जमुई में सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट करने के आरोप में अधिवक्ता रूपेश कुमार सिंह को साइबर थाना ले जाने के विरोध में जिला विधिक संघ का धरना बुधवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। सैकड़ों अधिवक्ता कोर्ट परिसर में धरने पर बैठे और जिला प्रशासन व पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। संघ ने न्यायिक कार्यों से खुद को अनिश्चितकाल तक अलग रखने का निर्णय लिया है। लगातार तीन दिनों से चल रहे आंदोलन के बीच जिला विधिक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने जिला जज से मुलाकात कर पूरी घटना की जानकारी दी। अधिवक्ताओं ने मांग की कि जिलाधिकारी, एसपी और साइबर डीएसपी को बुलाकर पुलिस और अधिवक्ताओं दोनों पक्षों की बात सुनी जाए। देखें, मौके से आई तस्वीरें… प्रशासन से लिखित आश्वासन की मांग अधिवक्ताओं का कहना है कि प्रशासन की ओर से भविष्य में इस तरह की स्थिति नहीं होने का आश्वासन दिया जाए। संघ ने मौखिक आश्वासन के बजाय इसे लिखित रूप में देने की मांग की है। अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया है कि लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही अनिश्चितकालीन धरना समाप्त करने पर विचार किया जाएगा। संघ का कहना है कि भविष्य में किसी अधिवक्ता या पत्रकार के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले मामले की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। बिना पूरी जानकारी और तथ्यों की जांच के कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। अध्यक्ष बोले- सम्मानजनक निष्कर्ष तक जारी रहेगा आंदोलन जिला विधिक संघ के अध्यक्ष सीताराम सिंह ने कहा कि अधिवक्ता को इस तरह थाने ले जाना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिवक्ता के साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया। उनका कहना है कि जब तक मामले का सम्मानजनक निष्कर्ष नहीं निकलता, धरना जारी रहेगा। संघ के सचिव अमित कुमार ने कहा कि न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि अधिवक्ता प्रशासन के विरोध में न्यायिक कार्यों से दूर हैं, जिससे न्यायालय का कामकाज प्रभावित हो रहा है। रविवार को अधिवक्ता को थाने ले गई थी साइबर पुलिस बताते चलें कि रविवार देर शाम साइबर पुलिस अधिवक्ता रूपेश कुमार सिंह को अपने साथ थाने ले गई थी। पुलिस का आरोप था कि उन्होंने मड़वा मामले से संबंधित भ्रामक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है। बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। इसके बाद सोमवार से जिला विधिक संघ ने विरोध शुरू कर दिया और न्यायिक कार्यों से खुद को अलग कर लिया। जमुई में सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट करने के आरोप में अधिवक्ता रूपेश कुमार सिंह को साइबर थाना ले जाने के विरोध में जिला विधिक संघ का धरना बुधवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। सैकड़ों अधिवक्ता कोर्ट परिसर में धरने पर बैठे और जिला प्रशासन व पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। संघ ने न्यायिक कार्यों से खुद को अनिश्चितकाल तक अलग रखने का निर्णय लिया है। लगातार तीन दिनों से चल रहे आंदोलन के बीच जिला विधिक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने जिला जज से मुलाकात कर पूरी घटना की जानकारी दी। अधिवक्ताओं ने मांग की कि जिलाधिकारी, एसपी और साइबर डीएसपी को बुलाकर पुलिस और अधिवक्ताओं दोनों पक्षों की बात सुनी जाए। देखें, मौके से आई तस्वीरें… प्रशासन से लिखित आश्वासन की मांग अधिवक्ताओं का कहना है कि प्रशासन की ओर से भविष्य में इस तरह की स्थिति नहीं होने का आश्वासन दिया जाए। संघ ने मौखिक आश्वासन के बजाय इसे लिखित रूप में देने की मांग की है। अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया है कि लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही अनिश्चितकालीन धरना समाप्त करने पर विचार किया जाएगा। संघ का कहना है कि भविष्य में किसी अधिवक्ता या पत्रकार के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले मामले की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। बिना पूरी जानकारी और तथ्यों की जांच के कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। अध्यक्ष बोले- सम्मानजनक निष्कर्ष तक जारी रहेगा आंदोलन जिला विधिक संघ के अध्यक्ष सीताराम सिंह ने कहा कि अधिवक्ता को इस तरह थाने ले जाना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिवक्ता के साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया। उनका कहना है कि जब तक मामले का सम्मानजनक निष्कर्ष नहीं निकलता, धरना जारी रहेगा। संघ के सचिव अमित कुमार ने कहा कि न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि अधिवक्ता प्रशासन के विरोध में न्यायिक कार्यों से दूर हैं, जिससे न्यायालय का कामकाज प्रभावित हो रहा है। रविवार को अधिवक्ता को थाने ले गई थी साइबर पुलिस बताते चलें कि रविवार देर शाम साइबर पुलिस अधिवक्ता रूपेश कुमार सिंह को अपने साथ थाने ले गई थी। पुलिस का आरोप था कि उन्होंने मड़वा मामले से संबंधित भ्रामक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है। बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। इसके बाद सोमवार से जिला विधिक संघ ने विरोध शुरू कर दिया और न्यायिक कार्यों से खुद को अलग कर लिया।

