जयपुर के जवाहर नगर स्थित सेंट एडमंड्स स्कूल का एनुअल फंक्शन 30 अक्टूबर 2026 को राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC), जयपुर में आयोजित किया गया। इस साल समारोह की मुख्य थीम ‘AI और मैं – तकनीक सोच सकती है, इंसान महसूस कर सकते हैं’ रही, जिसके माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मानवीय अन्तः शक्ति के बीच के संबंध को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात विद्यालय के संस्थापक स्वर्गीय रणबीर सिंह जी को श्रद्धांजलि अर्पित कर शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान का स्मरण किया गया। मुख्य अतिथि डॉ. राजेश भोजवानी, निदेशक, संतोकबा इंस्टीट्यूट ऑफ डाइजेस्टिव सर्जिकल साइंसेज़ का पारंपरिक तिलक एवं फूल भेंट कर आत्मीय स्वागत किया गया। इसके पश्चात प्रधानाचार्या अनु भाटिया जी ने विद्यालय का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए वर्षभर की उपलब्धियों, शैक्षणिक प्रगति और विविध गतिविधियों का उल्लेख किया। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कृत कर उनकी उपलब्धियों की सराहना की गई। मुख्य अतिथि ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन से विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया तथा विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सम्मानित होने वाले विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ दीं। उनके विचारों ने विद्यार्थियों को निरंतर परिश्रम करने, अपनी क्षमताओं को पहचानने और जीवन में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरूआत गणेश वंदना और सिम्फनी की मनमोहक संयुक्त प्रस्तुति के साथ हुई, जिसने पूरे वातावरण को भक्तिमय एवं संगीतमय बना दिया। समारोह का मुख्य आकर्षण प्री-प्राइमरी के नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों की मनमोहक मुस्कान एवं मनोहारी प्रस्तुतियाँ रहीं जिन्होंने पूरे वातावरण को उल्लास और उमंग से भर दिया। इसके अतिरिक्त नृत्य, नाटक, संगीत और नवाचारी मंचीय प्रस्तुतियों के माध्यम विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा, आत्मविश्वास, ऊर्जा एवं सृजनात्मकता का परिचय देते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता ( ए. आई. ) और मानवीय बुद्धिमत्ता के विभिन्न पहलुओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। आकर्षक वेशभूषा, भावपूर्ण अभिव्यक्ति और उत्कृष्ट मंचीय समन्वय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया तथा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा। समारोह में यह विचार प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया कि तकनीकी प्रगति और मानवीय मूल्यों का परस्पर संतुलन ही उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है। इस प्रकार, वार्षिकोत्सव न केवल विद्यार्थियों की प्रतिभा और रचनात्मक अभिव्यक्ति का उत्सव बना, बल्कि आधुनिक तकनीक के युग में मानवीय संवेदनाओं, रिश्तों और जीवन-मूल्यों की प्रासंगिकता को भी रेखांकित कर गया। इस थीम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह प्रेरणादायी संदेश दिया गया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता ज्ञान और कार्यक्षमता को बढ़ाने का सशक्त माध्यम है, किंतु जीवन की वास्तविक सार्थकता आंतरिक शक्ति एवं मूल्यों में निहित है। तकनीक का विवेकपूर्ण उपयोग करते हुए अपनी स्वतंत्र सोच, रचनात्मकता, नैतिकता और संवेदनशीलता को बनाए रखना आवश्यक है। इस प्रकार, विद्यार्थियों को तकनीकी रूप से दक्ष होने के साथ-साथ संवेदनशील, जिम्मेदार और मूल्यनिष्ठ नागरिक बनने की प्रेरणा मिली। समारोह का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें आयोजन को सफल बनाने वाले अतिथियों, विद्यालय प्रबंधन, शिक्षकों, अभिभावकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। अंत में राष्ट्रगान के सामूहिक गायन के साथ समारोह का गरिमामय समापन हुआ। प्रत्येक प्रस्तुति विद्यार्थियों के समर्पण, अथक परिश्रम और सामूहिक प्रयासों का प्रतिबिंब रही। उन्होंने अपनी कल्पनाशीलता और नवाचार से मंच को एक भव्य एवं यादगार उत्सव में परिवर्तित कर दिया।

