गाजियाबाद में यशोदा मेडिसिटी ने इंडियन सोसाइटी फॉर ट्रॉमा एंड एक्यूट केयर (ISTAC) के साथ मिलकर विश्व ट्रॉमा दिवस पर ट्रॉमा फर्स्ट रिस्पॉन्डर प्रोग्राम का आयोजन किया। इसका उद्देश्य समुदाय के लोगों को प्राथमिक सहायता से जुड़ी जरूरी जानकारी और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग देना है। ताकि वे मेडिकल टीम के पहुंचने से पहले घायल लोगों की मदद कर सकें। इस कार्यक्रम में रविवाद को करीब 100 लोगों ने हिस्सा लिया, जिनमें पुलिसकर्मी, मौके पर सबसे पहले पहुंचने वाले अन्य लोग, समुदाय के सदस्य और अलग-अलग क्षेत्रों के लोग शामिल रहे। आपात स्थिति के बारे में भी ट्रेनिंग कार्यक्रम में ट्रॉमा, चोटों से बचाव और प्राथमिक सहायता देने से जुड़ी जानकारी के लिए इंटरैक्टिव लेक्चर और वीडियो के जरिए ट्रेनिंग दी गई। इसके बाद तीन अलग-अलग स्किल स्टेशन पर प्रैक्टिकल ट्रेनिंग हुई। इसमें घटनास्थल को सुरक्षित रखना, मदद के लिए फोन करना, सांस की नली और सांस लेने की प्रक्रिया को संभालना, शरीर में खून के बहाव को बनाए रखना और ज्यादा खून बहने को रोकना शामिल था। घायलों को सुरक्षित तरीके से ले जाने और वाहन में फंसे लोगों को बाहर निकालने के तरीके भी सिखाए गए। प्रतिभागियों ने अलग-अलग आपात स्थितियों पर आधारित टीम ट्रेनिंग और मॉक ड्रिल में भी हिस्सा लिया, ताकि वे ऐसी परिस्थितियों में सही तरीके से मदद करना सीख सकें। आसपास के लोग सबसे पहले पहुंचते हैं ट्रॉमा से जुड़ी आपात स्थिति में अक्सर आसपास मौजूद लोग ही घायल व्यक्ति तक सबसे पहले पहुंचते हैं। हालांकि, कई बार उन्हें सही तरीके से मदद करने की जानकारी या आत्मविश्वास नहीं होता। इस कार्यक्रम के जरिए इस कमी को दूर करने की कोशिश की गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि घायल व्यक्ति की सुरक्षित तरीके से मदद कैसे करें, तुरंत पैदा होने वाले खतरों से कैसे निपटें और प्रशिक्षित मेडिकल टीम के पहुंचने तक शुरुआती सहायता कैसे दें। यशोदा ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ पीएन अरोड़ा ने कहा- आपातकालीन स्थितियों में बेहतर मदद पहुंचाने के लिए समुदाय के लोगों में जागरूकता और तैयारी बहुत जरूरी है। ISTAC के साथ इस पहल के जरिए हमारा उद्देश्य लोगों को ट्रॉमा से जुड़ी आपात स्थितियों में जिम्मेदारी के साथ कदम उठाने की जानकारी देना और अस्पतालों से बाहर भी इस बारे में जागरूकता बढ़ाना है। एक एक मिनट बहुत कीमती यशोदा इंस्टीट्यूट ऑफ इमरजेंसी मेडिसिन एंड ट्रॉमा केयर के डायरेक्टर व हेड डॉ. संदीप जैन ने कहा- ट्रॉमा से जुड़ी आपात स्थिति में शुरुआती एक एक मिनट बहुत कीमती होता है। स्थिति को सुरक्षित तरीके से समझना, मदद के लिए फोन करना और खून बहने को रोकना सीखने से मेडिकल टीम के पहुंचने से पहले काफी फर्क पड़ सकता है। इस कार्यक्रम में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के महत्व पर जोर दिया गया। जहां मौजूद लोगों और मौके पर सबसे पहले पहुंचने वाले लोगों को यह समझने में मदद मिली कि पेशेवर मेडिकल सहायता का इंतजार करते समय ट्रॉमा से जुड़ी आपात स्थितियों में घायल व्यक्ति की मदद कैसे की जा सकती है। सड़क दुघर्टनााओं पर एक नजर केंद्र सरकार की ओर से जुलाई 2026 में लोकसभा में दिए गए लिखित जवाब के अनुसार, भारत में 2025 में सड़क दुर्घटनाओं में 1,83,382 लोगों की मौत हुई, जो पिछले साल की तुलना में 3.5% अधिक थी। सड़क दुर्घटनाएं ट्रॉमा से जुड़ी समस्याओं का केवल एक हिस्सा हैं, लेकिन ये आंकड़े समय पर मदद पहुंचाने और आपात स्थितियों के लिए तैयार रहने के महत्व को दिखाते हैं।

