अस्पतालों के पानी का इलाज शुरू… गंदगी हटाई, कूलर सुधारे:स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने इंदौर के अफसरों को तलब कर सैंपल दोबारा जांचने के निर्देश दिए

अस्पतालों के पानी का इलाज शुरू… गंदगी हटाई, कूलर सुधारे:स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने इंदौर के अफसरों को तलब कर सैंपल दोबारा जांचने के निर्देश दिए

सरकारी अस्पतालों के पेयजल में ई-कोलाई, टोटल कोलीफॉर्म और अन्य रोगजनक बैक्टीरिया मिलने की भास्कर की पड़ताल के बाद शनिवार को स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया। अस्पतालों में पेयजल व्यवस्था सुधारने, वाटर कूलर और आरओ ठीक कराने तथा पानी पीने के स्थानों की सफाई शुरू हुई। एमवाय अस्पताल समेत कई अस्पतालों में पानी की टंकियों की सफाई भी शुरू हुई है। भास्कर की पड़ताल में एमवाय अस्पताल, सुपर स्पेशिएलिटी, पीसी सेठी और चाचा नेहरू अस्पताल के पानी में ई-कोलाई, टोटल कोलीफॉर्म मिले थे। मानसिक अस्पताल के पानी में टोटल कोलीफॉर्म मिला। कई जगह वाटर कूलर बंद मिले थे तो कुछ स्थानों पर उनके आसपास गंदगी और कचरा पसरा था। एमवाय में अब पानी के सैंपल दोबारा जांचने और जल व्यवस्था सुधारने की प्रक्रिया शुरू की गई है। पीसी सेठी में बेसिन शिफ्ट, सफाई-मेंटेनेंस शुरू
पीसी सेठी अस्पताल की ओपीडी में मरीजों के लिए बनाया गया पेयजल बेसिन पहली मंजिल पर शिफ्ट किया गया है। यहां सफाई और मरम्मत का काम शुरू किया गया है।
मानसिक चिकित्सालय में मटकों की जगह वाटर कूलर
मानसिक चिकित्सालय की इमरजेंसी यूनिट और ओपीडी में मरीजों के लिए रखे पानी के मटके हटाकर वाटर कूलर की व्यवस्था की गई है। वाटर कूलर भी ठीक कराए गए हैं।
सभी अस्पतालों की समीक्षा करेंगे स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मामले का संज्ञान लेते हुए इंदौर के स्वास्थ्य अधिकारियों को तलब किया। उन्होंने अस्पतालों में पेयजल सहित मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की समीक्षा कर जरूरी सुधार करने के निर्देश दिए। पानी के सैंपल दोबारा जांच कराने को कहा। मंत्री शुक्ल ने कहा, “भास्कर की खबर के बाद मैंने इंदौर के स्वास्थ्य अधिकारियों को अस्पतालों की सुविधाओं की समीक्षा कर जरूरी सुधार करने के निर्देश दिए हैं। मरीजों की देखभाल हमारे लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है।” एमवायएच में आठ माह बाद टंकियों की सफाई एमवाय अस्पताल में उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार पानी की टंकियों की पिछली सफाई 8 जनवरी को हुई थी। अब दोबारा टंकियों की सफाई शुरू की गई है। पानी स्टोर करने के लिए बना संप वेल कई जगह से ऊपर खुला हुआ है। आसपास कुत्ते भी घूमते हैं। भास्कर एक्सपर्ट – सुरेश कुमार , एनएबीएल ऑडिटर आरओ लगा होना काफी नहीं नियमित मेंटेनेंस जरूरी वरिष्ठ एनएबीएल ऑडिटर सुरेश कुमार के अनुसार अस्पताल में आरओ प्लांट लगा होना ही पर्याप्त नहीं है। यदि आरओ के बावजूद पानी में ई-कोलाई और कोलीफॉर्म मिल रहे हैं तो फिल्टर और मेम्ब्रेन के रखरखाव पर ध्यान देना जरूरी है। पानी में बैक्टीरिया की वृद्धि रोकने के लिए यूवी डिसइंफेक्शन सिस्टम का सही तरीके से काम करना भी जरूरी है।

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