भोपाल का मास्टर प्लान 2047 (प्रारूप) आखिरकार जारी हो गया है। पिछला मास्टर प्लान 1995 में बना था और उसकी योजना अवधि 2005 तक थी। इसके बाद नया प्लान लागू नहीं हो सका। यानी कानूनी तौर पर तय ही नहीं था कि शहर के किस हिस्से में क्या बन सकता है, और इसी की वजह से दुकानों की सीलिंग जैसा बड़ा संकट खड़ा हुआ। तो फिर चल रही सीलिंग का क्या होगा, आपकी गली में अब क्या-क्या खुल सकता है, भोपाल आखिर 2047 तक बनना क्या चाहता है; डिकोड करेंगे मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर में… सवाल 1: भोपाल में चल रही सीलिंग का क्या होगा? जवाब- अभी तुरंत कुछ नहीं बदलेगा, दुकानें बंद ही रहेंगी। सवाल 2: ट्रैफिक, पार्किंग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट में क्या बदलेगा? जवाब- अभी भोपाल में पार्किंग की व्यवस्था बहुत सीमित है। शहर में सिर्फ 29 ऑफ-स्ट्रीट, 11 ऑन-स्ट्रीट और 3 प्रीमियम पार्किंग संचालित है। नए प्लान में इसका हल पार्किंग को जमीन से ऊपर या नीचे शिफ्ट करने में निकाला गया है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए बड़ा बदलाव 51 किलोमीटर के ‘ग्रोथ कॉरिडोर’ से आएगा, जो शहर को एयरपोर्ट और बाहरी इलाकों से जोड़ेगा। सवाल 3: आपके प्लॉट और मकान पर मास्टर प्लान का क्या असर होगा? जवाब- अब यह आपकी गली की सड़क की चौड़ाई से तय होगा… A. सड़क 9 मीटर या ज्यादा चौड़ी है, तो आंगनवाड़ी, ATM, क्रेच, डे-केयर, मिल्क बूथ, पार्क, प्लेस्कूल, पुलिस चौकी जैसी बुनियादी चीजें आपके आसपास खुल सकती हैं। B. 12 मीटर या ज्यादा चौड़ी है, तो इसके अलावा बैंक, क्लीनिक, कोचिंग सेंटर (25 बच्चों तक), किराना, जनरल स्टोर, जिम, नर्सिंग होम (30 बेड तक), वृद्धाश्रम, रेस्टोरेंट, रिटेल शॉप जैसी चीजें भी आ सकती हैं। C. 18 मीटर या ज्यादा चौड़ी है, तो गाड़ी रिपेयर शॉप, शोरूम, ऑडिटोरियम (100 सीट तक), कॉल सेंटर जैसी बड़ी गतिविधियां भी शुरू हो सकती हैं। यानी अगर आपका घर संकरी गली में है, तो आसपास सीमित सुविधाएं ही आएंगी। चौड़ी सड़क पर है, तो रोजमर्रा की जरूरत की हर चीज घर के पास मिलने की संभावना बढ़ जाएगी। नए आवासीय इलाकों को शुरू से ही इसी सोच के साथ बसाने का प्रस्ताव है, ताकि स्कूल, दुकान, स्वास्थ्य सुविधा और पार्किंग घर के पास ही मिले। अगर आप पुराने शहर में रहते हैं और ऊंचाई-सीमा के चलते नई मंजिल नहीं जोड़ पा रहे, तो सरकार आपको ‘हेरिटेज TDR’ नाम का एक प्रमाणपत्र देगी- यह असल में एक निर्माण करने का हक है, जिसे आप बेच सकते हैं। अगर आप किसी पुरानी अपार्टमेंट सोसाइटी में रहते हैं और 70% पड़ोसी पुनर्विकास के लिए राजी हों, तो पूरी बिल्डिंग तोड़कर नई बनवाना अब कानूनी तौर पर आसान होगा। सवाल 4: झील, तालाब और हरियाली को लेकर मास्टर प्लान में क्या बदलेगा? जवाब- भोपाल में कुल 18 बड़े जल निकाय (झील-तालाब) हैं, और भोजताल (बड़ा तालाब) अकेले शहर की करीब 40% घरेलू पानी की जरूरत पूरी करता है- यानी अगर आप भोपाल में रहते हैं, तो आपके नल में आने वाले पानी का बड़ा हिस्सा इसी झील से आता है। शहर के निवेश क्षेत्र का 10.79% हिस्सा जंगल है, जिसमें बाघों के लिए मशहूर रातापानी अभयारण्य का बड़ा हिस्सा शामिल है। हरित क्षेत्र को लेकर तीन बड़े बदलाव हैं… A. शहर स्तर पर- हरित क्षेत्र 2005 के करीब 16% से बढ़ाकर अब करीब 27% करने का प्रस्ताव है, जो राष्ट्रीय गाइडलाइन (URDPFI) से भी ज्यादा है। B. आपकी कॉलोनी स्तर पर- खुली जगह 10% से बढ़ाकर 12% करने की बात है, यानी आपकी कॉलोनी में सांस लेने की थोड़ी और जगह होगी। C. पहाड़ी इलाकों में- 15% यानी करीब 8 डिग्री से ज्यादा ढलान वाली जगहों पर निर्माण की इजाजत नहीं होगी, करीब 1,000 हेक्टेयर जमीन संरक्षण के दायरे में रहेगी, और मिट्टी का कटाव रोकने के लिए पहाड़ों पर पेड़ लगाए जाएंगे। अगर आपकी जमीन भोज ताल के कैचमेंट जैसे संरक्षित इलाके में आती है (जहां पहले किसानों ने निर्माण न होने पाने पर विरोध किया था, क्योंकि रामसर साइट होने से वहां निर्माण की इजाजत नहीं मिलती), तो अब आपको सीधे निर्माण की इजाजत तो नहीं, पर एक ‘ग्रीन TDR’ यानी बेचने लायक निर्माण-हक मिलेगा, बशर्ते आप वहां हरियाली बनाए रखें। एक दिलचस्प बदलाव यह भी है कि शहर की पुरानी कचरा डंपिंग साइट (भानपुर खंती) की जगह अब वहां गोल्फ कोर्स बनाने का प्रस्ताव है। सवाल 5: आखिर 2047 तक भोपाल किस तरह का शहर बनना चाहता है? जवाब- भोपाल की आबादी 2021 के करीब 24 लाख से बढ़कर 2047 तक करीब 45 लाख तक पहुंच सकती है। इतनी आबादी के लिए सिर्फ नई जमीन जोड़ना ही रास्ता नहीं माना गया है। ड्राफ्ट में जहां संभव हो, ज्यादा FAR (प्लॉट के आकार के मुकाबले कुल कितना निर्माण किया जा सकता है) और मिक्स्ड लैंड यूज के जरिए मौजूदा शहरी जमीन पर ही ज्यादा लोगों को बसाने की बात है। यानी भोपाल का भविष्य सिर्फ बाहर फैलने वाला शहर नहीं, कुछ जगहों पर ज्यादा घनत्व वाला शहर भी होगा। भोपाल में पहाड़ियां और बड़े जल निकाय काफी जगह घेरते हैं, इसलिए यहां सामान्य बड़े शहरों के 125-175 व्यक्ति प्रति हेक्टेयर घनत्व के मुकाबले करीब 94.7 व्यक्ति प्रति हेक्टेयर के आधार पर योजना बनाई गई है- यानी भोपाल जानबूझकर दूसरे महानगरों जितना घना शहर नहीं बनना चाहता, अपनी झीलों-पहाड़ियों को बचाते हुए बढ़ना चाहता है। यह प्लान सिर्फ भोपाल शहर तक सीमित नहीं है… A. दायरा बढ़ा- निवेश क्षेत्र 601 वर्ग किलोमीटर (146 गांव) से बढ़ाकर 1,017 वर्ग किलोमीटर (254 गांव) कर दिया गया है, यानी 108 नए गांव पहली बार शहरी योजना के दायरे में आएंगे। अगर आप इनमें से किसी गांव में रहते हैं, तो अब आपकी जमीन पर भी गांव के पुराने ढीले नियमों की जगह शहर जैसे नियम लागू होंगे। B. महानगरीय ढांचा- अलग महानगरीय विकास प्राधिकरण और पूरे इलाके के ट्रैफिक को एक साथ संभालने के लिए ‘यूनिफाइड मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी’ बनाने का प्रस्ताव है, यानी आगे भोपाल अकेले शहर की तरह नहीं, आसपास के शहरों से जुड़े बड़े शहरी क्षेत्र की तरह चलेगा। C. प्रशासनिक बंटवारा- 2005 में भोपाल 7 उपनगरों में बंटा था, अब मिसरोद को दो हिस्सों में बांटकर और कोलार को औपचारिक उपनगर का दर्जा देकर कुल 8 उपनगर होंगे। D. रोजगार- सबसे बड़ा दांव भौंरी इलाके में है, जहां मौजूदा एजुकेशन हब को अपग्रेड कर EKAI सिटी (शिक्षा, अनुसंधान, AI आधारित ज्ञान केंद्र) बनाने की योजना है, जो इस कॉरिडोर के जरिए एयरपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और थोक कारोबार वाले इलाकों से भी जुड़ेगा। सुरक्षा के लिए सार्वजनिक स्थानों के निजी CCTV कैमरों को नेटवर्क से जोड़ने और सार्वजनिक भवनों की बाउंड्री वॉल पारदर्शी रखने जैसे प्रावधान भी हैं। कुल प्रस्तावित विकास योग्य क्षेत्रफल 61,017 हेक्टेयर है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा आवासीय (43.85%) और उसके बाद हरित क्षेत्र (27.01%) का है। इतने बड़े प्लान का पैसा कहां से आएगा? ड्राफ्ट जारी होने के बाद पहली प्रतिक्रियाएं क्या रहीं? मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर का ये एपिसोड भी पढ़ें…
21 साल बाद लौटी ‘सरकारी’ बस, लेकिन चलाएगी प्राइवेट कंपनी- क्या बदलेगा, कैसा होगा सफर 21 साल बाद मध्य प्रदेश में सरकारी बस सेवा लौट रही है। 25 सितंबर यानी आज मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत CM मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भोपाल से 351 बसों को हरी झंडी दिखाई। लेकिन बस सेवा का मॉडल इस बार अलग है…पूरा एक्सप्लेनर पढ़िए।

