गुमला में हाथियों ने मचाई तबाही, एक बुजुर्ग को कुचला:भरनो, डुमरी और कामडरा में घरों-फसलों को नुकसान; दहशत में ग्रामीण

गुमला में हाथियों ने मचाई तबाही, एक बुजुर्ग को कुचला:भरनो, डुमरी और कामडरा में घरों-फसलों को नुकसान; दहशत में ग्रामीण

गुमला जिले के भरनो, डुमरी और कामडरा प्रखंडों के कई गांवों में पिछले 15 दिनों से जंगली हाथियों का आतंक है। करीब आधा दर्जन हाथियों ने किसानों के घरों को तोड़ा है और सैकड़ों एकड़ फसलों को रौंदकर बर्बाद कर दिया है। ग्रामीण हाथियों के आतंक से बहुत परेशान हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि हाथी दिन में जंगल में रहते हैं, लेकिन रात होते ही गांवों में घुस आते हैं। इस वजह से ग्रामीण डर के साए में जी रहे हैं। उन्हें रातभर जागकर मशाल जलाकर हाथियों को भगाना पड़ता है। ग्रामीणों को अपने बच्चों और परिवार की सुरक्षा की चिंता सता रही है। तीन महीने पहले ही पहुंचा हाथियों का झुंड ग्रामीणों के मुताबिक, जंगली हाथियों का झुंड हर साल धान पकने के बाद नवंबर-दिसंबर में आता है और नुकसान पहुंचाता है। लेकिन इस साल वे तीन महीने पहले ही पहुंच गए हैं। भरनो के अमलिया-रायकेरा इलाके में हाथियों का झुंड कई दिनों से डेरा डाले हुए है, जिससे ग्रामीण दहशत में हैं। एक हफ्ते पहले महूगांव टंगरा टोली में एक जंगली हाथी ने 65 साल के शनि उरांव को कुचलकर मार डाला था, जब वे शौच के लिए निकले थे। इससे पहले भी घरों के टूटने और बच्चों के घायल होने की घटनाएं हुई हैं। हाथियों ने कई घरों की दीवारें तोड़ दी हाथी रात में गांवों और खेतों में घुसकर मकई और धान जैसी खड़ी फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। डुमरी प्रखंड के बेरी गांव के सेमिनार जंगल में तीन जंगली हाथियों ने डेरा डाल रखा है, जिससे ग्रामीणों में डर का माहौल है। कामडरा के मुरूमकेला, रेडवा, सरिता और आसपास के गांवों में भी हाथियों ने कई घरों की दीवारें तोड़ दी हैं और अनाज व दूसरा सामान नष्ट कर दिया है। वनरक्षक अखिल अहमद ने बताया अमलीया-रायकेरा जंगल में दो हाथियों की दस्तक,वन विभाग ने लाउडस्पीकर से ग्रामीणों को किया सतर्क,खेतों में लगी धान की फसल को पहुंचा रहे नुकसान,रात में जंगल मार्ग से गुजरने वाले ग्रामीणों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। ग्रामीणों के बीच पटाखा और मसाल के भी वितरण किए गए हैं। जंगली हाथी को छेड़छाड़ नहीं करने की अपील की। गुमला जिले के भरनो, डुमरी और कामडरा प्रखंडों के कई गांवों में पिछले 15 दिनों से जंगली हाथियों का आतंक है। करीब आधा दर्जन हाथियों ने किसानों के घरों को तोड़ा है और सैकड़ों एकड़ फसलों को रौंदकर बर्बाद कर दिया है। ग्रामीण हाथियों के आतंक से बहुत परेशान हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि हाथी दिन में जंगल में रहते हैं, लेकिन रात होते ही गांवों में घुस आते हैं। इस वजह से ग्रामीण डर के साए में जी रहे हैं। उन्हें रातभर जागकर मशाल जलाकर हाथियों को भगाना पड़ता है। ग्रामीणों को अपने बच्चों और परिवार की सुरक्षा की चिंता सता रही है। तीन महीने पहले ही पहुंचा हाथियों का झुंड ग्रामीणों के मुताबिक, जंगली हाथियों का झुंड हर साल धान पकने के बाद नवंबर-दिसंबर में आता है और नुकसान पहुंचाता है। लेकिन इस साल वे तीन महीने पहले ही पहुंच गए हैं। भरनो के अमलिया-रायकेरा इलाके में हाथियों का झुंड कई दिनों से डेरा डाले हुए है, जिससे ग्रामीण दहशत में हैं। एक हफ्ते पहले महूगांव टंगरा टोली में एक जंगली हाथी ने 65 साल के शनि उरांव को कुचलकर मार डाला था, जब वे शौच के लिए निकले थे। इससे पहले भी घरों के टूटने और बच्चों के घायल होने की घटनाएं हुई हैं। हाथियों ने कई घरों की दीवारें तोड़ दी हाथी रात में गांवों और खेतों में घुसकर मकई और धान जैसी खड़ी फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। डुमरी प्रखंड के बेरी गांव के सेमिनार जंगल में तीन जंगली हाथियों ने डेरा डाल रखा है, जिससे ग्रामीणों में डर का माहौल है। कामडरा के मुरूमकेला, रेडवा, सरिता और आसपास के गांवों में भी हाथियों ने कई घरों की दीवारें तोड़ दी हैं और अनाज व दूसरा सामान नष्ट कर दिया है। वनरक्षक अखिल अहमद ने बताया अमलीया-रायकेरा जंगल में दो हाथियों की दस्तक,वन विभाग ने लाउडस्पीकर से ग्रामीणों को किया सतर्क,खेतों में लगी धान की फसल को पहुंचा रहे नुकसान,रात में जंगल मार्ग से गुजरने वाले ग्रामीणों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। ग्रामीणों के बीच पटाखा और मसाल के भी वितरण किए गए हैं। जंगली हाथी को छेड़छाड़ नहीं करने की अपील की।  

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