जिला कारागार में पूरी रात करवट बदलते रहे साहिल-मुस्कान:दोनों ने नहीं खाया खाना, साहिल सजायाफ्ता कैदियों की बैरक में पहुंचा, मुस्कान रोती रही

जिला कारागार में पूरी रात करवट बदलते रहे साहिल-मुस्कान:दोनों ने नहीं खाया खाना, साहिल सजायाफ्ता कैदियों की बैरक में पहुंचा, मुस्कान रोती रही

मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत से मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद साहिल और मुस्कान की जेल में पहली रात सामान्य नहीं रही। जेल सूत्रों के मुताबिक सजा सुनाए जाने के बाद दोनों ने रात का खाना नहीं खाया। मुस्कान अपनी बच्ची को गोद में लेकर बैरक के एक कोने में बैठी रही। उसके साथ समय बिताने वाली महिला बंदियों ने उसे समझाने और संभालने की कोशिश की लेकिन वह देर रात तक रोती रही। यह पहला मौका था, जब वह अपने परिवार को याद करती रही। अदालत के फैसले के बाद जेल प्रशासन ने दोनों की स्थिति के अनुरूप आवश्यक व्यवस्थाएं कीं। रात में ही साहिल को सफेद कुर्ता-पायजामा और मुस्कान को सजायाफ्ता कैदियों के लिए निर्धारित क्रीम रंग का सूट उपलब्ध कराया गया। इसके बाद साहिल को सजायाफ्ता कैदियों की बैरक में स्थानांतरित कर दिया गया। कैदी नंबर 395 साहिल की नई पहचान है। मुस्कान फिलहाल उसी बैरक में रहेगी, जहां वह पहले से बंद है। उसकी बच्ची भी उसके साथ है। बच्ची की मौजूदगी के कारण मुस्कान की स्थिति पर विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है। हालांकि मुस्कान को कैदी नंबर 396 के रूप में जेल में जाना जाएगा। रोती रही मुस्कान, महिला बंदियों ने संभाला
जेल में मुस्कान के साथ काफी समय बिताने वाली महिला बंदियों ने उसे समझाने का प्रयास किया। सूत्रों के अनुसार, वह पूरी रात भावुक रही और रोती रही। बताया गया कि वह अपने परिवार को याद कर रही थी। रात में महिला जेल अधिकारियों ने भी उससे मुलाकात की और उसका हाल जाना। हर दिन दो बार होगा स्वास्थ्य परीक्षण
बंदी को सजा सुनाए जाने के बाद जेल मैन्युअल में उसके लिए अतिरिक्त इंतजाम किए गए हैं। इनमें स्वास्थ्य निगरानी भी शामिल है। जेल प्रशासन की ओर से साहिल-मुस्कान की स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखने के लिए दिन में दो बार चेकअप कराने की व्यवस्था की गई है। हालांकि, दोनों के स्वास्थ्य से जुड़ी कोई समस्या फिलहाल सामने नहीं आई है। नवरात्र के कार्यक्रम से भी रहे दूर
जिला कारागार में नवरात्र के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सजा सुनाए जाने के बाद साहिल और मुस्कान ने इन कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखी। जेल सूत्रों के मुताबिक, दोनों ने कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया। अदालत के फैसले के बाद उनकी दिनचर्या में आए इस बदलाव के बीच जेल प्रशासन उनकी निगरानी और आवश्यक देखभाल पर ध्यान दे रहा है। फिलहाल पुरानी बैरक में रहेगी मुस्कान
सजा सुनाए जाने के बाद मुस्कान को भी जेल प्रशासन की तरफ से कैदी नंबर जारी कर दिया गया है। कैदी नंबर 396 के रूप में मु्स्कान जानी जाएगी। जेल मेन्युअल की व्यवस्था के अनुरूप फिलहाल उसे पुरानी बैरक में ही रखा गया है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक डा. वीरेश राज शर्मा बताते हैं कि जिन महिला कैदी के पास बच्चे हैं, उनको सजा सुनाए जाने के बाद उसी जेल में रखा जाता है, जिसमें अन्य महिला बंदी अथवा कैदियों के बच्चे मौजूद हैं। 296 सजायाफ्ता कैदी जेल में बंद
वरिष्ठ जेल अधीक्षक डा. वीरेश राज शर्मा ने बताया कि जिला कारागार में अभी तक 278 पुरुष व 16 महिला कैदी थे। साहिल व मुस्कान के आने के बाद पुरुष कैदियों की संख्या 279 और महिला कैदियों की संख्या 17 हो गई है। गुरुवार से साहिल-मुस्कान को भी अन्य कैदियों की तरह जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी।

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