भास्कर न्यूज | चाईबासा ग्रामीण संवेदक संघ अध्यक्ष सुनील सिरका ने प्रेस बयान जारी कर कहा है कि झारखंड सरकार की नई खनन नीति से ग्रामीण विकास ठप होने की कगार पर है। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार अपने खाली खजाने को भरने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पुलिया, स्कूल और पंचायत भवन बनाने वाले छोटे व मंझोले ठेकेदारों पर आर्थिक मार कर रही है। राहत देने के बजाय अव्यावहारिक कानून थोपे जा रहे हैं। इसे ग्रामीण संवेदक किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि अवैध या बिना चालान के खनिज उपयोग पर खनिज मूल्य और रॉयल्टी के दोगुने जुर्माने के साथ डीएमएफ, मैनेजमेंट फीस और सेस जोड़ने का प्रावधान ग्रामीण संवेदकों को दिवालिया कर देगा। इसे तुरंत वापस लेकर व्यावहारिक बनाया जाए। जब राज्य में पत्थर खदानों की लीज बंद है और बालू घाटों से वैध चालान मिल ही नहीं रहा है, तो ठेकेदार चालान कहां से लाएं? सरकार पहले पर्याप्त भंडारण और आपूर्ति सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में ईंट और मिट्टी पर 10 गुना राजस्व वसूली का नियम स्थानीय कुटीर उद्योग और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे ग्रामीण निर्माणों को पूरी तरह ठप कर देगा। यह नियम केवल नए टेंडरों पर लागू होना चाहिए। वर्तमान में चल रहे ग्रामीण विकास के पुराने प्रोजेक्ट्स को इस भारी-भरकम जुर्माने की परिधि से पूरी तरह बाहर रखा जाए। भास्कर न्यूज | चाईबासा ग्रामीण संवेदक संघ अध्यक्ष सुनील सिरका ने प्रेस बयान जारी कर कहा है कि झारखंड सरकार की नई खनन नीति से ग्रामीण विकास ठप होने की कगार पर है। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार अपने खाली खजाने को भरने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पुलिया, स्कूल और पंचायत भवन बनाने वाले छोटे व मंझोले ठेकेदारों पर आर्थिक मार कर रही है। राहत देने के बजाय अव्यावहारिक कानून थोपे जा रहे हैं। इसे ग्रामीण संवेदक किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि अवैध या बिना चालान के खनिज उपयोग पर खनिज मूल्य और रॉयल्टी के दोगुने जुर्माने के साथ डीएमएफ, मैनेजमेंट फीस और सेस जोड़ने का प्रावधान ग्रामीण संवेदकों को दिवालिया कर देगा। इसे तुरंत वापस लेकर व्यावहारिक बनाया जाए। जब राज्य में पत्थर खदानों की लीज बंद है और बालू घाटों से वैध चालान मिल ही नहीं रहा है, तो ठेकेदार चालान कहां से लाएं? सरकार पहले पर्याप्त भंडारण और आपूर्ति सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में ईंट और मिट्टी पर 10 गुना राजस्व वसूली का नियम स्थानीय कुटीर उद्योग और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे ग्रामीण निर्माणों को पूरी तरह ठप कर देगा। यह नियम केवल नए टेंडरों पर लागू होना चाहिए। वर्तमान में चल रहे ग्रामीण विकास के पुराने प्रोजेक्ट्स को इस भारी-भरकम जुर्माने की परिधि से पूरी तरह बाहर रखा जाए।

