सुल्तानपुर में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने मंगलवार दोपहर करीब 1 बजे प्रदर्शन किया। अतिरिक्त मजिस्ट्रेट प्रीति जैन के जरिए राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा। संगठन ने गौतमबुद्ध नगर प्रशासन की ओर से जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन में शामिल छात्र को नोटिस भेजे जाने का विरोध किया। SFI ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं। छात्र को 6 महीने के लिए 5 लाख के बॉन्ड का नोटिस SFI के जिला सचिव दुर्गेश यादव ने बताया कि गौतमबुद्ध नगर प्रशासन ने 4 सितंबर को SFI की राज्य कमेटी के सदस्य अक्षत त्रिपाठी को नोटिस भेजा था। संगठन के मुताबिक, नोटिस में अक्षत पर विश्वविद्यालय के छात्रों को सरकार के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसाने और भ्रामक खबरें फैलाने के आरोप लगाए गए हैं।SFI का दावा है कि प्रशासन ने अक्षत को 6 महीने के लिए 5 लाख रुपये का बॉन्ड जमा करने को कहा है। नोटिस वापस लेने की मांग SFI के जिला अध्यक्ष सलिल धुरिया ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि किसी प्रदर्शनकारी छात्र के खिलाफ एफआईआर या नोटिस जारी नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि यदि किसी छात्र के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है तो उसे तत्काल रद्द किया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश पुलिस कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करते हुए छात्रों को नोटिस जारी कर रही है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर हमला करने का आरोप SFI के जिला उपाध्यक्ष रवि प्रसाद ने कहा कि प्रशासन संविधान में दिए गए शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के अधिकार पर हमला कर रहा है। उन्होंने अक्षत त्रिपाठी को भेजा गया नोटिस तत्काल वापस लेने की मांग की। उन्होंने यह भी मांग की कि कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई की जाए। ज्ञापन देने के दौरान काजल, ऋषभ यादव, निखिल सिंह, बलराम गौंड, सुशील धुरिया, सुभाष, अनुज प्रजापति, श्रेयश, अमित राजपूत, सत्यम, आशीष, अरशद और शिवम निषाद समेत कई छात्र मौजूद रहे।

