सम्पूर्ण क्रान्ति के प्रणेता जय प्रकाश नारायण की जयंती आज यानि सोमवार को बलिया के सिताब दियारा में हर्षोल्लास के साथ मनाई जायेगी। जयंती समारोह में तमाम राजनीतिक दिग्गज शामिल होंगे। जहां जयप्रकाश नारायण को श्रद्धा सुमन अर्पित करेंगे। जेपी ट्रस्ट पर होने वाले कार्यक्रम को लेकर तैयारी पूरी हो चुकी है। जयप्रकाश नारायण का जन्म 11 अक्टूबर 1902 में सिताबदियारा में हुआ था। इनके पिता का नाम श्री ‘देवकी बाबू’ और माता का नाम ‘फूलरानी देवी’ था। 1920 में जय प्रकाश का विवाह बिहार के मशहूर गांधीवादी ‘बृज किशोर प्रसाद’ की पुत्री ‘प्रभावती’ के साथ हुआ। प्रभावती विवाह के बाद कस्तूरबा गांधी के साथ गांधी आश्रम में रहीं। जय प्रकाश ने रॉलेट एक्ट जलियांवाला बाग नरसंहार के विरोध में ब्रिटिश शैली के स्कूलों को छोड़कर बिहार विद्यापीठ से अपनी उच्च शिक्षा पूरी की। स्वतंत्रता आंदोलन में जेपी की भूमिका अविस्मरणीय है।क्षजय प्रकाश नारायण बचपन से ही विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। स्वतंत्रता संग्राम के समय में जब उन्होंने पटना में ‘मौलाना अबुल कलाम आजाद’ का ओजस्वी बातें सुनी जिसमें मौलाना आजाद ने कहा कि ‘नौजवानों अंग्रेजी शिक्षा का त्याग करो और मैदान में आकर ब्रिटिश हुकूमत की ढहती दीवारों को धरासाई करो और ऐसे हिन्दुस्तान का निर्माण करो जो सारे आलम में खुशबू पैदा करें। यह बातें जेपी के मन के अंदर तक प्रवेश कर गयी और वे स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। 1929 में शुरू हुआ राजनितिक सफर जय प्रकाश नारायण ने 1929 में कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए। तत्पश्चात जब कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी बनीं तो उन्हें महासचिव की जिम्मेदारी मिली।का गठन हुआ तो उन्हें उसमें शामिल कर लिया गया और उन्हें पार्टी का महासचिव बनाया गया। देश के स्वतंत्र होने के बाद 19 अप्रैल 1954 में गया, बिहार में उन्होंने विनोबा भावे के सर्वोदय आंदोलन के लिए जीवन समर्पित करने की घोषणा की और 1957 में उन्होंने लोकनीति के पक्ष मे राजनीति छोड़ने का फैसला किया। लेकिन 1960 के दशक के अंतिम भाग में वह राजनीति में फिर से सक्रिय हो गए।
सम्पूर्ण क्रान्ति का दिया नारा 5 जून 1974 की विशाल सभा में जय प्रकाश नारायण ने पहली बार ‘सम्पूर्ण क्रांति’ का नारा दिया। यह क्रांति उन्होंने बिहार और भारत में फैले भ्रष्टाचार की वजह से शुरू की। बिहार से निकली सम्पूर्ण क्रान्ति की चिंगारी पूरे देश में फैल गई। इस दिन अपने प्रसिद्ध भाषण में उन्होंने कहा था कि ‘भ्रष्टाचार मिटाना, बेरोजगारी दूर करना, शिक्षा में क्रांति लाना आदि ऐसी चीजें हैं जो आज की व्यवस्था से पूरी नहीं हो सकतीं, क्योंकि वह इस व्यवस्था की ही उपज हैं। वह तभी पूरी हो सकती हैं जब सम्पूर्ण व्यवस्था बदल दी जाए और सम्पूर्ण व्यवस्था के परिवर्तन के लिए क्रांति यानी सम्पूर्ण क्रांति आवश्यक है। जब इंदिरा गांधी से की स्तीफे की मांग 1975 में निचली अदालत में इंदिरा गांधी पर चुनावों में भ्रष्टाचार का आरोप साबित हो गया और जयप्रकाश नारायण ने उनके इस्तीफे की मांग की। तब इंदिरा गांधी ने राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर दी और जेपी तथा अन्य विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। तब दिल्ली के रामलीला मैदान में एक लाख से अधिक लोगों ने जय प्रकाश नारायण की गिरफ्तारी के खिलाफ हुंकार भरी थी।
फिर जनवरी 1977 को आपातकाल हटा लिया गया और लोकनायक जयप्रकाश के ‘सम्पूर्ण क्रांति आदोलन’ के चलते देश में पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार बनी। इस क्रांति का प्रभाव न केवल देश में, बल्कि दुनिया के तमाम छोटे देशों पर भी पड़ा था। वर्ष 1977में हुआ चुनाव ऐसा था जिसमें नेता पीछे थे और जनता आगे थी। यह जेपी के ही करिश्माई नेतृत्व का असर था। जयप्रकाश नारायण ने 8 अक्टूबर 1979 को पटना में अंतिम सांस ली। जेपी को भारत सरकार ने मरणोपरांत 1998 को देश के सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया।

