‘ठेला-रिक्शा चलाकर रुपए जमा किए। जमीन खरीदी, फिर 1-1 रुपए जोड़कर घर बनाया। अभी तो गृह प्रवेश भी नहीं किया था। कहा जा रहा घर-जमीन खाली करो। हम लोग मर जाएंगे पर घर-जमीन नहीं छोड़ेंगे।’ ये बातें उन पीड़ितों का कहना है जिन्हें प्रशासन ने जमीन से हटने के लिए नोटिस दिया है। जिसके बाद लोगों में नाराजगी है। वे इतना परेशान हैं कि खाना-पीना तक छोड़ दिया है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को पटना सिटी में नौजर घाट से कंगन घाट के बीच गंगा किनारे बने सभी अवैध और अनधिकृत मकानों सहित अतिक्रमण को हटाने का निर्देश दिया है। इस आदेश के बाद प्रशासन ने करीब 290 मकानों और दुकानों को खाली करने का नोटिस भेजा है।
नोटिस के बाद परिवार ने क्या बताई परेशानी, उनका संघर्ष, पीड़ितों की कैसी है नाराजगी, पढ़ें रिपोर्ट… पहले देखें कुछ तस्वीरें… स्टेशन पर छोला-पूड़ी ठेला पर बेचकर घर बनाया स्थानीय प्रमिला देवी को भी घर खाली करने का नोटिस आया है। उन्होंने कहा कि साल भर पहले ही हमने यहां घर बनाया है। अब हमें नोटिस आ गया है। हमने यहां पर 3 साल पहले जमीन खरीदी थी। तब हमसे नहीं बोला गया था कि ये सरकारी जमीन है। अब हमारे घर को तोड़ा जाएगा। नोटिस में हमें यहां से घर खाली करने को कहा गया है। हमने 5 लाख में जमीन खरीदी थी और 10 लाख रुपए घर बनाने में खर्च हुए। मेरे पति स्टेशन पर ठेला लगाकर छोला-पूड़ी बेचते हैं। उसी पैसे से जमीन खरीदी और घर बनाया था। अगर हमारा घर नाजायज तो गुरुद्वारा को भी तोड़ने का नोटिस भेजे बबीता देवी ने नोटिस आने के बाद गुरुद्वारा पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि यहां की जमीन पर रहने वाले सभी लोगों को नोटिस आया है, तो गुरुद्वारा भी तो इसी जमीन पर है। गुरुद्वारा जायज है और हमारा घर नाजायज है। अगर तोड़ना ही है तो गुरुद्वारा को भी नोटिस दीजिए। मेरे पति ऑटो रिक्शा चलाते हैं और उसी से हमारा घर चलता है। सर से छत हठ जाने के बाद आखिर हम बाल-बच्चा से ठेला खिंचवाएंगे या फिर उसे पढ़ाएंगे। अब इतना जल्दी दूसरा घर तो नहीं बनेगा। जब जमीन खरीदी गई थी तब नहीं बताया गया था कि यह सरकारी जमीन है, नहीं तो यहां हम कभी भी घर नहीं बनाते।
गृह प्रवेश भी नहीं किया, उससे पहले नोटिस आ गया स्थानीय निवासी सरिता देवी ने हाल ही में यहां नया घर बनाया था। गृह प्रवेश भी नहीं किया उससे पहले ही नोटिस आ गया। इतने साल से हम यहां घर बनाकर रह रहे थे, तब किसी ने कुछ नहीं कहा और अचानक से हमें कहा जा रहा है कि सरकारी जमीन है, इसे खाली कर दें। मेरे तीन बच्चे हैं, एक सयानी बेटी है, जिसकी अभी शादी करवानी है। आखिर घर टूट जाएगा तो हम कहां जाएंगे। हम लोग अब यही मना रहे हैं कि किसी तरह हमारी जमीन बच जाए। टेंशन से घर में कोई खाना नहीं खा रहा संतोष कुमार ने कहा कि सरकार की ओर से हमें नोटिस आया है, लेकिन हमारी जमीन थाना नंबर 110 में है और हमें 170 से नोटिस आया है, तो हम इसे आखिर क्यों माने। सरकार बोल रही है कि यहां पर डेवलपमेंट होगा, हमें विकास के नाम पर लूट रही है। मेरे पापा ने यहां घर बनाया था और मेरा जन्म यहीं हुआ है। मेरे परिवार में छोटे-छोटे बच्चे हैं, आखिर अब हम लोग कहां जाएंगे। नोटिस से टेंशन से घर में कोई खाना नहीं खा रहा है। सभी लोग अन्न-पानी छोड़े हुए हैं। हम लोग विधायक और पार्षद के पास गए लेकिन कोई भी सुनने को तैयार नहीं है। हम लोग मर जाएंगे लेकिन घर खाली नहीं करेंगे। गोईठा ठोककर जमीन लिए, अब नहीं छोड़ेंगे गणिता देवी ने कहा कि हमारी तीन पीढ़ियां यहां पर बीत गई है। अब जाकर हमें यहां खाली करने का नोटिस आया है। जब यहां पानी भरा रहता था तब तो हमें यहां से नहीं भगाया गया। अब जब हम यहां पर घर बनाकर अच्छे से रह रहे हैं तो ये सरकार का हो गया है? यह मेरी जमीन है, मेरे बाप-दादा की जमीन है। इसे मैं किसी भी कीमत पर नहीं छोडूंगी। मर जाएंगे, मिट जाएंगे लेकिन जमीन नहीं छोड़ेंगे। जब रजिस्ट्री करने गए थे तभी बोल देता कि यह सरकारी जमीन है, नहीं ले। हम लोग गरीब आदमी गोईठा ठोककर जमीन लिए हैं। अब इस जमीन को नहीं छोड़ेंगे।
बिजली-पानी का टैक्स भर रहे हैं और अब घर खाली करने कहा जा रहा 40 साल से इलाके में रह रहे गुलाब ने कहा कि हमें भी नोटिस आया है, आखिर अब हम जाएं तो कहां जाएं। अपने बाप-दादा की संपत्ति बेचकर हमने यहां जमीन लेकर घर बनाया था। जब हमने जमीन रजिस्ट्री करवाई तब हमें कुछ नहीं कहा गया था। हमने पानी और बिजली मांगा तो सरकार ने हमें वह भी उपलब्ध कराया। सारी चीज का हम टैक्स भर रहे हैं और अब कहां जा रहा है कि यह सरकारी जमीन है। इसे खाली कर दो। सरकार हमारी जमीन जबरदस्ती हड़पना चाहती दिलीप कुमार ने कहा कि हम ठेला-रिक्शा चलाकर यहां जमीन खरीदे और घर बनाया। कल अगर यह टूट जाता है, तो हम अपने बच्चों को लेकर कहां जाएंगे। अपने बच्चों के भविष्य के लिए आखिर हम लोग क्या कर पाएंगे। हम सरकार से गुहार लगाते हैं कि हमारी जमीन नहीं ली जाए। इस नोटिस से हमें काफी सदमा लगा है। घर में बच्चे हताश हो गए हैं। हम लोग थाना नंबर 110 में रह रहे हैं। इस लिए 169-170 से आए हुए नोटिस को हम लोग नहीं मानेंगे। जबरदस्ती सरकार हमारी जमीन हड़पना चाहती है। ‘ठेला-रिक्शा चलाकर रुपए जमा किए। जमीन खरीदी, फिर 1-1 रुपए जोड़कर घर बनाया। अभी तो गृह प्रवेश भी नहीं किया था। कहा जा रहा घर-जमीन खाली करो। हम लोग मर जाएंगे पर घर-जमीन नहीं छोड़ेंगे।’ ये बातें उन पीड़ितों का कहना है जिन्हें प्रशासन ने जमीन से हटने के लिए नोटिस दिया है। जिसके बाद लोगों में नाराजगी है। वे इतना परेशान हैं कि खाना-पीना तक छोड़ दिया है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को पटना सिटी में नौजर घाट से कंगन घाट के बीच गंगा किनारे बने सभी अवैध और अनधिकृत मकानों सहित अतिक्रमण को हटाने का निर्देश दिया है। इस आदेश के बाद प्रशासन ने करीब 290 मकानों और दुकानों को खाली करने का नोटिस भेजा है।
नोटिस के बाद परिवार ने क्या बताई परेशानी, उनका संघर्ष, पीड़ितों की कैसी है नाराजगी, पढ़ें रिपोर्ट… पहले देखें कुछ तस्वीरें… स्टेशन पर छोला-पूड़ी ठेला पर बेचकर घर बनाया स्थानीय प्रमिला देवी को भी घर खाली करने का नोटिस आया है। उन्होंने कहा कि साल भर पहले ही हमने यहां घर बनाया है। अब हमें नोटिस आ गया है। हमने यहां पर 3 साल पहले जमीन खरीदी थी। तब हमसे नहीं बोला गया था कि ये सरकारी जमीन है। अब हमारे घर को तोड़ा जाएगा। नोटिस में हमें यहां से घर खाली करने को कहा गया है। हमने 5 लाख में जमीन खरीदी थी और 10 लाख रुपए घर बनाने में खर्च हुए। मेरे पति स्टेशन पर ठेला लगाकर छोला-पूड़ी बेचते हैं। उसी पैसे से जमीन खरीदी और घर बनाया था। अगर हमारा घर नाजायज तो गुरुद्वारा को भी तोड़ने का नोटिस भेजे बबीता देवी ने नोटिस आने के बाद गुरुद्वारा पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि यहां की जमीन पर रहने वाले सभी लोगों को नोटिस आया है, तो गुरुद्वारा भी तो इसी जमीन पर है। गुरुद्वारा जायज है और हमारा घर नाजायज है। अगर तोड़ना ही है तो गुरुद्वारा को भी नोटिस दीजिए। मेरे पति ऑटो रिक्शा चलाते हैं और उसी से हमारा घर चलता है। सर से छत हठ जाने के बाद आखिर हम बाल-बच्चा से ठेला खिंचवाएंगे या फिर उसे पढ़ाएंगे। अब इतना जल्दी दूसरा घर तो नहीं बनेगा। जब जमीन खरीदी गई थी तब नहीं बताया गया था कि यह सरकारी जमीन है, नहीं तो यहां हम कभी भी घर नहीं बनाते।
गृह प्रवेश भी नहीं किया, उससे पहले नोटिस आ गया स्थानीय निवासी सरिता देवी ने हाल ही में यहां नया घर बनाया था। गृह प्रवेश भी नहीं किया उससे पहले ही नोटिस आ गया। इतने साल से हम यहां घर बनाकर रह रहे थे, तब किसी ने कुछ नहीं कहा और अचानक से हमें कहा जा रहा है कि सरकारी जमीन है, इसे खाली कर दें। मेरे तीन बच्चे हैं, एक सयानी बेटी है, जिसकी अभी शादी करवानी है। आखिर घर टूट जाएगा तो हम कहां जाएंगे। हम लोग अब यही मना रहे हैं कि किसी तरह हमारी जमीन बच जाए। टेंशन से घर में कोई खाना नहीं खा रहा संतोष कुमार ने कहा कि सरकार की ओर से हमें नोटिस आया है, लेकिन हमारी जमीन थाना नंबर 110 में है और हमें 170 से नोटिस आया है, तो हम इसे आखिर क्यों माने। सरकार बोल रही है कि यहां पर डेवलपमेंट होगा, हमें विकास के नाम पर लूट रही है। मेरे पापा ने यहां घर बनाया था और मेरा जन्म यहीं हुआ है। मेरे परिवार में छोटे-छोटे बच्चे हैं, आखिर अब हम लोग कहां जाएंगे। नोटिस से टेंशन से घर में कोई खाना नहीं खा रहा है। सभी लोग अन्न-पानी छोड़े हुए हैं। हम लोग विधायक और पार्षद के पास गए लेकिन कोई भी सुनने को तैयार नहीं है। हम लोग मर जाएंगे लेकिन घर खाली नहीं करेंगे। गोईठा ठोककर जमीन लिए, अब नहीं छोड़ेंगे गणिता देवी ने कहा कि हमारी तीन पीढ़ियां यहां पर बीत गई है। अब जाकर हमें यहां खाली करने का नोटिस आया है। जब यहां पानी भरा रहता था तब तो हमें यहां से नहीं भगाया गया। अब जब हम यहां पर घर बनाकर अच्छे से रह रहे हैं तो ये सरकार का हो गया है? यह मेरी जमीन है, मेरे बाप-दादा की जमीन है। इसे मैं किसी भी कीमत पर नहीं छोडूंगी। मर जाएंगे, मिट जाएंगे लेकिन जमीन नहीं छोड़ेंगे। जब रजिस्ट्री करने गए थे तभी बोल देता कि यह सरकारी जमीन है, नहीं ले। हम लोग गरीब आदमी गोईठा ठोककर जमीन लिए हैं। अब इस जमीन को नहीं छोड़ेंगे।
बिजली-पानी का टैक्स भर रहे हैं और अब घर खाली करने कहा जा रहा 40 साल से इलाके में रह रहे गुलाब ने कहा कि हमें भी नोटिस आया है, आखिर अब हम जाएं तो कहां जाएं। अपने बाप-दादा की संपत्ति बेचकर हमने यहां जमीन लेकर घर बनाया था। जब हमने जमीन रजिस्ट्री करवाई तब हमें कुछ नहीं कहा गया था। हमने पानी और बिजली मांगा तो सरकार ने हमें वह भी उपलब्ध कराया। सारी चीज का हम टैक्स भर रहे हैं और अब कहां जा रहा है कि यह सरकारी जमीन है। इसे खाली कर दो। सरकार हमारी जमीन जबरदस्ती हड़पना चाहती दिलीप कुमार ने कहा कि हम ठेला-रिक्शा चलाकर यहां जमीन खरीदे और घर बनाया। कल अगर यह टूट जाता है, तो हम अपने बच्चों को लेकर कहां जाएंगे। अपने बच्चों के भविष्य के लिए आखिर हम लोग क्या कर पाएंगे। हम सरकार से गुहार लगाते हैं कि हमारी जमीन नहीं ली जाए। इस नोटिस से हमें काफी सदमा लगा है। घर में बच्चे हताश हो गए हैं। हम लोग थाना नंबर 110 में रह रहे हैं। इस लिए 169-170 से आए हुए नोटिस को हम लोग नहीं मानेंगे। जबरदस्ती सरकार हमारी जमीन हड़पना चाहती है।


