अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इजराइल के लोगों से प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को दोबारा प्रधानमंत्री चुनने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बीबी नेतन्याहू आपको कभी निराश नहीं करेंगे। ट्रम्प ने चेतावनी दी कि अगर इजराइल ने नेतन्याहू के अलावा किसी दूसरे नेता को चुना, तो अमेरिका को ईरान के खिलाफ लड़ाई खुद लड़नी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि वे ऐसा करने के इच्छुक नहीं हैं। ट्रम्प ने इजराइल के लोगों के नाम जारी संदेश में नेतन्याहू को ‘मजबूत, बहादुर और शानदार’ नेता बताया। ट्रम्प बोले- नेतन्याहू मुश्किल हालात में डटे रहे ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने नेतन्याहू को बेहद कठिन परिस्थितियों में काम करते देखा है। उनके मुताबिक, ऐसे दबाव में आम लोग कमजोर पड़ जाते, लेकिन नेतन्याहू मजबूती से डटे रहे। उन्होंने यह भी कहा कि नेतन्याहू को इजराइल के भीतर से विरोध का सामना करना पड़ा है। ट्रम्प ने ईरान पर पिछले 51 साल से इजराइल और अमेरिका को मिटाने की धमकी देने का आरोप लगाया। उन्होंने ईरान के नारे ‘इजराइल की मौत, अमेरिका की मौत’ का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे बयानों को नजरअंदाज करना खतरनाक है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की सैन्य और आर्थिक ताकत को व्यवस्थित तरीके से कमजोर किया गया है। ट्रम्प ने कहा कि अगर ईरान ने तेजी से अपना रवैया नहीं बदला, तो अमेरिका जल्द ही बाकी काम भी पूरा कर देगा। 4 सर्वे में नेतन्याहू पीएम पद की रेस में पिछड़े इजराइल में 27 अक्टूबर को होने वाले चुनाव से पहले आए चार सर्वे में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी, गैडी आइजनकोट की याशर पार्टी से पिछड़ रही है। चारों सर्वे के औसत में याशर को 21.5 और लिकुड को 19 सीटें मिलने का अनुमान है।
मारिव और चैनल 13 के सर्वे में लिकुड को 18-18 सीटें, जबकि चैनल 13 में याशर को 20 सीटें मिलने का अनुमान है। कान न्यूज के सर्वे में भी याशर आगे है। चैनल 12 के मुताबिक, याशर को 23 और लिकुड को 20 सीटें मिल सकती हैं। हालांकि, किसी भी गठबंधन को बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटें मिलती नहीं दिख रहीं। नेतन्याहू के गठबंधन को 49 से 53 और आइजनकोट के नेतृत्व वाले विपक्ष को 50 से 54 सीटें मिलने का अनुमान है। अरब पार्टियों को औसतन 13.75 सीटें मिल सकती हैं, जिससे सरकार बनाने में उनकी भूमिका अहम हो सकती है। ट्रम्प-नेतन्याहू की दोस्ती: 5 बड़े फैसले, जिन्होंने मिडिल ईस्ट की राजनीति बदली 1. यरुशलम को इजराइल की राजधानी की मान्यता (2017-18) ट्रम्प प्रशासन ने अमेरिकी नीति बदलते हुए यरुशलम को इजराइल की राजधानी माना और अमेरिकी दूतावास वहां शिफ्ट किया। 2. गोलान हाइट्स पर इजराइल के दावे को मान्यता (2019) अमेरिका ने सीरिया के गोलान हाइट्स पर इजराइल की संप्रभुता को मान्यता दी। 3. अब्राहम समझौता (2020) अमेरिका की मध्यस्थता में इजराइल ने संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन के साथ संबंध सामान्य किए। बाद में अन्य देशों के साथ भी समझौते हुए। 4. ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका की वापसी (2018) ट्रम्प ने ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते से अमेरिका को बाहर निकाला। इससे इजराइल की ईरान नीति को समर्थन मिला, लेकिन क्षेत्रीय तनाव भी बढ़ा। 5. गाजा युद्ध और इजराइल को समर्थन ट्रम्प के दोनों कार्यकालों में गाजा युद्ध और इजराइल की सैन्य कार्रवाई को लेकर अमेरिकी नीति दोनों देशों के रिश्तों का अहम मुद्दा रही। —————————–
ट्रम्प ने इजराइलियों से कहा- नेतन्याहू को दोबारा प्रधानमंत्री बनाएं:किसी और को चुना तो ईरान के खिलाफ अमेरिका को अकेले लड़ना पड़ेगा

