यूपी की राजनीति में पिछले 2 दिनों से सपा प्रमुख अखिलेश यादव का ‘चवन्नी’ वाला बयान खूब चर्चा में है। अखिलेश ने बिना नाम लिए रालोद प्रमुख जयंत चौधरी पर कहा था- मैंने चवन्नी को रुपया बनाया, लेकिन वह भी भाग गए। इसके बाद से न सिर्फ जयंत चौधरी, बल्कि यापी भाजपा अध्यक्ष से लेकर NDA के सहयोगी दल तक अखिलेश पर निशाना साध रहे हैं। माना जा रहा है कि जयंत के भाजपा से हाथ मिलाने के बाद से पश्चिमी यूपी के जाट वोटबैंक का बड़ा हिस्सा एनडीए के पाले में दिख रहा है। इसीलिए अखिलेश का यह तीखा रुख अन्य पिछड़ी जातियों (OBC) और गैर-जाट वर्गों को यह संदेश देने की कोशिश हो सकता है कि वे सपा-कांग्रेस गठबंधन के साथ खड़े हों। पहले पढ़िए अखिलेश ने क्या कहा था 17 अगस्त को सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने लखनऊ में एक कार्यक्रम में पुराने गठबंधन सहयोगियों पर बिना नाम लिए तंज कसा था। कहा था- ‘कुछ गठबंधन भी ऐसे किए हम लोगों ने, जाने कहां-कहां से आ गए थे गठबंधन वाले। हम लोगों ने चवन्नी का रुपया बना दिया, तब भी हमें छोड़कर चले गए।’ अब पढ़िए भाजपा और उसके सहयोगी नेताओं ने क्या कहा जयंत ने पूछा- मैं उन्हें इतना याद क्यों आ रहा हूं? रालोद प्रमुख जयंत चौधरी ने अखिलेश यादव पर पलटवार करते हुए बुधवार को कहा कि वो हमें इतना याद क्यों कर रहे हैं, यह सवाल उन्हीं से पूछा जाना चाहिए। अखिलेश अपनी बात कहें, तो अच्छा है। लेकिन, इस तरह के बयान उन लोगों को भी सोचने पर मजबूर करते हैं, जो आज उनके साथ खड़े हैं। उत्तर प्रदेश में लोकतंत्र है और जनता सबको बनाती है। यूपी भाजपा अध्यक्ष बोले- सपा ‘जिताऊ चेहरे’ की मोहताज हुई यूपी भाजपा के अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा- विधानसभा चुनाव से पहले सपा में ऐसा भूचाल आया है कि ‘सत्ता वापसी’ के ढोल पीटने वाले अब ‘जिताऊ चेहरे’ के मोहताज हो गए हैं। जिन सीटों पर सपा तुष्टिकरण, जातीय समीकरण और जोड़-तोड़ के भरोसे जीत का सपना देख रही थी, वहां जनता के बीच पकड़ रखने वाले मजबूत चेहरे तलाशना मुश्किल हो रहा है। सत्ता में वापसी का दावा करने वाली पार्टी की हालत यह है कि सीटें बहुत हैं, लेकिन लड़ने वाले चेहरे कम पड़ रहे हैं। सपा के नए-नए चाणक्य बने प्रदेश में बड़े पद पर रहे पूर्व प्रशासनिक अफसर की गुप्त सर्वे रिपोर्ट ने पूरे कुनबे की नींद उड़ा दी है। दावे 400 सीटों के, लेकिन ‘साइकिल’ पर बैठाने लायक प्रत्याशी ZERO हैं। लाचारी में अब सपा मुखिया के सामने सिर्फ 2 ही विकल्प बचे हैं। आम कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर ‘पारिवारिक साम्राज्य’ के नए चिरागों को मैदान में झोंका जाए। या फिर गठबंधन की मजबूरी बताकर कांग्रेस की 200 सीटों वाली जिद के आगे घुटने टेक दिए जाएं। आशीष पटेल ने कहा- अपना दल जनता के बीच काम करता है मंत्री आशीष पटेल ने कहा कि सपा को यह चिंता करने की जरूरत नहीं है कि हमारा भाजपा के साथ कितनी सीटों पर समझौता होगा? अपना दल ट्वीट और रीट्वीट का खेल नहीं खेलता। पार्टी जनता के बीच जाकर काम करने और अपने गठबंधन के साथ मजबूती से खड़े रहने में विश्वास करती है। आशीष पटेल का यह पलटवार इसलिए भी अहम है, क्योंकि पिछले कुछ समय से अखिलेश यादव भाजपा के सहयोगी दलों के साथ उसके सीट बंटवारे को लेकर लगातार तंज कस रहे हैं। राजभर ने घेरा- अपना इंडी अलायंस तो चल नहीं रहा सुभासपा प्रमुख और यूपी सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने भी अखिलेश यादव के बयान पर तीखा पलटवार किया। कहा कि अखिलेश यादव दूसरों की सीटों की चिंता करने के बजाय अपने गठबंधन को संभालें। अखिलेश चार्टर प्लेन में चलते हैं। कभी जहाज में गए होंगे, तो एयर होस्टेस का अनाउंसमेंट सुना होगा कि दूसरों की सुरक्षा से पहले अपनी सुरक्षा खुद करें। यही नियम राजनीति में भी उन पर लागू होता है। अपना इंडी अलायंस चल नहीं पा रहा और अखिलेश दूसरों की सीटें बांट रहे हैं। सुभासपा को कितनी सीटें मिलेंगी, यह भाजपा के साथ बातचीत से तय होगा। अखिलेश को इसकी चिंता करने की जरूरत नहीं है। NDA में सबसे मजबूत स्थिति में जयंत चौधरी NDA के सहयोगी दलों में राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) सबसे मजबूत स्थिति में है। पश्चिमी यूपी के जाट वोटबैंक पर पकड़ के कारण रालोद की स्थिति मजबूत है। 2024 में चौधरी चरण सिंह को ‘भारत रत्न’ मिलने के बाद जयंत NDA में आए और केंद्र में मंत्री बन गए। रालोद ने अपनी 9 मौजूदा सीटों के अलावा 20 से ज्यादा सीटों यानी कुल 30+ सीटों का दावा ठोका है। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा उन्हें 20 के आसपास सीटें दे सकती है। जयंत लंबी राजनीति के तहत भविष्य के लिए विपक्षी रास्तों को बंद नहीं करना चाहते। इसलिए वह अखिलेश यादव या मायावती पर सीधे हमले करने से बचते हैं। —————————- यह खबर भी पढ़ें – बसपा चारों सदनों में शून्य होगी, ऐसा 37 साल बाद, इकलौते विधायक का निधन बहुजन समाज पार्टी अपनी स्थापना के 37 साल बाद चारों सदनों में ‘शून्य’ हो जाएगी। यूपी विधानसभा में उसके इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का 5 अगस्त को निधन हो गया। यूपी विधान परिषद में राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस की तरह बसपा का भी कोई सदस्य नहीं बचा है। 2024 में पार्टी के एकमात्र विधान परिषद सदस्य (MLC) भीमराव अंबेडकर का कार्यकाल पूरा होने के बाद बसपा उच्च सदन में वापसी नहीं कर सकी। पढ़िए पूरी खबर.…

