‘छापेमारी में बच्चों की किताब तक पलटी, कुछ नहीं मिला’:विधायक बोले- माननीय के घर रेड कर हीरो बनना चाहती पुलिस, जमीन विवाद में हत्या होती वो नहीं दिखता

‘छापेमारी में बच्चों की किताब तक पलटी, कुछ नहीं मिला’:विधायक बोले- माननीय के घर रेड कर हीरो बनना चाहती पुलिस, जमीन विवाद में हत्या होती वो नहीं दिखता

‘पुलिस को सिर्फ हीरो बनने का मन है। उनको लगता है कि किसी माननीय के घर में जाकर जांच-पड़ताल करेंगे तो चर्चा होगी कि पुलिस काम कर रही है। जमीन विवाद में इतना मर्डर होता है। इतने माफिया हैं। जहां कार्रवाई करनी चाहिए वहां तो करते नहीं हैं। घर में जांच के दौरान पुलिस वालों ने बच्चों के किताब तक को पलटकर देखा, पर कुछ नहीं मिला। ये उनलोगों के मुंह पर तमाचा है। खाली हाथ लौट गए।’ ये बातें केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की पार्टी के विधायक अमित कुमार रानू ने कही है। जो सीतामढ़ी के बेलसंड से विधायक हैं। जमीन विवाद में उनके भाई सोनू सिंह की भूमिका सामने आई थी। जिसके बाद विधायक की भी संलिप्तता जांच के दायरे में आई। इसी कारण पुलिस विधायक के बैरिया स्थित आवास पर छापेमारी करने गई थी। रविवार को पुलिस ने क्या कार्रवाई की, एसएसपी ने क्या कहा, विधायक की मामले में संलिप्तता कैसे आई, पढ़ें रिपोर्ट…. आवासीय कार्यालय से दो अपराधियों किया गिरफ्तार विधायक के खिलाफ मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी मिलाकर अबतक कुल 14 FIR दर्ज हुए हैं। वहीं विधायक के सीतामढ़ी स्थित आवासीय कार्यालय से दो अपराधियों को अवैध हथियार के साथ गिरफ्तार किया गया है। पकड़े गए दोनों अपराधी 2023 में रंगदारी और डकैती की साजिश रचने के आरोप में जेल जा चुके हैं। पुलिस की टीम गिरफ्तार अपराधियों की निशानदेही पर छापेमारी कर रही है। सीतामढ़ी एसपी अमित रंजन और मुजफ्फरपुर SSP कांतेश कुमार मिश्रा ने मामले की पुष्टि की है। SSP बोले- पूरी कार्रवाई जमीन विवाद से जुड़ी है मुजफ्फरपुर SSP कांतेश मिश्रा ने बताया, “पूरी कार्रवाई जमीन विवाद से जुड़ी है। 20 अगस्त को अपराधियों ने जमीन की बाउंड्री और निर्माण को तोड़ा था। मामले में विधायक के भाई सोनू सिंह की संलिप्तता सामने आई है। वहीं, विधायक की भूमिका भी सामने आ रही है। 21 अगस्त को इस मामले में एक शिकायत दर्ज हुई थी। इसके बाद 12 और मामले दर्ज हुए हैं। पुलिस के पहुंचने से पहले विधायक के भाई वहां से निकल गए। उनकी तलाश की जा रही है। विधायक, उनके भाई और ग्रुप में नामजद और अज्ञात सभी लोगों के बैंक अकाउंट के ट्रांजेक्शन भी खंगाले जाएंगे। सभी की संपत्ति जब्त करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इसकी जानकारी आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को दी जाएगी। जल्द ही आर्थिक अपराध इकाई भी इस कांड की जांच में शामिल हो जाएगी। जांच के सभी बिंदुओं पर पुलिस आर्थिक अपराध इकाई की टीम से सहयोग लेगी।” पुलिस सूत्रों की मानें तो छापेमारी के दौरान विधायक ने उन्हें धमकाया। घर सर्च करने के दौरान विधायक अमित कुमार रानू ने कई पुलिस कर्मियों और पदाधिकारी को यह कहते हुए धमकाया कि आपके इलाके में कहीं क्राइम हुआ तो विधानसभा में मुद्दा उठाएंगे। अब पुलिस एक्शन से जुड़ीं तस्वीरें… जेसीबी से तोड़फोड़ की गई
आरोप है कि विधायक के भाई सोनू सिंह ने 20 अगस्त को अपने गुर्गों के साथ मिलकर बैरिया में 25 लोगों के बन रहे घर को जेसीबी लगाकर तोड़ दिया था। विरोध करने पर पीड़ित पक्ष के साथ अभद्रता और मारपीट‎ की गई। घटना के बाद पीड़ितों के बयान पर अहियापुर थाने में केस दर्ज किया गया था। पुलिस ने इस मामले में दो प्रॉपर्टी डीलरों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। पूछताछ में दोनों ने विधायक और उसके भाई की संलिप्तता की बात कबूली थी। पुलिस के पहुंचने से पहले विधायक का भाई फरार मुजफ्फरपुर SSP कांतेश मिश्रा ने कहा, ‘इसी आधार पर पुलिस ने शनिवार को कोर्ट से सर्च वारंट लिया और आज रविवार सुबह तीन DSP के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पुलिस बल ने विधायक के निजी आवास को घेर लिया। रेड में घर से एक स्टांप पेपर साइन किए मिला है, जो फर्जी लग रहा है। इस मामले में सख्त कार्रावाई की जाएगी। संपत्ति का आकलन करके कार्रवाई करेंगे।’ SSP बोले- ये एक संगठित अपराध 20 अगस्त को अहियापुर थाना अंतर्गत एक मामला दर्ज हुआ था। झपहां डीह में करीब 50 की संख्या में लोग रह रहे हैं। वहां कुछ लोगों का घर निर्माणाधीन है। कुछ लोगों ने बाउंड्री को तोड़ दिया गया था। मुजफ्फरपुर SSP कांतेश मिश्रा ने कहा, ‘पहले दिन सुमित कुमार श्रीवास्तव और सोनू सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई थी। जांच में जो वीडियो मौके से मिला था। उस आधार पर प्रोपर्टी डीलर सुमित कुमार श्रीवास्तव और सन्नी सिंह की गिरफ्तारी हुई थी।’ विधायक बोले- LJP(R) लीडर की जमीन हड़पी जा रही रेड के बाद विधायक अमित कुमार रानू ने कहा, ‘आज हमारे घर पर पुलिस आई थी। उनके पास सर्च वारंट था। उनका कहना था कि हमारे पास बेनामी संपत्ति है। झपहां का कोई मामला है। मेरे नाम पर मेरे घर के लोगों के नाम पर जमीन है। पुलिस की ये कार्रवाई उनकी नाकामी दिखाती है। हमारी पार्टी के एक नेता थे, जिनकी जमीन को वहां कुछ लोगों ने कब्जा करके रखा था। उसको टुकड़ों-में बेच रहे थे।’ ‘किसी और जमीन का पेपर उनके पास था। लेकिन पोजिशन हमारी पार्टी के आईटी सेल के प्रदेश महासचिव की जमीन का ले रहे थे। दबंग लोग उनकी जमीन हड़प रहे थे। हमारे पास भी आए थे, हमने पुलिस से पैरवी भी की थी, कोई नहीं सुन रहा था। सीओ को एक आवेदन भी दिया। जिसमें अवैध निर्माण का जिक्र था। जिनकी जमीन पर कब्जा हो रहा था, उल्टा उस पर ही केस कर दिया गया था।’ क्या है पूरा मामला अहियापुर थाना क्षेत्र के झपहां डीह में गुरुवार को 70-80 ‎की संख्या में पहुंचे हथियारबंद बदमाशों ने निजी जमीन पर ‎कब्जा करने की नीयत से जमकर उत्पात मचाया। कई वाहनों‎ और जेसीबी के साथ पहुंचे असामाजिक तत्वों ने पहले गेट‎ का ताला तोड़ा, फिर जेसीबी से चहारदीवारी ध्वस्त कर दी।‎ ‘भाग जाओ, वरना JCB से गड्ढा कर इसी जमीन में गाड़ देंगे’ पूरे मामले को लेकर जमीन मालिक प्रहलाद कुमार ने 20 अगस्त को थाने में आवेदन दिया। जिसमें लिखा- ‘20.08.2026 को समय लगभग 11 बजे सूचना मिली कि सुमित श्रीवास्तव कुछ लोगों के साथ JCB (रजिस्ट्रेशन BR-060E7193) थार (BR-01JK 7700) और मोटर साईकिल से पहुंचे। गाड़ी में लोजपा (राम विलास) प्रधान महासचिव का बोर्ड लगा था। लगभग 50 अज्ञात लोगों के साथ मेरी जमीन और अन्य मकान में तोड़फोड़ करने लगे। मैं और अन्य जमीन के मालिक लगभग 12:00 बजे पहुंचे तो मेरी बाउंड़ी को तोड़ा जा चुका था। जबकि प्रेमचन्द्र मिश्रा के मकान को तोड़ जा रहा था। हमने मना किया, मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू किया तो मेरा मोबाइल छीन कर तोड़ दिया और मारपीट की। साथ ही गले में पहली सोने की चैन भी छीन ली।’ विवादित जमीन का जायजा लेने पहुंचे SSP मामले की जांच के लिए एसएसपी कांतेश मिश्रा रविवार सुबह विवादित जमीन पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। यहां 52 प्लॉट की बाऊंड़्री को तोड़ा गया है। पीड़ित लोगों में दहशत है। 20 अगस्त को हुई तोड़फोड़ का वीडियो भी सामने आया है। जिसमें कुछ लोग बुलडोजर से बाउंड्री तोड़ते दिखाई दे रहे हैं। राजद के निशाने पर सरकार विधायक के घर रेड को लेकर आरजेडी ने सरकार पर निशाना साधा है। सोशल मीडिया पर पोस्ट किया- ‘बिहार में जितने भी अपराध होते हैं, सब के सब सत्ता संरक्षित अपराध होते हैं, सभी में बिहार सरकार के मंत्री, BJP-JDU के विधायक या उनका भाई-रिश्तेदार शामिल होता है। बिहार पुलिस में इन अपराधियों को गिरफ्तार करने की हिम्मत नहीं है। केवल कार्रवाई का ढोंग किया जाता है। और कुछ दिनों बाद सब कुछ ढाक के तीन पात की तरह पहले जैसा हो जाता है।’ ‘पुलिस को सिर्फ हीरो बनने का मन है। उनको लगता है कि किसी माननीय के घर में जाकर जांच-पड़ताल करेंगे तो चर्चा होगी कि पुलिस काम कर रही है। जमीन विवाद में इतना मर्डर होता है। इतने माफिया हैं। जहां कार्रवाई करनी चाहिए वहां तो करते नहीं हैं। घर में जांच के दौरान पुलिस वालों ने बच्चों के किताब तक को पलटकर देखा, पर कुछ नहीं मिला। ये उनलोगों के मुंह पर तमाचा है। खाली हाथ लौट गए।’ ये बातें केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की पार्टी के विधायक अमित कुमार रानू ने कही है। जो सीतामढ़ी के बेलसंड से विधायक हैं। जमीन विवाद में उनके भाई सोनू सिंह की भूमिका सामने आई थी। जिसके बाद विधायक की भी संलिप्तता जांच के दायरे में आई। इसी कारण पुलिस विधायक के बैरिया स्थित आवास पर छापेमारी करने गई थी। रविवार को पुलिस ने क्या कार्रवाई की, एसएसपी ने क्या कहा, विधायक की मामले में संलिप्तता कैसे आई, पढ़ें रिपोर्ट…. आवासीय कार्यालय से दो अपराधियों किया गिरफ्तार विधायक के खिलाफ मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी मिलाकर अबतक कुल 14 FIR दर्ज हुए हैं। वहीं विधायक के सीतामढ़ी स्थित आवासीय कार्यालय से दो अपराधियों को अवैध हथियार के साथ गिरफ्तार किया गया है। पकड़े गए दोनों अपराधी 2023 में रंगदारी और डकैती की साजिश रचने के आरोप में जेल जा चुके हैं। पुलिस की टीम गिरफ्तार अपराधियों की निशानदेही पर छापेमारी कर रही है। सीतामढ़ी एसपी अमित रंजन और मुजफ्फरपुर SSP कांतेश कुमार मिश्रा ने मामले की पुष्टि की है। SSP बोले- पूरी कार्रवाई जमीन विवाद से जुड़ी है मुजफ्फरपुर SSP कांतेश मिश्रा ने बताया, “पूरी कार्रवाई जमीन विवाद से जुड़ी है। 20 अगस्त को अपराधियों ने जमीन की बाउंड्री और निर्माण को तोड़ा था। मामले में विधायक के भाई सोनू सिंह की संलिप्तता सामने आई है। वहीं, विधायक की भूमिका भी सामने आ रही है। 21 अगस्त को इस मामले में एक शिकायत दर्ज हुई थी। इसके बाद 12 और मामले दर्ज हुए हैं। पुलिस के पहुंचने से पहले विधायक के भाई वहां से निकल गए। उनकी तलाश की जा रही है। विधायक, उनके भाई और ग्रुप में नामजद और अज्ञात सभी लोगों के बैंक अकाउंट के ट्रांजेक्शन भी खंगाले जाएंगे। सभी की संपत्ति जब्त करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इसकी जानकारी आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को दी जाएगी। जल्द ही आर्थिक अपराध इकाई भी इस कांड की जांच में शामिल हो जाएगी। जांच के सभी बिंदुओं पर पुलिस आर्थिक अपराध इकाई की टीम से सहयोग लेगी।” पुलिस सूत्रों की मानें तो छापेमारी के दौरान विधायक ने उन्हें धमकाया। घर सर्च करने के दौरान विधायक अमित कुमार रानू ने कई पुलिस कर्मियों और पदाधिकारी को यह कहते हुए धमकाया कि आपके इलाके में कहीं क्राइम हुआ तो विधानसभा में मुद्दा उठाएंगे। अब पुलिस एक्शन से जुड़ीं तस्वीरें… जेसीबी से तोड़फोड़ की गई
आरोप है कि विधायक के भाई सोनू सिंह ने 20 अगस्त को अपने गुर्गों के साथ मिलकर बैरिया में 25 लोगों के बन रहे घर को जेसीबी लगाकर तोड़ दिया था। विरोध करने पर पीड़ित पक्ष के साथ अभद्रता और मारपीट‎ की गई। घटना के बाद पीड़ितों के बयान पर अहियापुर थाने में केस दर्ज किया गया था। पुलिस ने इस मामले में दो प्रॉपर्टी डीलरों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। पूछताछ में दोनों ने विधायक और उसके भाई की संलिप्तता की बात कबूली थी। पुलिस के पहुंचने से पहले विधायक का भाई फरार मुजफ्फरपुर SSP कांतेश मिश्रा ने कहा, ‘इसी आधार पर पुलिस ने शनिवार को कोर्ट से सर्च वारंट लिया और आज रविवार सुबह तीन DSP के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पुलिस बल ने विधायक के निजी आवास को घेर लिया। रेड में घर से एक स्टांप पेपर साइन किए मिला है, जो फर्जी लग रहा है। इस मामले में सख्त कार्रावाई की जाएगी। संपत्ति का आकलन करके कार्रवाई करेंगे।’ SSP बोले- ये एक संगठित अपराध 20 अगस्त को अहियापुर थाना अंतर्गत एक मामला दर्ज हुआ था। झपहां डीह में करीब 50 की संख्या में लोग रह रहे हैं। वहां कुछ लोगों का घर निर्माणाधीन है। कुछ लोगों ने बाउंड्री को तोड़ दिया गया था। मुजफ्फरपुर SSP कांतेश मिश्रा ने कहा, ‘पहले दिन सुमित कुमार श्रीवास्तव और सोनू सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई थी। जांच में जो वीडियो मौके से मिला था। उस आधार पर प्रोपर्टी डीलर सुमित कुमार श्रीवास्तव और सन्नी सिंह की गिरफ्तारी हुई थी।’ विधायक बोले- LJP(R) लीडर की जमीन हड़पी जा रही रेड के बाद विधायक अमित कुमार रानू ने कहा, ‘आज हमारे घर पर पुलिस आई थी। उनके पास सर्च वारंट था। उनका कहना था कि हमारे पास बेनामी संपत्ति है। झपहां का कोई मामला है। मेरे नाम पर मेरे घर के लोगों के नाम पर जमीन है। पुलिस की ये कार्रवाई उनकी नाकामी दिखाती है। हमारी पार्टी के एक नेता थे, जिनकी जमीन को वहां कुछ लोगों ने कब्जा करके रखा था। उसको टुकड़ों-में बेच रहे थे।’ ‘किसी और जमीन का पेपर उनके पास था। लेकिन पोजिशन हमारी पार्टी के आईटी सेल के प्रदेश महासचिव की जमीन का ले रहे थे। दबंग लोग उनकी जमीन हड़प रहे थे। हमारे पास भी आए थे, हमने पुलिस से पैरवी भी की थी, कोई नहीं सुन रहा था। सीओ को एक आवेदन भी दिया। जिसमें अवैध निर्माण का जिक्र था। जिनकी जमीन पर कब्जा हो रहा था, उल्टा उस पर ही केस कर दिया गया था।’ क्या है पूरा मामला अहियापुर थाना क्षेत्र के झपहां डीह में गुरुवार को 70-80 ‎की संख्या में पहुंचे हथियारबंद बदमाशों ने निजी जमीन पर ‎कब्जा करने की नीयत से जमकर उत्पात मचाया। कई वाहनों‎ और जेसीबी के साथ पहुंचे असामाजिक तत्वों ने पहले गेट‎ का ताला तोड़ा, फिर जेसीबी से चहारदीवारी ध्वस्त कर दी।‎ ‘भाग जाओ, वरना JCB से गड्ढा कर इसी जमीन में गाड़ देंगे’ पूरे मामले को लेकर जमीन मालिक प्रहलाद कुमार ने 20 अगस्त को थाने में आवेदन दिया। जिसमें लिखा- ‘20.08.2026 को समय लगभग 11 बजे सूचना मिली कि सुमित श्रीवास्तव कुछ लोगों के साथ JCB (रजिस्ट्रेशन BR-060E7193) थार (BR-01JK 7700) और मोटर साईकिल से पहुंचे। गाड़ी में लोजपा (राम विलास) प्रधान महासचिव का बोर्ड लगा था। लगभग 50 अज्ञात लोगों के साथ मेरी जमीन और अन्य मकान में तोड़फोड़ करने लगे। मैं और अन्य जमीन के मालिक लगभग 12:00 बजे पहुंचे तो मेरी बाउंड़ी को तोड़ा जा चुका था। जबकि प्रेमचन्द्र मिश्रा के मकान को तोड़ जा रहा था। हमने मना किया, मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू किया तो मेरा मोबाइल छीन कर तोड़ दिया और मारपीट की। साथ ही गले में पहली सोने की चैन भी छीन ली।’ विवादित जमीन का जायजा लेने पहुंचे SSP मामले की जांच के लिए एसएसपी कांतेश मिश्रा रविवार सुबह विवादित जमीन पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। यहां 52 प्लॉट की बाऊंड़्री को तोड़ा गया है। पीड़ित लोगों में दहशत है। 20 अगस्त को हुई तोड़फोड़ का वीडियो भी सामने आया है। जिसमें कुछ लोग बुलडोजर से बाउंड्री तोड़ते दिखाई दे रहे हैं। राजद के निशाने पर सरकार विधायक के घर रेड को लेकर आरजेडी ने सरकार पर निशाना साधा है। सोशल मीडिया पर पोस्ट किया- ‘बिहार में जितने भी अपराध होते हैं, सब के सब सत्ता संरक्षित अपराध होते हैं, सभी में बिहार सरकार के मंत्री, BJP-JDU के विधायक या उनका भाई-रिश्तेदार शामिल होता है। बिहार पुलिस में इन अपराधियों को गिरफ्तार करने की हिम्मत नहीं है। केवल कार्रवाई का ढोंग किया जाता है। और कुछ दिनों बाद सब कुछ ढाक के तीन पात की तरह पहले जैसा हो जाता है।’  

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