छोटे बालू-गिट्टी विक्रेताओं ने खनन कार्रवाई पर आपत्ति जताई:DM विक्रम विरकर से मांगी मदद, SDO को 15 दिन तक कार्रवाई रोकने का निर्देश

छोटे बालू-गिट्टी विक्रेताओं ने खनन कार्रवाई पर आपत्ति जताई:DM विक्रम विरकर से मांगी मदद, SDO को 15 दिन तक कार्रवाई रोकने का निर्देश

खगड़िया में छोटे खुदरा बालू एवं गिट्टी विक्रेताओं पर खनन विभाग की कार्रवाई और वाहनों पर लगाए जा रहे जुर्माने को लेकर व्यवसायियों में नाराजगी है। इस मामले को लेकर खगड़िया जिला बालू-गिट्टी विक्रेता संघ की बैठक मधुर मिलन में हुई। बैठक के बाद संघ के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी विक्रम विरकर से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं और छोटे विक्रेताओं के लिए लागू नियमों को स्पष्ट करने की मांग की। व्यवसायियों का कहना है कि छोटे खुदरा विक्रेताओं के पास सामान्यतः 2 हजार घनफीट से अधिक बालू-गिट्टी का स्टॉक नहीं रहता है। बड़ी राशि वसूले जाने की बात कही सामग्री ट्रक अथवा अन्य वाहनों से वैध चालान के आधार पर मंगाई जाती है और स्थानीय ग्राहकों के मकान एवं निजी निर्माण कार्यों के लिए खुदरा रूप में उपलब्ध कराई जाती है। संघ का आरोप है कि ग्राहकों तक सामग्री पहुंचाने के दौरान वाहनों और ट्रैक्टरों को पकड़कर एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक का जुर्माना किया जा रहा है। संघ के प्रतिनिधि विप्लव रणधीर ने कहा कि छोटे कारोबारियों को कार्रवाई के नाम पर परेशान किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने कुछ व्यवसायियों के ट्रैक्टर पकड़े जाने और उनसे बड़ी राशि वसूले जाने की बात कही। हालांकि, कार्रवाई करने वाले संबंधित पदाधिकारी के नाम की पूरी जानकारी संघ को नहीं होने की बात भी उन्होंने कही। व्यवसायियों के बीच सपना कुमारी नाम की महिला पदाधिकारी के कार्रवाई में शामिल होने की चर्चा होने का दावा किया गया। 25 हजार घनफीट से कम स्टॉक पर नियम स्पष्ट करने की मांग विप्लव रणधीर के अनुसार,व्यवसायियों ने कहा कि खनन नियमों में 25 हजार घनफीट से लेकर 10 लाख घनफीट तक स्टॉक रखने वाले स्टॉकिस्टों के लिए लाइसेंस समेत अन्य प्रावधान निर्धारित हैं। ऐसे में 25 हजार घनफीट से कम स्टॉक रखने वाले छोटे विक्रेताओं पर कौन से नियम लागू होते हैं,इसे स्पष्ट किया जाना चाहिए। संघ ने कार्रवाई से पहले डिपो संचालकों को नोटिस देने,नियमों की जानकारी उपलब्ध कराने और छोटे कारोबारियों को नियमों का पालन करने के लिए पर्याप्त अवसर देने की मांग की। व्यवसायियों का कहना है कि नियम स्पष्ट होने के बाद वे उसके अनुरूप अपना कारोबार करने को तैयार हैं। 15 दिनों तक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश डीएम विक्रम विरकर से मुलाकात के बाद मामले में तत्काल राहत देते हुए सदर एसडीओ धनंजय कुमार को व्यवसायियों को विभाग द्वारा निर्देशित नियमावली की जानकारी देने का निर्देश दिया गया। एसडीओ ने व्यवसायियों को बताया कि आगामी 15 दिनों तक कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस अवधि में व्यवसायियों के साथ बैठक कर पूरे मामले पर विस्तार से चर्चा की जाएगी और विभाग की ओर से निर्धारित नियमों एवं प्रावधानों की जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही विभाग को दुकानों और डिपो का सर्वे करने का निर्देश दिया गया है। सर्वे के बाद पात्र व्यवसायियों के लिए लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया अपनाए जाने की बात कही गई है। इससे छोटे बालू-गिट्टी कारोबारियों को अपने व्यवसाय को नियमों के अनुरूप संचालित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। सीमेंट की तर्ज पर बालू-गिट्टी उपलब्ध कराने की मांग व्यवसायी संघ ने बालू-गिट्टी की उपलब्धता और कारोबार की व्यवस्था को भी सरल बनाने की मांग की। संघ के सदस्यों ने कहा कि जिस प्रकार सीमेंट व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध होता है, उसी तरह बालू-गिट्टी भी निर्धारित व्यवस्था के तहत एक जगह से उपलब्ध कराई जाए। व्यवसायियों ने कहा कि वे सरकार को निर्धारित टैक्स और जीएसटी देने के लिए तैयार हैं। उनका कहना है कि छोटे कारोबारियों के वाहनों पर एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाना उनके लिए गंभीर आर्थिक बोझ है। संघ ने प्रशासन से छोटे विक्रेताओं के लिए नियमों को स्पष्ट कर उचित व्यवस्था बनाने की मांग की है। खगड़िया में छोटे खुदरा बालू एवं गिट्टी विक्रेताओं पर खनन विभाग की कार्रवाई और वाहनों पर लगाए जा रहे जुर्माने को लेकर व्यवसायियों में नाराजगी है। इस मामले को लेकर खगड़िया जिला बालू-गिट्टी विक्रेता संघ की बैठक मधुर मिलन में हुई। बैठक के बाद संघ के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी विक्रम विरकर से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं और छोटे विक्रेताओं के लिए लागू नियमों को स्पष्ट करने की मांग की। व्यवसायियों का कहना है कि छोटे खुदरा विक्रेताओं के पास सामान्यतः 2 हजार घनफीट से अधिक बालू-गिट्टी का स्टॉक नहीं रहता है। बड़ी राशि वसूले जाने की बात कही सामग्री ट्रक अथवा अन्य वाहनों से वैध चालान के आधार पर मंगाई जाती है और स्थानीय ग्राहकों के मकान एवं निजी निर्माण कार्यों के लिए खुदरा रूप में उपलब्ध कराई जाती है। संघ का आरोप है कि ग्राहकों तक सामग्री पहुंचाने के दौरान वाहनों और ट्रैक्टरों को पकड़कर एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक का जुर्माना किया जा रहा है। संघ के प्रतिनिधि विप्लव रणधीर ने कहा कि छोटे कारोबारियों को कार्रवाई के नाम पर परेशान किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने कुछ व्यवसायियों के ट्रैक्टर पकड़े जाने और उनसे बड़ी राशि वसूले जाने की बात कही। हालांकि, कार्रवाई करने वाले संबंधित पदाधिकारी के नाम की पूरी जानकारी संघ को नहीं होने की बात भी उन्होंने कही। व्यवसायियों के बीच सपना कुमारी नाम की महिला पदाधिकारी के कार्रवाई में शामिल होने की चर्चा होने का दावा किया गया। 25 हजार घनफीट से कम स्टॉक पर नियम स्पष्ट करने की मांग विप्लव रणधीर के अनुसार,व्यवसायियों ने कहा कि खनन नियमों में 25 हजार घनफीट से लेकर 10 लाख घनफीट तक स्टॉक रखने वाले स्टॉकिस्टों के लिए लाइसेंस समेत अन्य प्रावधान निर्धारित हैं। ऐसे में 25 हजार घनफीट से कम स्टॉक रखने वाले छोटे विक्रेताओं पर कौन से नियम लागू होते हैं,इसे स्पष्ट किया जाना चाहिए। संघ ने कार्रवाई से पहले डिपो संचालकों को नोटिस देने,नियमों की जानकारी उपलब्ध कराने और छोटे कारोबारियों को नियमों का पालन करने के लिए पर्याप्त अवसर देने की मांग की। व्यवसायियों का कहना है कि नियम स्पष्ट होने के बाद वे उसके अनुरूप अपना कारोबार करने को तैयार हैं। 15 दिनों तक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश डीएम विक्रम विरकर से मुलाकात के बाद मामले में तत्काल राहत देते हुए सदर एसडीओ धनंजय कुमार को व्यवसायियों को विभाग द्वारा निर्देशित नियमावली की जानकारी देने का निर्देश दिया गया। एसडीओ ने व्यवसायियों को बताया कि आगामी 15 दिनों तक कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस अवधि में व्यवसायियों के साथ बैठक कर पूरे मामले पर विस्तार से चर्चा की जाएगी और विभाग की ओर से निर्धारित नियमों एवं प्रावधानों की जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही विभाग को दुकानों और डिपो का सर्वे करने का निर्देश दिया गया है। सर्वे के बाद पात्र व्यवसायियों के लिए लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया अपनाए जाने की बात कही गई है। इससे छोटे बालू-गिट्टी कारोबारियों को अपने व्यवसाय को नियमों के अनुरूप संचालित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। सीमेंट की तर्ज पर बालू-गिट्टी उपलब्ध कराने की मांग व्यवसायी संघ ने बालू-गिट्टी की उपलब्धता और कारोबार की व्यवस्था को भी सरल बनाने की मांग की। संघ के सदस्यों ने कहा कि जिस प्रकार सीमेंट व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध होता है, उसी तरह बालू-गिट्टी भी निर्धारित व्यवस्था के तहत एक जगह से उपलब्ध कराई जाए। व्यवसायियों ने कहा कि वे सरकार को निर्धारित टैक्स और जीएसटी देने के लिए तैयार हैं। उनका कहना है कि छोटे कारोबारियों के वाहनों पर एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाना उनके लिए गंभीर आर्थिक बोझ है। संघ ने प्रशासन से छोटे विक्रेताओं के लिए नियमों को स्पष्ट कर उचित व्यवस्था बनाने की मांग की है।  

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