चित्तौड़गढ़ में अवैध खनन और खनिज परिवहन में गड़बड़ी रोकने के लिए खान विभाग ने डिजिटल निगरानी व्यवस्था लागू की है। अब खदान से निकलने वाले खनिज वाहनों की GPS, जियो-फेंसिंग, VLTD और RFID के जरिए निगरानी होगी। वाहन की लोकेशन, रुकने की जगह, वे-ब्रिज पर वजन और डेस्टिनेशन तक पहुंचने की जानकारी ऑनलाइन रिकॉर्ड होगी। जिले में अब तक 300 से ज्यादा वाहनों में GPS और 50 से अधिक वे-ब्रिज ऑटोमेशन सिस्टम से जोड़े जा चुके हैं। खदान से बाहर निकलते ही शुरू होगी ट्रैकिंग खान विभाग के एमई एहतेशाम सिद्दीकी ने बताया कि नई व्यवस्था में खनिज वाहन की निगरानी खदान से ही शुरू हो जाएगी। जियो-फेंसिंग के जरिए खदान का क्षेत्र डिजिटल रूप से तय किया गया है। वाहन के इस क्षेत्र से बाहर निकलते ही सिस्टम उसकी यात्रा का रिकॉर्ड तैयार कर देगा। इसके बाद वाहन की लोकेशन GPS के जरिए विभाग के कंट्रोल सिस्टम तक पहुंचती रहेगी। वाहन तय रास्ते से हटता है, अनावश्यक रूप से कहीं रुकता है या दूसरे रास्ते पर जाता है तो इसकी जानकारी भी रिकॉर्ड होगी। इस व्यवस्था में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD), GPS और RFID तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे हर वाहन की अलग डिजिटल पहचान बनी रहेगी। वे-ब्रिज पर कैमरा पढ़ेगा नंबर प्लेट नई व्यवस्था में जिले के 50 से ज्यादा वे-ब्रिज ऑटोमेशन सिस्टम से जुड़ चुके हैं। वाहन के वे-ब्रिज पर पहुंचते ही वहां लगे कैमरे उसकी नंबर प्लेट पढ़ेंगे। वाहन का वजन सीधे ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज होगा। वे-ब्रिज में लगे सेंसर वाहन को ट्रैक करेंगे। वे-ब्रिज भी जियो-फेंसिंग से जुड़े हैं, इसलिए सिस्टम यह पुष्टि कर सकेगा कि वाहन निर्धारित स्थान पर पहुंचा है। इसके बाद रवन्ना की डिजिटल पुष्टि होगी और कंसाइनमेंट आगे बढ़ेगा। पूरी प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप कम होने से वजन में हेराफेरी, फर्जी बिलिंग और गलत जानकारी दर्ज करने की संभावना कम होगी। डेस्टिनेशन तक रिकॉर्ड रहेगा सक्रिय वाहन का डिजिटल रिकॉर्ड उसके डेस्टिनेशन तक पहुंचने तक सक्रिय रहेगा। रास्ते में उसकी हर लोकेशन दर्ज होती रहेगी और खान विभाग इसकी मॉनिटरिंग करेगा। डेस्टिनेशन पर पहुंचने के बाद ही डिजिटल यात्रा पूरी मानी जाएगी और ट्रांजिट प्रक्रिया समाप्त होगी। अगर वाहन रास्ते में निर्धारित मार्ग से हटता है या तय जगह तक नहीं पहुंचता है तो उसकी जानकारी सिस्टम में उपलब्ध होगी। खनिज की मात्रा, परिवहन का समय और पूरे रूट का रिकॉर्ड भी सुरक्षित रहेगा। जरूरत पड़ने पर शिकायत या जांच के दौरान यह जानकारी देखी जा सकेगी। बिना GPS वाले वाहन को ई-रवन्ना नहीं एमई एहतेशाम सिद्दीकी ने बताया कि अब बिना GPS और निर्धारित तकनीकी व्यवस्था वाले वाहन को ई-रवन्ना जारी नहीं किया जाएगा। इससे केवल अधिकृत वाहन ही खनिज परिवहन कर सकेंगे। विभाग के अनुसार नई व्यवस्था से अवैध खनन, फर्जी रवन्ना, नकली ट्रांजिट पास, गलत वजन दिखाने और रास्ते में खनिज उतारने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही सरकार की रॉयल्टी की निगरानी भी अधिक सटीक होगी। 300 से ज्यादा वाहनों में GPS चित्तौड़गढ़ जिले में अब तक 300 से ज्यादा खनिज वाहनों में GPS सिस्टम लगाया जा चुका है। 50 से अधिक वे-ब्रिज को ऑटोमेशन सिस्टम से जोड़ा गया है। विभाग के अनुसार आने वाले समय में जिले का पूरा खनिज परिवहन इसी डिजिटल व्यवस्था के तहत संचालित किया जाएगा।


