सीवान में शनिवार की शाम जितिया पर्व पर तीन घरों की मासूम बेटियों की नदी में डूबने से मौत हो गई। घटना एमएच नगर थाना क्षेत्र के रामपुर गांव की है। मृतकों की पहचान रामपुर निवासी कमलेश साह की बेटी अंशु कुमारी (14), राजू साह की बेटी अंजली कुमारी (13) और मनोज पंडित की बेटी अनिशा कुमारी(12) के रूप में हुई है। परिजनों और स्थानीय लोगों के अनुसार, शनिवार को जितिया पर्व को लेकर बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और बच्चियां नदी में स्नान करने पहुंची थीं। इसी दौरान एक बच्ची गहरे पानी में चली गई। उसे बचाने के प्रयास में दूसरी और फिर तीसरी बच्ची भी गहरे पानी में चली गई। देखते ही देखते तीनों पानी में डूब गईं। शाम का समय होने के कारण लोगों को घटना का पता चलने और बचाव शुरू होने में समय लगा। एक घंटे की मशक्कत के बाद मिला शव सूचना मिलने पर सिसवन अंचल अधिकारी उदयन सिंह और एमएच नगर थाना प्रभारी राजीव पटेल मौके पर पहुंचे। करीब दर्जनभर गोताखोरों को नदी में उतारा गया। लगभग एक घंटे की मशक्कत के बाद तीनों को बाहर निकाला गया और स्थानीय पीएचसी भेजा गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिजन तीनों शवों को रात में ही घर ले गए और बिना पोस्टमॉर्टम अंतिम संस्कार कर दिया। अधिकारियों के अनुसार, परिजनों ने पोस्टमॉर्टम के लिए सहमति नहीं दी और कोई आवेदन भी नहीं दिया। बाढ़ के कारण नदियों व तालाबों का जलस्तर बढ़ा इस हादसे ने प्रशासनिक तैयारी को लेकर स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश और बाढ़ के कारण नदियों व तालाबों का जलस्तर और गहराई बढ़ी हुई थी। इसके बावजूद पर्व के दौरान ऐसे खतरनाक घाटों पर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम, पुलिसकर्मी, मजिस्ट्रेट, गोताखोर अथवा गहरे पानी की सीमा बताने वाली मार्किंग नजर नहीं आई। जबकि जीवित्पुत्रिका जैसे पर्व पर नदी-तालाबों में बड़ी संख्या में महिलाओं और बच्चों के पहुंचने की जानकारी प्रशासन को रहती है। इसी जितिया पर्व के दौरान सीवान के अलग-अलग हिस्सों में कुल चार युवतियों और एक युवक की मौत की घटनाएं सामने आईं। पर्व, जो संतान की लंबी उम्र की कामना का प्रतीक है, कई परिवारों के लिए मातम का दिन बन गया। रामपुर की घटना ने प्रशासन की आपदा-पूर्व तैयारी और पर्वों के दौरान जलस्रोतों पर सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। सीवान में शनिवार की शाम जितिया पर्व पर तीन घरों की मासूम बेटियों की नदी में डूबने से मौत हो गई। घटना एमएच नगर थाना क्षेत्र के रामपुर गांव की है। मृतकों की पहचान रामपुर निवासी कमलेश साह की बेटी अंशु कुमारी (14), राजू साह की बेटी अंजली कुमारी (13) और मनोज पंडित की बेटी अनिशा कुमारी(12) के रूप में हुई है। परिजनों और स्थानीय लोगों के अनुसार, शनिवार को जितिया पर्व को लेकर बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और बच्चियां नदी में स्नान करने पहुंची थीं। इसी दौरान एक बच्ची गहरे पानी में चली गई। उसे बचाने के प्रयास में दूसरी और फिर तीसरी बच्ची भी गहरे पानी में चली गई। देखते ही देखते तीनों पानी में डूब गईं। शाम का समय होने के कारण लोगों को घटना का पता चलने और बचाव शुरू होने में समय लगा। एक घंटे की मशक्कत के बाद मिला शव सूचना मिलने पर सिसवन अंचल अधिकारी उदयन सिंह और एमएच नगर थाना प्रभारी राजीव पटेल मौके पर पहुंचे। करीब दर्जनभर गोताखोरों को नदी में उतारा गया। लगभग एक घंटे की मशक्कत के बाद तीनों को बाहर निकाला गया और स्थानीय पीएचसी भेजा गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिजन तीनों शवों को रात में ही घर ले गए और बिना पोस्टमॉर्टम अंतिम संस्कार कर दिया। अधिकारियों के अनुसार, परिजनों ने पोस्टमॉर्टम के लिए सहमति नहीं दी और कोई आवेदन भी नहीं दिया। बाढ़ के कारण नदियों व तालाबों का जलस्तर बढ़ा इस हादसे ने प्रशासनिक तैयारी को लेकर स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश और बाढ़ के कारण नदियों व तालाबों का जलस्तर और गहराई बढ़ी हुई थी। इसके बावजूद पर्व के दौरान ऐसे खतरनाक घाटों पर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम, पुलिसकर्मी, मजिस्ट्रेट, गोताखोर अथवा गहरे पानी की सीमा बताने वाली मार्किंग नजर नहीं आई। जबकि जीवित्पुत्रिका जैसे पर्व पर नदी-तालाबों में बड़ी संख्या में महिलाओं और बच्चों के पहुंचने की जानकारी प्रशासन को रहती है। इसी जितिया पर्व के दौरान सीवान के अलग-अलग हिस्सों में कुल चार युवतियों और एक युवक की मौत की घटनाएं सामने आईं। पर्व, जो संतान की लंबी उम्र की कामना का प्रतीक है, कई परिवारों के लिए मातम का दिन बन गया। रामपुर की घटना ने प्रशासन की आपदा-पूर्व तैयारी और पर्वों के दौरान जलस्रोतों पर सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।

