जौनपुर में चाइनीज मांझे से बाइक सवार का गला कटा:सद्भावना पुल पर हादसा, दोस्तों ने कपड़ा बांधकर रोका खून; प्रतिबंध के बावजूद बिक्री पर उठे सवाल

जौनपुर में चाइनीज मांझे से बाइक सवार का गला कटा:सद्भावना पुल पर हादसा, दोस्तों ने कपड़ा बांधकर रोका खून; प्रतिबंध के बावजूद बिक्री पर उठे सवाल

जौनपुर में प्रतिबंधित चाइनीज मांझा लोगों की जान के लिए खतरा बना हुआ है। आए दिन इसके कारण लोगों के घायल होने की घटनाएं सामने आ रही हैं। प्रशासन छापेमारी और कार्रवाई का दावा करता है, इसके बावजूद शहर में इसकी बिक्री कैसे जारी है, यह सवाल बना हुआ है। ताजा मामला रविवार शाम करीब 4 बजे शहर कोतवाली क्षेत्र के सद्भावना पुल का है। यहां बाइक से घर जा रहे युवक की गर्दन में चाइनीज मांझा फंस गया। धारदार मांझे से उसका गला कट गया। साथियों ने तत्काल कपड़ा बांधकर खून रोकने की कोशिश की और उसे जिला अस्पताल पहुंचाया। समय पर इलाज मिलने से युवक की जान बच गई। आसमान से गर्दन में आकर फंसा मांझा शहर के पानदरीबा निवासी संतोष कुमार मौर्या रविवार को ओलंदगंज से बाइक से अपने घर जा रहे थे। वह सद्भावना पुल पर राजेश बिरयानी वाले के पास पहुंचे थे, तभी आसमान में उड़ रहा मांझा अचानक उनकी गर्दन में आकर फंस गया। धारदार मांझे से गर्दन पर कट लगते ही संतोष घबरा गए। उनके साथ मौजूद दोस्त शानू और अन्य साथियों ने तुरंत गर्दन पर कपड़ा रखकर खून रोकने की कोशिश की। इसके बाद घायल संतोष को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, समय पर उपचार मिलने से उनकी हालत खतरे से बाहर है और गर्दन पर कोई गंभीर चोट नहीं आई है। प्रतिबंध के बावजूद बाजार में कैसे पहुंच रहा चाइनीज मांझा? उत्तर प्रदेश में चाइनीज मांझे की बिक्री पर प्रतिबंध है। इसके बावजूद इसके इस्तेमाल और बिक्री की शिकायतें सामने आती रहती हैं। चाइनीज मांझा सामान्य पतंग की डोर से अलग होता है। इसमें नायलॉन के साथ कांच और धातु के पाउडर का इस्तेमाल किए जाने की वजह से यह काफी धारदार और मजबूत होता है। यही कारण है कि सड़क पर बाइक सवारों, राहगीरों और पक्षियों के लिए यह गंभीर खतरा बन जाता है। छापेमारी और कार्रवाई के बावजूद नहीं रुक रही बिक्री चाइनीज मांझे की बिक्री रोकने के लिए प्रशासन और पुलिस की ओर से समय-समय पर चेकिंग और छापेमारी की जाती है। प्रतिबंधित मांझा मिलने पर कार्रवाई और गिरफ्तारी का भी दावा किया जाता है। इसके बावजूद सवाल है कि अगर लगातार कार्रवाई हो रही है तो शहर में प्रतिबंधित मांझा पहुंच कहां से रहा है और इसकी बिक्री कौन कर रहा है? घटना के बाद प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। खासकर शहर कोतवाली क्षेत्र में पतंग और मांझे की दुकानों पर नियमित निगरानी और चेकिंग कितनी प्रभावी है, इस पर भी सवाल खड़े हुए हैं। सिटी मजिस्ट्रेट और नगर पालिका की टीम करेगी चेकिंग सिटी मजिस्ट्रेट महिपाल सिंह ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। उन्होंने कहा कि सोमवार को नगर पालिका के ईओ और शहर कोतवाल के साथ चेकिंग अभियान चलाया जाएगा। प्रतिबंधित चाइनीज मांझा बेचते हुए कोई मिला तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हादसे रोकने के लिए सिर्फ घटना के बाद कार्रवाई काफी? चाइनीज मांझे से हुए हादसे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रतिबंध के बावजूद इसकी बिक्री पर पूरी तरह रोक क्यों नहीं लग पा रही है। क्या प्रशासन को दुकानों और बिक्री के संभावित ठिकानों की जानकारी नहीं है या कार्रवाई के बावजूद कारोबार फिर शुरू हो जाता है? रविवार को हुए हादसे ने एक बार फिर इस निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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