कानपुर के घाटमपुर में गुरुवार रात श्रीकृष्ण लीला के मंचन में पूतना वध का प्रसंग दिखाया गया। भगवान श्रीकृष्ण के हाथों पूतना का वध होते ही पुरानी बाजार जय श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंज उठी। श्रद्धालुओं ने भगवान के स्वरूप पर पुष्प वर्षा की। लीला देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। श्रीकृष्ण लीला कमेटी की ओर से आयोजित मंचन में कलाकारों ने भगवान की बाल लीलाओं का सजीव चित्रण किया। देर रात तक दर्शक धार्मिक प्रसंगों का आनंद लेते रहे। पूतना वध के बाद लीला में कंस की ओर से श्रीकृष्ण को मथुरा बुलाने के लिए दूत भेजने का प्रसंग भी दिखाया गया। कंस ने पूतना को गोकुल भेजा मंचन में दिखाया गया कि राजा कंस अपने दरबार में सेनापतियों के साथ श्रीकृष्ण को मारने की योजना बनाता है। विचार-विमर्श के बाद वह राक्षसी पूतना को गोकुल भेजने का फैसला करता है। रूप बदलने में माहिर पूतना सुंदर स्त्री का वेश धारण कर गोकुल पहुंचती है। श्रीकृष्ण ने किया राक्षसी का अंत लीला के अनुसार, नारद मुनि पहले ही श्रीकृष्ण और बलराम को पूतना की मंशा के बारे में बता देते हैं। गोकुल पहुंचने पर पूतना को सामान्य स्त्री समझकर मां यशोदा उसे नंद भवन ले जाती हैं। इसके बाद पूतना अपनी मायावी शक्ति से श्रीकृष्ण को आकाश में ले जाकर विष लगा दूध पिलाने की कोशिश करती है। इसी दौरान भगवान श्रीकृष्ण उसका अंत कर देते हैं। जयकारों से गूंजा लीला स्थल पूतना वध का दृश्य देखकर दर्शकों में उत्साह छा गया। श्रद्धालुओं ने जय श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए और पुष्प वर्षा की। इसके बाद कंस की ओर से दूतों के माध्यम से श्रीकृष्ण को मथुरा आने का निमंत्रण गोकुल भेजने का प्रसंग दिखाया गया। पूरे आयोजन के दौरान माहौल भक्तिमय बना रहा।

