आजकल बच्चों के जन्म की तारीख को लेकर अभिभावकों में भी खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। कई दंपती चाहते हैं कि उनके बच्चे का जन्म किसी खास दिन हो। इसके चलते 15 अगस्त, जन्माष्टमी और अन्य विशेष अवसरों पर डिलीवरी की तारीख पहले से तय कराने का चलन बढ़ रहा है। कई गर्भवती महिलाएं डॉक्टरों से अनुरोध कर रही हैं कि यदि सी-सेक्शन की जरूरत हो तो उसे किसी विशेष दिन पर किया जाए। मेरठ में गाइनकोलॉजिस्ट एवं इनफर्टिलिटी स्पेशलिस्ट डॉ. तनवी पुरी मलिक के अनुसार, पिछले कुछ समय से उनके पास भी ऐसे केस की संख्या बढ़ती जा रही है , जिनमें गर्भवती महिलाएं विशेष तारीख पर बच्चे की डिलीवरी कराने की इच्छा जताती हैं। कुछ मरीज 15 अगस्त को बच्चे का जन्म चाहते हैं तो कुछ जन्माष्टमी, रक्षाबंधन जैसे धार्मिक अवसर को इसके लिए चुन रहे हैं। डॉ. तनवी पुरी मलिक ने बताया कि कई मरीज अपनी डिलीवरी की संभावित तारीख के आसपास पहले से ही कोई खास दिन चुन लेते हैं। उनका कहना है कि अगर मरीज की स्थिति ऐसी है कि सी-सेक्शन चिकित्सकीय रूप से जरूरी है, तो निर्धारित तारीख पर ऑपरेशन किया जा सकता है। लेकिन केवल किसी खास तारीख के लिए सामान्य डिलीवरी को सी-सेक्शन में बदलना उचित नहीं है। 37 से 40 सप्ताह तक का समय महत्वपूर्ण डॉक्टर के मुताबिक गर्भावस्था में 37 सप्ताह के बाद डिलीवरी किसी भी समय हो सकती है, जबकि सामान्य तौर पर 40 सप्ताह को गर्भावस्था की आदर्श अवधि माना जाता है। ऐसे में मरीजों को संभावित डिलीवरी की अवधि समझाई जाती है। इसके बावजूद कुछ महिलाएं अपनी पसंद की तारीख चुनने का आग्रह करती हैं। सामान्य डिलीवरी संभव हो तो सी-सेक्शन से बचें डॉक्टर का कहना है कि यदि गर्भवती महिला की सामान्य डिलीवरी संभव है और मां-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं, तो केवल तारीख की पसंद के कारण सी-सेक्शन कराने से बचना चाहिए। सी-सेक्शन एक बड़ी सर्जरी है और इसे चिकित्सकीय आवश्यकता होने पर ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन मरीजों में सी-सेक्शन की स्पष्ट जरूरत है, वे अपनी सुविधानुसार तारीख को लेकर डॉक्टर से चर्चा कर सकते हैं। लेकिन सामान्य डिलीवरी की संभावना होने पर केवल किसी विशेष दिन को यादगार बनाने के लिए ऑपरेशन कराने की सलाह नहीं दी जाती। ‘फैशन नहीं, मां और बच्चे की सेहत जरूरी’ डॉ. तनवी पुरी मलिक ने कहा कि विशेष तारीख पर बच्चे के जन्म की इच्छा स्वाभाविक है, लेकिन डिलीवरी की तारीख तय करने में सबसे महत्वपूर्ण बात मां और बच्चे की सुरक्षा होनी चाहिए। उन्होंने मरीजों से अपील की कि किसी तारीख को यादगार बनाने के बजाय सुरक्षित प्रसव को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि कोशिश यही रहती है कि मां स्वस्थ रहे और बच्चा स्वस्थ पैदा हो। यदि सामान्य डिलीवरी की संभावना है तो उसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए और जहां चिकित्सकीय रूप से सी-सेक्शन जरूरी हो, वहां डॉक्टर की सलाह के अनुसार ऑपरेशन कराया जाना चाहिए।


