छिंदवाड़ा में स्वामित्व योजना की रजिस्ट्री में पटवारियों को निष्पादक की जिम्मेदारी देने का विरोध अब कार्रवाई तक पहुंच गया है। प्रांतीय पटवारी संघ के आह्वान पर पटवारी 17 तारीख से इस काम को नहीं कर रहे हैं। गुरुवार दोपहर पटवारियों ने अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। इसके बाद शाम को प्रशासन ने स्वामित्व योजना के काम में लापरवाही का हवाला देते हुए जिले के 32 परिवीक्षाधीन पटवारियों को सेवा से बर्खास्त करने के लिए अंतिम नोटिस जारी किया। पटवारी बोले- सरकारी काम के लिए तैयार
पटवारियों का कहना है कि स्वामित्व रजिस्ट्री के काम में कई व्यावहारिक और तकनीकी दिक्कतें हैं। इन समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव और कलेक्टर को पहले भी ज्ञापन दिया जा चुका है। तहसील अध्यक्ष राजेंद्र कुमार डोबले ने कहा कि पटवारी सरकारी काम करने के लिए तैयार हैं, लेकिन स्वामित्व योजना में निष्पादक की जिम्मेदारी से उन्हें हटाया जाना चाहिए। बोले- जमीन पटवारी के नाम नहीं
राजेंद्र कुमार डोबले के मुताबिक, स्वामित्व योजना के तहत किसानों को मिले पट्टों की रजिस्ट्री में पटवारी को निष्पादक बनाया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जमीन पटवारी के नाम पर नहीं है तो उसे विक्रेता के रूप में रजिस्ट्री कराने की जिम्मेदारी किस आधार पर दी जा रही है। उन्होंने दावा किया कि इसी मुद्दे को लेकर प्रदेशभर में पटवारी संघ विरोध कर रहा है। उनके अनुसार देवास, रतलाम सहित अन्य जिलों में पटवारियों पर कार्रवाई की जा रही है। 2020 बैच के परिवीक्षाधीन पटवारियों पर भी कार्रवाई और कुछ मामलों में सेवा से बर्खास्तगी की बात सामने आई है। प्रशासन बोला- लापरवाही पर होगी कार्रवाई
प्रशासन की ओर से जारी अंतिम नोटिस में स्वामित्व योजना के काम में लापरवाही का हवाला दिया गया है। प्रशासन के अनुसार 32 परिवीक्षाधीन पटवारियों को बर्खास्तगी का आदेश जल्द तामील कराया जाएगा। उनके बस्ते वापस लेने की कार्रवाई भी की जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आगे भी स्वामित्व योजना के काम में लापरवाही पाए जाने पर पटवारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। एक ही दिन में पटवारियों के विरोध और प्रशासन की कार्रवाई सामने आने से मामला गरमा गया है। पटवारी संघ ने सरकार से हस्तक्षेप कर मांगों पर विचार करने और की गई कार्रवाई की समीक्षा करने का अनुरोध किया है।

