सच्ची बात, बेधड़क। दैनिक भास्कर भोपाल संस्करण के 68 वर्ष पूरे होने पर हमने 11 दिन तक हर सुबह भोपाल की नई कहानी, अनदेखे पहलू की एक विशेष श्रृंखला प्रस्तुत की है। हमने आपको भोपाल के सबसे बड़े बदलावों, शहर को जीवन देने वाली धरोहरों पर विशेषज्ञों के मंथन, पुराने दस्तावेजों और दुर्लभ अभिलेखों की पड़ताल से निकले अनकहे सच, तथ्यों पर आधारित एक्सक्लूसिव खुलासों और दुर्लभ तस्वीरों के संग्रह से रूबरू कराया है। आज इस कड़ी का अंतिम पार्ट आप तक पहुंचा रहे हैं। पढ़िए अंतिम कहानी… जगदीशपुर (पूर्व इस्लामनगर) ने करीब तीन सौ साल पहले मध्य भारत का राजनीतिक इतिहास बदला था। इसी किले से दोस्त मोहम्मद खान ने भोपाल रियासत की नींव रखी। तीन सदियों बाद यही किला फिर सत्ता के केंद्र में आया है। 19 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में ऐतिहासिक चमन महल में विशेष कैबिनेट बैठक हुई, जिसमें मध्यप्रदेश यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) को मंजूरी दी गई। इस तरह जगदीशपुर फिर इतिहास रचने का साक्षी बना। पहले जगदीशपुर था, फिर बना इस्लामनगर भोपाल से करीब 12 किमी दूर स्थित इस किले का निर्माण 17वीं शताब्दी में देवड़ा चौहान राजपूत शासकों ने कराया था। तब इसका नाम जगदीशपुर था। इतिहासकारों के अनुसार, बैरसिया पर अधिकार करने के बाद अफगान सरदार दोस्त मोहम्मद खान की नजर इस पर थी। इतिहासकारों के अनुसार, उसने जगदीशपुर के राजपूत शासक नरसिंह देवड़ा को तत्कालीन थाल (बाणगंगा) नदी के किनारे संधि वार्ता और दावत के लिए बुलाया। भोज के दौरान वह किसी बहाने बाहर निकल गया। इसे नदी किनारे झाड़ियों में छिपे उसके सैनिकों के लिए हमले का संकेत माना जाता है। अचानक हुए हमले में बड़ी संख्या में राजपूत सैनिक मारे गए और दोस्त मोहम्मद खान ने जगदीशपुर पर कब्जा कर लिया। यहीं उसने अपनी पहली राजधानी स्थापित की और इसका नाम बदलकर इस्लामनगर रख दिया। इतिहासकारों के अनुसार, आगे चलकर यही सत्ता भोपाल रियासत में बदल गई, जिस पर लगभग ढाई सौ वर्षों तक नवाबों और बेगमों ने शासन किया। खून से लाल हुई नदी, नाम पड़ा हलाली लोकमान्यता है कि इस नरसंहार में इतना रक्त बहा कि थाल (बाणगंगा) नदी का पानी लाल हो गया। तभी से यह नदी हलाली कहलाने लगी। रानी कमलापति से भी जुड़ी है कहानी जगदीशपुर का इतिहास गिन्नौरगढ़ किले से भी जुड़ा है। गिन्नौरगढ़ गोंड साम्राज्य की अंतिम शासक रानी कमलापति की राजधानी था। पति निजाम शाह की हत्या के बाद रानी ने दोस्त मोहम्मद खान से सहायता मांगी। इसके बाद हुए राजनीतिक घटनाक्रम ने दोस्त मोहम्मद खान की शक्ति बढ़ाई और अंततः जगदीशपुर उसकी पहली राजधानी बना। इसी को देखते हुए वर्ष 2023 में राज्य सरकार ने इसका मूल नाम जगदीशपुर बहाल कर दिया। जगदीशपुर किले का सबसे आकर्षक हिस्सा चमन महल है। मुगल और राजपूत स्थापत्य शैली के मेल से बने इस महल में मेहराबदार बरामदे, नक्काशीदार झरोखे, खुले आंगन, फव्वारे और बाग-बगीचे आज भी शाही वैभव का अहसास कराते हैं। परिसर में स्थित रानी महल, विशाल परकोटे, बुर्ज और प्रवेश द्वार उस दौर की सैन्य क्षमता और स्थापत्य कौशल की झलक दिखाते हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने इस पूरे परिसर को संरक्षित स्मारक घोषित किया है।


