बेटे के सदमे से नहीं उबर सके पिता जौनपुर में हुए चर्चित ताइक्वांडो खिलाड़ी अनुराग यादव हत्याकांड से जुड़े परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। इकलौते बेटे की निर्मम हत्या के सदमे से परिवार अभी उबर भी नहीं पाया था कि अब पिता रामजीत यादव के निधन ने परिजनों को पूरी तरह तोड़कर रख दिया है। वाराणसी स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में उपचार के दौरान रामजीत यादव ने गुरुवार रात 11 बजे अंतिम सांस ली, जिसके बाद शुक्रवार सुबह 6 बजे उनका शव गांव लाया गया। तलवार से हमला कर सिर धड़ से किया गया था अलग 30 अक्टूबर 2024 की सुबह कबीरुद्दीनपुर गांव में जमीन विवाद के चलते ताइक्वांडो खिलाड़ी अनुराग यादव की तलवार से हमला कर निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस भयावह वारदात में अनुराग का सिर धड़ से अलग हो गया था, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था। वारदात के बाद से ही परिवार लगातार आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और न्याय की मांग कर रहा था। लंबी बीमारी और मानसिक पीड़ा ने ली जान परिजनों के अनुसार, इकलौते जवान बेटे की मौत के बाद से रामजीत यादव गहरे मानसिक आघात में थे। वह लगातार गम और बीमारी से जूझ रहे थे। उनका लीवर डैमेज हो गया था। हाल ही में तबीयत बिगड़ने पर उन्हें बीएचयू वाराणसी में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। परिवार पहले से ही आर्थिक और मानसिक परेशानियों से जूझ रहा था, ऐसे में मुखिया के जाने से उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर चुके थे अनुराग राज इंटर कॉलेज में इंटरमीडिएट के छात्र अनुराग यादव (17) ताइक्वांडो के उदीयमान खिलाड़ी थे। उन्होंने इंडो-नेपाल अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में कांस्य पदक और नोएडा ओपन नेशनल प्रतियोगिता में रजत पदक जीतकर क्षेत्र का नाम रोशन किया था। अनुराग अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे और उनकी दो बहनें स्वाति व आराधना हैं। मुआवजे और न्याय की मांग फिर हुई तेज इस घटना के बाद नवंबर 2024 में पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर एक लाख रुपये की आर्थिक मदद दी थी और दोनों बहनों की पढ़ाई का खर्च उठाने का ऐलान किया था। अब पिता रामजीत यादव की मौत के बाद परिवार को इंसाफ दिलाने, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और पीड़ित परिवार को प्रशासनिक सहायता देने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है।

