जमुई की पूनम कुमारी आज पांच लाख गन्ने के पौधे तैयार कर किसानों की खेती बदलने की तैयारी में हैं। पौधों से लगाव ने उन्हें एक दिन सोशल मीडिया पर सरकारी योजनाएं तलाशने के लिए प्रेरित किया। इसी दौरान गन्ना नर्सरी योजना की जानकारी मिली। पूनम ने इसे मौका बनाया, प्रशिक्षण लिया और बिहार की पहली गन्ना नर्सरी शुरू कर उद्यमिता की नई कहानी लिख दी। बरहट प्रखंड की पूनम की यह पहल सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है। उनका लक्ष्य किसानों को स्वस्थ पौधे उपलब्ध कराने के साथ ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करना भी है। सोशल मीडिया से मिला आइडिया पूनम ने बताया कि उन्हें पेड़-पौधों से काफी लगाव था। वह कोई ऐसा काम करना चाहती थीं, जिसे बड़े स्तर पर शुरू किया जा सके। इसी तलाश में उन्हें गन्ना नर्सरी योजना की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने आवेदन किया और जमुई जिले से उनका चयन हुआ। फिर समस्तीपुर के पूसा में प्रशिक्षण लेकर नर्सरी शुरू की। पूनम ने इसके लिए मुख्यमंत्री, गन्ना विभाग के मंत्री और विभागीय अधिकारियों के सहयोग के प्रति आभार जताया। उन्होंने बताया कि फिलहाल पांच लाख पौधे तैयार करने का लक्ष्य है, जिसे बढ़ाकर छह से सात लाख तक ले जाने की क्षमता भी वह रखती हैं। नर्सरी में तैयार पौधे जमुई के अलावा मुंगेर, शेखपुरा और लखीसराय के किसानों तक पहुंचाए जाएंगे। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल पूनम की नर्सरी में अभी 10 से 15 लोगों को रोजगार मिला है। काम बढ़ने पर 20 से 25 लोगों को रोजगार देने की तैयारी है। वह चाहती हैं कि घरों तक सीमित रहने वाली महिलाएं आगे आएं और अपने हुनर से कमाई करें। पौधों की देखभाल जैसे कामों के साथ कठिन कामों के लिए पुरुषों को भी रखा गया है। मौके से आई तस्वारें… बीमारी से बचाव और वेस्टेज का भी इंतजाम
नर्सरी में स्वस्थ पौधे तैयार करने के लिए पूनम के पति प्रवीण कुमार ने कोयंबटूर से सीड ट्रीटमेंट डिवाइस मंगाने की जानकारी दी। इससे पौधों को रोगमुक्त रखने में मदद मिलेगी और किसानों को बीमारी तथा दवाओं पर होने वाले खर्च से राहत मिलने की उम्मीद है। गन्ने के अवशेष से विनेगर तैयार करने का प्रशिक्षण लेकर पूनम ने वेस्टेज मैनेजमेंट पर भी काम शुरू किया है।
प्रवीण कहते हैं कि नर्सरी शुरू करने का विचार पत्नी पूनम का था और वह केवल सहयोग कर रहे हैं। विभाग का लक्ष्य पांच लाख पौधों का है, जबकि हमलोग इसे डेढ़ गुना तक पहुंचाना चाहता है।
गन्ने के खेतों में हरियाली लौटाने का सपना
जमुई में गन्ने की खेती लगभग खत्म होने के बीच पूनम की पहल नई उम्मीद जगा रही है। पांच लाख स्वस्थ पौधों का लक्ष्य पूरा हुआ तो चार जिलों के किसानों को नई शुरुआत का मौका मिल सकता है। साथ ही गांव की महिलाओं को अपने पैरों पर खड़े होने का मौका भी मिलेगा। पूनम की कहानी बताती है कि सही जानकारी, प्रशिक्षण और मेहनत के सहारे एक महिला खेती को रोजगार देने वाले उद्यम में बदल सकती है। जमुई की पूनम कुमारी आज पांच लाख गन्ने के पौधे तैयार कर किसानों की खेती बदलने की तैयारी में हैं। पौधों से लगाव ने उन्हें एक दिन सोशल मीडिया पर सरकारी योजनाएं तलाशने के लिए प्रेरित किया। इसी दौरान गन्ना नर्सरी योजना की जानकारी मिली। पूनम ने इसे मौका बनाया, प्रशिक्षण लिया और बिहार की पहली गन्ना नर्सरी शुरू कर उद्यमिता की नई कहानी लिख दी। बरहट प्रखंड की पूनम की यह पहल सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है। उनका लक्ष्य किसानों को स्वस्थ पौधे उपलब्ध कराने के साथ ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करना भी है। सोशल मीडिया से मिला आइडिया पूनम ने बताया कि उन्हें पेड़-पौधों से काफी लगाव था। वह कोई ऐसा काम करना चाहती थीं, जिसे बड़े स्तर पर शुरू किया जा सके। इसी तलाश में उन्हें गन्ना नर्सरी योजना की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने आवेदन किया और जमुई जिले से उनका चयन हुआ। फिर समस्तीपुर के पूसा में प्रशिक्षण लेकर नर्सरी शुरू की। पूनम ने इसके लिए मुख्यमंत्री, गन्ना विभाग के मंत्री और विभागीय अधिकारियों के सहयोग के प्रति आभार जताया। उन्होंने बताया कि फिलहाल पांच लाख पौधे तैयार करने का लक्ष्य है, जिसे बढ़ाकर छह से सात लाख तक ले जाने की क्षमता भी वह रखती हैं। नर्सरी में तैयार पौधे जमुई के अलावा मुंगेर, शेखपुरा और लखीसराय के किसानों तक पहुंचाए जाएंगे। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल पूनम की नर्सरी में अभी 10 से 15 लोगों को रोजगार मिला है। काम बढ़ने पर 20 से 25 लोगों को रोजगार देने की तैयारी है। वह चाहती हैं कि घरों तक सीमित रहने वाली महिलाएं आगे आएं और अपने हुनर से कमाई करें। पौधों की देखभाल जैसे कामों के साथ कठिन कामों के लिए पुरुषों को भी रखा गया है। मौके से आई तस्वारें… बीमारी से बचाव और वेस्टेज का भी इंतजाम
नर्सरी में स्वस्थ पौधे तैयार करने के लिए पूनम के पति प्रवीण कुमार ने कोयंबटूर से सीड ट्रीटमेंट डिवाइस मंगाने की जानकारी दी। इससे पौधों को रोगमुक्त रखने में मदद मिलेगी और किसानों को बीमारी तथा दवाओं पर होने वाले खर्च से राहत मिलने की उम्मीद है। गन्ने के अवशेष से विनेगर तैयार करने का प्रशिक्षण लेकर पूनम ने वेस्टेज मैनेजमेंट पर भी काम शुरू किया है।
प्रवीण कहते हैं कि नर्सरी शुरू करने का विचार पत्नी पूनम का था और वह केवल सहयोग कर रहे हैं। विभाग का लक्ष्य पांच लाख पौधों का है, जबकि हमलोग इसे डेढ़ गुना तक पहुंचाना चाहता है।
गन्ने के खेतों में हरियाली लौटाने का सपना
जमुई में गन्ने की खेती लगभग खत्म होने के बीच पूनम की पहल नई उम्मीद जगा रही है। पांच लाख स्वस्थ पौधों का लक्ष्य पूरा हुआ तो चार जिलों के किसानों को नई शुरुआत का मौका मिल सकता है। साथ ही गांव की महिलाओं को अपने पैरों पर खड़े होने का मौका भी मिलेगा। पूनम की कहानी बताती है कि सही जानकारी, प्रशिक्षण और मेहनत के सहारे एक महिला खेती को रोजगार देने वाले उद्यम में बदल सकती है।

