीब 140 नए सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना है। पांच सदस्यीय डॉक्टरों की कमेटी ऐसे स्थानों को चिह्नित करेगी, जहां अतिरिक्त कैमरों की जरूरत है। इसके बाद डीएमसीएच परिसर के अधिक से अधिक हिस्से को सीसीटीवी की निगरानी में लाया जाएगा। पत्रकारों के प्रवेश को लेकर भी डीएम ने दी हिदायत जिलाधिकारी ने अस्पताल में मीडिया कर्मियों के प्रवेश को लेकर भी कहा कि पत्रकारों के लिए भी अस्पताल की आचार संहिता का पालन जरूरी है। सामान्य आवागमन वाले क्षेत्र में पत्रकार जा सकते हैं, लेकिन आईसीयू, इमरजेंसी और इलाज चल रहे वार्ड में मरीजों की निजता का ध्यान रखना होगा। उपचार के दौरान डॉक्टरों को भी बाधित नहीं किया जाना चाहिए। परिजन से विवाद के बाद शुरू हुआ था आंदोलन बुधवार रात मधुबनी जिले के पंडौल थाना क्षेत्र के मेघौल गांव निवासी शीला देवी के परिजन और ड्यूटी पर तैनात पीजी डॉक्टरों के बीच विवाद हुआ था। इसके बाद डॉक्टरों ने काम बंद कर दिया था।
आंदोलन के दौरान डॉक्टरों ने इमरजेंसी के बाहर धरना दिया और सुरक्षा सहित कई मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। धरना स्थल पर ‘डॉक्टर भी इंसान हैं’, ‘जो जीवन बचाते हैं उनको सुरक्षा दो’ सहित कई स्लोगन लिखी तख्तियां भी लगाई गई थी। घायल डॉक्टर ने हाथ की हड्डी टूटने का लगाया आरोप आंदोलन के दौरान घायल हुए डॉक्टर पंकज ने आरोप लगाया था कि इमरजेंसी बंद होने को लेकर पूछताछ करने पहुंचे कुछ लोगों के साथ विवाद हुआ। इसी दौरान उनके साथ मारपीट की गई, जिससे दाहिने हाथ की हथेली के पास की हड्डी टूट गई। उन्होंने हाथ में प्लास्टर कराने की बात कही थी। हालांकि, इस मामले में आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। गरीब मरीजों पर पड़ा सबसे अधिक असर करीब 55 घंटे तक इमरजेंसी सेवा प्रभावित रहने के कारण गंभीर मरीजों और उनके परिजनों को सबसे अधिक परेशानी हुई। कई मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ा, जहां इलाज में हजारों से लेकर लाखों ए तक खर्च होने की बात परिजनों ने कही। इस दौरान मरीजों के इलाज में देरी और कुछ मौतों की भी जानकारी सामने आई, हालांकि इन मौतों का हड़ताल से सीधा संबंध अलग से चिकित्सकीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
डीएमसीएच में दरभंगा के अलावा उत्तर बिहार के कई जिलों और नेपाल तक से मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में इमरजेंसी सेवा लंबे समय तक प्रभावित रहने का असर बड़ी संख्या में मरीजों पर पड़ा। अधीक्षक बोले- हमारे स्तर की मांग तत्काल पूरी होगी डीएमसीएच अधीक्षक डॉ. जगदीश चंद्र ने कहा कि डॉक्टरों से कई दौर की बातचीत की गई थी। उनके स्तर से जिन मांगों को पूरा किया जा सकता है, उन्हें तत्काल पूरा करने की तैयारी है। जिन मांगों का समाधान उनके स्तर से संभव नहीं है, उसके लिए स्वास्थ्य विभाग और वरीय अधिकारियों को पत्र भेजा गया है। उन्होंने बताया कि कर्पूरी चौक के पास नया हॉस्टल और मेडिसिन वार्ड निर्माणाधीन है। निर्माण पूरा होने के बाद वहां बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। फिलहाल जलजमाव की समस्या दूर करने के लिए पंपिंग सेट से पानी निकाला जा रहा है। डीएम के साथ वार्ता के बाद डॉक्टरों ने हड़ताल वापस ले ली है। देर रात से डीएमसीएच की इमरजेंसी सेवा फिर शुरू हो गई और मरीजों के उपचार की प्रक्रिया सामान्य करने की कवायद शुरू कर दी गई।  

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