झोटा हत्याकांड के बाद मेडिकल स्टोरों की जांच तेज:बठिंडा में अब तक 52 हजार दवाएं की जब्त; केमिस्ट एसोसिएशन ने हैबिट फार्मा व नारकोटिक्स दवाओं का कारोबार किया बंद

झोटा हत्याकांड के बाद मेडिकल स्टोरों की जांच तेज:बठिंडा में अब तक 52 हजार दवाएं की जब्त; केमिस्ट एसोसिएशन ने हैबिट फार्मा व नारकोटिक्स दवाओं का कारोबार किया बंद

मानसा में परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले के बाद पंजाब में नशीली दवाओं की बिक्री को लेकर कार्रवाई और निगरानी तेज होती दिखाई दे रही है। इसी बीच बठिंडा में पुलिस और ड्रग विभाग की संयुक्त टीमें मेडिकल स्टोरों की जांच के लिए फील्ड में उतरी हुई हैं। पिछले 5 दिनों से चल रही जांच के दौरान मेडिकल स्टोरों से 28 तरह की करीब 52 हजार ब्रांडेड दवाएं जब्त की गई हैं। दूसरी ओर पंजाब केमिस्ट एसोसिएशन ने हैबिट फार्मा और नारकोटिक्स श्रेणी की दवाओं की खरीद-बिक्री बंद कर दी है। 2,080 मेडिकल स्टोरों की जांच के दायरे में
जोनल ड्रग्स लाइसेंस अथॉरिटी कमल कंबोज के अनुसार बठिंडा जिले में करीब 2,080 मेडिकल स्टोर संचालित हैं। जिला पुलिस और ड्रग विभाग की संयुक्त टीमें पिछले 5 दिनों से इन स्टोरों की जांच कर रही हैं। टीमों में पुलिस कर्मचारियों के साथ ड्रग इंस्पेक्टर भी शामिल हैं। संयुक्त टीमों ने बठिंडा शहर के भागू रोड, अजीत रोड और पावर हाउस रोड के अलावा रामपुरा फूल, कोटफत्ता, रामनगर, विर्क, गिल कलां, भाई बख्तौर और कोटभारा में 65 से अधिक मेडिकल स्टोरों की जांच की जा चुकी है। इस दौरान दवाओं की उपलब्धता और उनकी खरीद-बिक्री से संबंधित बिल व रिकॉर्ड की पड़ताल की गई।जांच के दौरान 28 तरह की करीब 52 हजार ब्रांडेड दवाएं मिलीं। केमिस्ट एसोसिएशन ने हैबिट फार्मा व नारकोटिक्स दवाओं की बिक्री बंद
जिला केमिस्ट एसोसिएशन बठिंडा के प्रधान अशोक बालियांवाली ने बताया कि जिले के सभी केमिस्केट ने हैबिट फार्मा व नारकोटिक्स दवाओं की बिक्री पूर्ण रूप से बंद कर दी है। एसाेसिएशन के फैसले अनुसार रिटेल केमिस्ट अपने पास मौजूद संबंधित दवाओं का स्टॉक होलसेल केमिस्टों को लौटाएंगे। इसके बाद होलसेल कारोबारी यह स्टॉक संबंधित कंपनियों को वापस करना शुरू कर दिया है। इसमें प्रीगैबालिन और ट्रामाडोल सहित संबंधित दवाएं शामिल हैं।एसोसिएशन ने मानसा की घटना की निंदा करते हुए कहा कि केमिस्ट समाज पंजाब सरकार की नशा-विरोधी मुहिम में सहयोग कर रहा है। साथ ही, संगठन ने वैध तरीके से दवा कारोबार करने वाले दुकानदारों को जांच के दौरान अनावश्यक परेशानी से बचाने की मांग भी उठाई। रिकॉर्ड में देरी पर कार्रवाई को लेकर चिंता
अशोक बालियांवाली ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में प्रीगैबालिन जैसी दवाओं की बिक्री के बाद रिकॉर्ड दर्ज करने में देरी या दस्तावेजों में कमी के कारण केमिस्टों को पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में तथ्यों की जांच और उचित प्रक्रिया का पालन होना चाहिए।
जिला फाइनेंस सेक्रेटरी रमेश गर्ग ने स्पष्ट किया कि एसोसिएशन नियमों का उल्लंघन करने या दवाओं के गलत इस्तेमाल में संलिप्त किसी केमिस्ट का समर्थन नहीं करती। उनके अनुसार, नशीली दवाओं की अवैध बिक्री करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। केमिस्ट समाज नशे के खिलाफ सरकार की मुहिम में सहयोग कर रहा है, लेकिन नियमों के अनुसार कारोबार करने वाले दुकानदारों को निष्पक्ष तरीके से काम करने का अवसर मिलना चाहिए।

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