जमुई में बच्चों को यौन शोषण, दुर्व्यवहार और साइबर अपराध से बचाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) की ओर से उत्क्रमित मध्य विद्यालय, कल्याणपुर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। ‘हमारा संकल्प, बच्चों का सुरक्षित कल’ नारे के साथ आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों को उनके अधिकारों, सुरक्षा और कानूनी मदद के तरीकों की जानकारी दी गई। पॉक्सो एक्ट और बाल अधिकारों की दी जानकारी कार्यक्रम में बच्चों को पॉक्सो (POCSO) एक्ट, बाल अधिकार, बाल विवाह निषेध कानून और साइबर अपराध से जुड़े कानूनी प्रावधानों के बारे में बताया गया। पोस्टर के माध्यम से बच्चों को कानून के प्रति जागरूक किया गया, ताकि वे अपने अधिकारों को समझ सकें। गुड टच-बैड टच का अंतर समझाया बच्चों को तस्वीरों की मदद से सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श के बीच अंतर बताया गया। उन्हें समझाया गया कि किसी भी अनुचित व्यवहार को पहचानना और उसके खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है। साथ ही, ऐसी स्थिति में भरोसेमंद व्यक्ति से मदद लेने के लिए प्रेरित किया गया। मदद के लिए बताए गए तीन हेल्पलाइन नंबर कार्यक्रम में बच्चों को जरूरत के समय सहायता लेने के लिए तीन हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी गई। विधिक सहायता के लिए 15100, चाइल्ड हेल्पलाइन के लिए 1098 और साइबर अपराध की शिकायत के लिए 1930 नंबर बताया गया। बच्चों की सुरक्षा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी एडीजे रत्नेश कुमार सिंह ने कहा कि बच्चों को लैंगिक शोषण, दुर्व्यवहार और उत्पीड़न से सुरक्षित रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बच्चों से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और किसी भी अनुचित व्यवहार की जानकारी बिना डर के देने की अपील की। अनुचित व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाने की अपील एडीजे ने कहा कि बच्चों को सजग रहना चाहिए और किसी भी गलत व्यवहार की जानकारी भयमुक्त होकर देनी चाहिए। ऐसे मामलों में कानून के तहत सजा का प्रावधान है। कार्यक्रम में स्कूल के शिक्षकों और बच्चों ने भी अपने विचार रखे और सुरक्षित बचपन अभियान को बच्चों के अधिकारों व सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। जमुई में बच्चों को यौन शोषण, दुर्व्यवहार और साइबर अपराध से बचाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) की ओर से उत्क्रमित मध्य विद्यालय, कल्याणपुर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। ‘हमारा संकल्प, बच्चों का सुरक्षित कल’ नारे के साथ आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों को उनके अधिकारों, सुरक्षा और कानूनी मदद के तरीकों की जानकारी दी गई। पॉक्सो एक्ट और बाल अधिकारों की दी जानकारी कार्यक्रम में बच्चों को पॉक्सो (POCSO) एक्ट, बाल अधिकार, बाल विवाह निषेध कानून और साइबर अपराध से जुड़े कानूनी प्रावधानों के बारे में बताया गया। पोस्टर के माध्यम से बच्चों को कानून के प्रति जागरूक किया गया, ताकि वे अपने अधिकारों को समझ सकें। गुड टच-बैड टच का अंतर समझाया बच्चों को तस्वीरों की मदद से सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श के बीच अंतर बताया गया। उन्हें समझाया गया कि किसी भी अनुचित व्यवहार को पहचानना और उसके खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है। साथ ही, ऐसी स्थिति में भरोसेमंद व्यक्ति से मदद लेने के लिए प्रेरित किया गया। मदद के लिए बताए गए तीन हेल्पलाइन नंबर कार्यक्रम में बच्चों को जरूरत के समय सहायता लेने के लिए तीन हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी गई। विधिक सहायता के लिए 15100, चाइल्ड हेल्पलाइन के लिए 1098 और साइबर अपराध की शिकायत के लिए 1930 नंबर बताया गया। बच्चों की सुरक्षा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी एडीजे रत्नेश कुमार सिंह ने कहा कि बच्चों को लैंगिक शोषण, दुर्व्यवहार और उत्पीड़न से सुरक्षित रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बच्चों से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और किसी भी अनुचित व्यवहार की जानकारी बिना डर के देने की अपील की। अनुचित व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाने की अपील एडीजे ने कहा कि बच्चों को सजग रहना चाहिए और किसी भी गलत व्यवहार की जानकारी भयमुक्त होकर देनी चाहिए। ऐसे मामलों में कानून के तहत सजा का प्रावधान है। कार्यक्रम में स्कूल के शिक्षकों और बच्चों ने भी अपने विचार रखे और सुरक्षित बचपन अभियान को बच्चों के अधिकारों व सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।

