बेगूसराय सदर के चांदपुरा पंचायत में लाखों रुपये की लागत से बना मनरेगा भवन आठ साल बाद भी इस्तेमाल नहीं हो सका है। भवन का निर्माण पूरा होने के बावजूद इसे पंचायत को ठीक से सौंपा नहीं गया है। इस वजह से यहां मनरेगा कर्मियों के बैठने और सरकारी कामकाज की व्यवस्था भी शुरू नहीं हो पाई है। भवन की अभी की हालत भी कई सवाल खड़े करती है। इसके दो कमरों में भूसा रखा हुआ है। गांववालों का कहना है कि सरकारी पैसे से बने भवन का इतने लंबे समय तक इस्तेमाल न होना एक बड़ी लापरवाही है। अगर यह भवन समय पर पंचायत को मिल जाता, तो इसका उपयोग मनरेगा और पंचायत से जुड़े कामों के लिए किया जा सकता था। पंचायत के मुखिया अरविंद कुमार साह ने बताया कि भवन से भूसा और दूसरा सामान कई बार हटवाया गया है। ताला भी लगाया गया, लेकिन कुछ लोग ताला तोड़कर फिर से भवन में भूसा और सामान रख देते हैं। इसके बाद वे अपना ताला लगा देते हैं। पूर्व मुखिया ने भवन नहीं सौंपे जाने की बताई वजह पूर्व मुखिया सुरेंद्र कुमार साहनी ने बताया कि मनरेगा भवन करीब आठ साल पहले बनाया गया था। निर्माण पूरा होने के बाद भी इसे पंचायत के जनप्रतिनिधियों को ठीक से सौंपा नहीं गया। इसी वजह से भवन का सरकारी इस्तेमाल शुरू नहीं हो पाया। उत्तम कुमार, कारे लाल, राहुल कुमार, मनीष कुमार और निक्की कुमार समेत दूसरे गांववालों ने प्रशासन से इस मामले की जांच की मांग की है। गांववालों का कहना है कि भवन को खाली कराकर, साफ-सफाई और जरूरी मरम्मत के बाद पंचायत को सौंपा जाए। इससे सरकारी भवन का उपयोग गांववालों के फायदे के लिए हो सकेगा। बेगूसराय सदर के चांदपुरा पंचायत में लाखों रुपये की लागत से बना मनरेगा भवन आठ साल बाद भी इस्तेमाल नहीं हो सका है। भवन का निर्माण पूरा होने के बावजूद इसे पंचायत को ठीक से सौंपा नहीं गया है। इस वजह से यहां मनरेगा कर्मियों के बैठने और सरकारी कामकाज की व्यवस्था भी शुरू नहीं हो पाई है। भवन की अभी की हालत भी कई सवाल खड़े करती है। इसके दो कमरों में भूसा रखा हुआ है। गांववालों का कहना है कि सरकारी पैसे से बने भवन का इतने लंबे समय तक इस्तेमाल न होना एक बड़ी लापरवाही है। अगर यह भवन समय पर पंचायत को मिल जाता, तो इसका उपयोग मनरेगा और पंचायत से जुड़े कामों के लिए किया जा सकता था। पंचायत के मुखिया अरविंद कुमार साह ने बताया कि भवन से भूसा और दूसरा सामान कई बार हटवाया गया है। ताला भी लगाया गया, लेकिन कुछ लोग ताला तोड़कर फिर से भवन में भूसा और सामान रख देते हैं। इसके बाद वे अपना ताला लगा देते हैं। पूर्व मुखिया ने भवन नहीं सौंपे जाने की बताई वजह पूर्व मुखिया सुरेंद्र कुमार साहनी ने बताया कि मनरेगा भवन करीब आठ साल पहले बनाया गया था। निर्माण पूरा होने के बाद भी इसे पंचायत के जनप्रतिनिधियों को ठीक से सौंपा नहीं गया। इसी वजह से भवन का सरकारी इस्तेमाल शुरू नहीं हो पाया। उत्तम कुमार, कारे लाल, राहुल कुमार, मनीष कुमार और निक्की कुमार समेत दूसरे गांववालों ने प्रशासन से इस मामले की जांच की मांग की है। गांववालों का कहना है कि भवन को खाली कराकर, साफ-सफाई और जरूरी मरम्मत के बाद पंचायत को सौंपा जाए। इससे सरकारी भवन का उपयोग गांववालों के फायदे के लिए हो सकेगा।

