‘गोकुल’ में हार के बाद MLC चुनाव को लेकर सीएम फडणवीस हुए अलर्ट, नाराज शिवसेना मंत्री को किया फोन

‘गोकुल’ में हार के बाद MLC चुनाव को लेकर सीएम फडणवीस हुए अलर्ट, नाराज शिवसेना मंत्री को किया फोन

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में कोल्हापुर के गोकुल दूध संघ चुनाव में भाजपा (BJP) नीत महायुति गठबंधन को मिली हार के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस विधायक सतेज पाटिल के नेतृत्व वाले समविचारी आघाड़ी पैनल ने 25 में से 13 सीटों पर जीत दर्ज कर सत्ता हासिल की, जबकि सत्तारूढ़ महायुति के खाते में 12 सीटें आईं। इस नतीजे के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुणे शिक्षक और पदवीधर निर्वाचन क्षेत्रों के एमएलसी चुनाव को लेकर गठबंधन के भीतर जारी नाराजगी दूर करने की पहल की है। सातारा में शिवसेना (शिंदे गुट) के वरिष्ठ नेता और मंत्री शंभूराज देसाई को फोन कर उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में जिले में महायुति के सहयोगियों के बीच विवाद नहीं होने दिया जाएगा।

गोकुल चुनाव में हार से महायुति को झटका

कोल्हापुर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ यानी गोकुल दूध संघ का चुनाव इस बार महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बना रहा। चुनाव के दौरान गठबंधन के भीतर मतभेद, नाराजगी, सीट बंटवारे को लेकर खींचतान और आखिरी समय में हुए राजनीतिक समीकरणों ने मुकाबले को प्रतिष्ठा की लड़ाई बना दिया था।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस समेत महायुति के वरिष्ठ नेताओं का ध्यान इस चुनाव पर था। गठबंधन के तीन मंत्री, दो सांसद और 10 विधायकों की मजबूत फौज मैदान में होने के बावजूद उसे सत्ता गंवानी पड़ी। कांग्रेस विधायक सतेज पाटिल के नेतृत्व वाले पैनल ने 13 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया, जबकि महायुति के उम्मीदवार 12 सीटों पर विजयी रहे।

इस चुनाव में उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार नीत एनसीपी के कद्दावर नेता व कैबिनेट मंत्री हसन मुश्रीफ के बेटे और गोकुल के मौजूदा अध्यक्ष नाविद मुश्रीफ को भी हार का सामना करना पड़ा। इसे कोल्हापुर में मुश्रीफ परिवार के राजनीतिक प्रभाव के लिहाज से भी अहम झटका माना जा रहा है।

हसन मुश्रीफ ने बताई महायुति की हार की वजह

गोकुल चुनाव के नतीजों के बाद हसन मुश्रीफ ने अपनी पहली प्रतिक्रिया में महायुति के भीतर जारी खींचतान की ओर इशारा किया। उनके मुताबिक, चुनाव के आखिरी समय तक गठबंधन में विवाद होते रहे और बाद में गठबंधन की स्थिति बनी। संभव है कि मतदाताओं को यह राजनीतिक घटनाक्रम पसंद नहीं आया हो।

उनकी इस टिप्पणी से गठबंधन के भीतर समन्वय और सहयोगियों के बीच तालमेल को लेकर सवाल फिर उठने लगे हैं। गोकुल चुनाव की हार के बाद अब महायुति के सामने आगामी चुनावों में एकजुटता बनाए रखने की चुनौती है।

पुणे स्नातक चुनाव को लेकर सातारा में बढ़ी नाराजगी

गोकुल चुनाव के बाद भाजपा ने पुणे शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में महायुति के उम्मीदवारों के समर्थन को लेकर गठबंधन के भीतर मतभेद दूर करने की कोशिश तेज की है। सातारा में जिला परिषद अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर पहले ही विवाद हो चुका था। अब पुणे शिक्षक और स्नातक चुनाव को लेकर भी सहयोगी दलों के बीच नाराजगी सामने आई। इस निर्वाचन क्षेत्र में पुणे, सातारा, सांगली, कोल्हापुर और सोलापुर जिले शामिल हैं।

पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की उम्मीदवार डॉ. स्मिता जाधव को शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) की ओर से समर्थन का औपचारिक ऐलान नहीं हुआ था। इसी बीच, सातारा दौरे के पहले दिन स्मिता जाधव ने मंत्री शंभूराज देसाई से मुलाकात नहीं की थी। इससे देसाई ने अपनी नाराजगी जाहिर की थी। बाद में जाधव उनके निवास पर पहुंचीं, लेकिन शिवसेना के समर्थन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई थी।

फडणवीस ने शंभूराज देसाई को फोन कर दिया भरोसा

मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएम फडणवीस को खुद हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने शंभूराज देसाई को फोन कर भरोसा दिया कि सातारा में भविष्य में महायुति के सहयोगियों के बीच किसी तरह का विवाद न हो, इसकी जिम्मेदारी वह लेंगे।

मुख्यमंत्री के फोन के बाद मंगलवार को सातारा में शिवसेना का कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित हुआ। जिसमें शंभूराज देसाई ने अपने भाषण के दौरान सातारा जिला परिषद और आगामी जिला बैंक चुनाव समेत कई मुद्दों पर नाराजगी व्यक्त की।

हालांकि, इसके बावजूद उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से भाजपा प्रत्याशी डॉ. स्मिता जाधव को जिताने की अपील की। मुख्यमंत्री की मध्यस्थता के बाद शिवसेना की ओर से उनके समर्थन में यह राजनीतिक संदेश अहम माना जा रहा है।

हालांकि पुणे शिक्षक सीट पर भाजपा (BJP) और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के अलग-अलग उम्मीदवार मैदान में हैं, जिस वजह से सत्तारूढ़ महायुति के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। भाजपा ने यहां से कौस्तुभ गावडे को आधिकारिक उम्मीदवार बनाया है, जबकि शिंदे की शिवसेना ने निर्दलीय उम्मीदवार और प्रोफेसर सचिन सानप को समर्थन देने की घोषणा की है। ऐसे में अब मुख्यमंत्री फडणवीस की पहल के बाद महायुति के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि सहयोगी दलों के बीच मतभेद दूर कर एकजुटता कायम रखी जाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *