चरक भवन में जन्म प्रमाण पत्र बनने में हो रही देरी के मामले में अब राहत की स्थिति बनी है। करीब 800 लंबित प्रमाण पत्रों की पेंडेंसी अब लगभग आधी रह गई है। लंबित मामलों का निपटारा तेजी से करने के साथ अब अस्पताल प्रबंधन ने आगे पेंडेंसी नहीं बढ़े, इसके लिए दो कर्मचारियों को केवल डाटा की जांच के लिए तैनात किया है। इनका काम आवेदन और दस्तावेजों में दर्ज जानकारी का मिलान करना होगा, ताकि गलत डाटा के कारण प्रमाण पत्र जारी होने में दोबारा देरी न हो। चरक भवन में रोजाना नए पंजीकरण, नाम जुड़वाने, संशोधन और पुराने ऑफलाइन प्रमाण पत्र को ऑनलाइन कराने सहित करीब 100 से 120 आवेदन आते हैं। इनमें 35 आवेदन ऑनलाइन जन्म प्रमाण पत्र से जुड़े होते हैं। नई प्रक्रिया और पोर्टल अपडेट के कारण पहले लंबित मामलों की संख्या बढ़ गई थी। ऑनलाइन प्रमाण पत्र के लिए जन्म सूचना फॉर्म, रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों की स्कैन कॉपी सत्यापन के लिए भेजी जाती है। अस्पताल से मंजूरी के बाद मामला रजिस्ट्रार कार्यालय जाता है। दस्तावेजों में कमी या जानकारी गलत पर आपत्ति से प्रक्रिया और लंबी हो जाती है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि पेंडेंसी कम करने के साथ अब डाटा की जांच पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

