गया के मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बायोमेडिकल कचरे के निपटान में लापरवाही का मामला सामने आया है। अस्पताल से निकलने वाले मेडिकल कचरे को निर्धारित प्रक्रिया के तहत निपटाने के बजाय परिसर में ही गड्ढे खोदकर जमीन में दबाए जाने की जानकारी मिली है। बताया जा रहा है कि पिछले कई महीनों में 10 से ज्यादा जगहों पर गड्ढे खोदकर मेडिकल कचरा दबाया गया है। वहीं, अस्पताल से निकलने वाले कुल कचरे का करीब आधा हिस्सा ही निर्धारित प्लांट तक पहुंचने की बात सामने आई है। मामले के बाद अस्पताल की कचरा प्रबंधन व्यवस्था और निजी एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। सामान्य और मेडिकल कचरा एक साथ रखने की बात अस्पताल में सामान्य और बायोमेडिकल कचरे को अलग-अलग रखना जरूरी है। इसके लिए अलग-अलग डस्टबिन की व्यवस्था होनी चाहिए। लेकिन मगध मेडिकल अस्पताल में दोनों तरह का कचरा एक साथ मिलाए जाने की बात सामने आई है। इससे मेडिकल कचरे के सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था प्रभावित हो रही है। निगम ने मिश्रित कचरा उठाने से किया इनकार नगर निगम ने सामान्य कचरे में बायोमेडिकल वेस्ट मिलने के बाद उसे उठाने से इनकार कर दिया है। निगम के सहायक लोक स्वास्थ्य पदाधिकारी शुभम कुमार ने कहा कि निगम किसी भी स्थिति में मेडिकल वेस्ट नहीं उठा सकता। अगर निगम के कचरे में मेडिकल वेस्ट मिला हुआ पाया जाता है तो संबंधित अस्पताल पर पांच लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। निगम के कचरा उठाने से इनकार के बाद अस्पताल परिसर में ही कचरा दबाए जाने की बात सामने आई है। सफाई का काम संभाल रही निजी एजेंसी ने जेसीबी की मदद से परिसर में कई जगह गड्ढे खुदवाकर मेडिकल कचरा जमीन में दबाया है। प्लांट तक पहुंच रहा करीब आधा कचरा मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर में मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए सिनर्जी प्लांट मौजूद है। प्लांट के स्थानीय प्रतिनिधि के अनुसार अस्पताल से पहुंचने वाले कचरे में अक्सर सामान्य और मेडिकल कचरा मिला हुआ रहता है। इससे मशीनों के संचालन में परेशानी होती है और कई बार मशीन खराब होने की स्थिति भी सामने आई है। प्रतिनिधि के अनुसार अस्पताल से निकलने वाले कुल कचरे का बमुश्किल आधा हिस्सा ही प्लांट तक पहुंच रहा है। बाकी कचरे को अस्पताल परिसर में अलग-अलग जगहों पर जमीन में दबाए जाने की बात कही गई है। हालांकि, इस पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। जमीन में दबे मेडिकल वेस्ट से प्रदूषण का खतरा मेडिकल कचरे में इस्तेमाल की गई पट्टियां, संक्रमित सामग्री, पुराने मेडिकल सामान, एक्सपायरी दवाइयां और दूसरे जैव-चिकित्सकीय अपशिष्ट शामिल हो सकते हैं। ऐसे कचरे को सामान्य कचरे के साथ मिलाना या निर्धारित प्रक्रिया के बिना जमीन में दबाना स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए खतरा पैदा कर सकता है। बिना निर्धारित प्रक्रिया के जमीन में दबाए गए मेडिकल वेस्ट से मिट्टी और भूजल के प्रदूषित होने का खतरा रहता है। ऐसे में अस्पताल परिसर में दबाए गए कचरे की जांच और उसके सुरक्षित निस्तारण को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पार्षद ने आंदोलन की चेतावनी दी वार्ड नंबर 29 के पार्षद रणधीर कुमार गौतम उर्फ रणधीर रजक ने मामले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि अस्पताल परिसर में पुराने मेडिकल सामान, इस्तेमाल की गई पट्टियां, एक्सपायरी दवाइयां और अन्य मेडिकल वेस्ट को गड्ढा खोदकर जमीन में दबाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वह सोमवार को मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. प्रवीण कुमार अग्रवाल से मुलाकात कर मामले की जानकारी देंगे और व्यवस्था में सुधार की मांग करेंगे। पार्षद ने कहा कि अगर जल्द व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई तो वह मोहल्लेवासियों के साथ आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा कि मगध मेडिकल गरीबों के इलाज का प्रमुख केंद्र है और यहां इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अस्पताल प्रबंधन ने निजी एजेंसी पर डाली जिम्मेदारी मगध मेडिकल कॉलेज के उपाधीक्षक डॉ. प्रवीण कुमार अग्रवाल ने कहा कि अस्पताल प्रशासन की ओर से मेडिकल कचरे को जमीन में दबाने का कोई आदेश नहीं दिया गया है। अस्पताल की सफाई और कचरा निस्तारण की पूरी जिम्मेदारी निजी एजेंसी की है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी। अगर जांच में प्रदूषण को बढ़ावा देने या नियमों की अनदेखी की बात सामने आती है तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मुख्य सवाल यही है कि अस्पताल से निकलने वाले मेडिकल कचरे का कितना हिस्सा निर्धारित प्लांट तक पहुंच रहा है और परिसर में जमीन के नीचे दबाए गए कचरे की वास्तविक मात्रा कितनी है। इसकी जांच के बाद ही स्थिति साफ होगी। गया के मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बायोमेडिकल कचरे के निपटान में लापरवाही का मामला सामने आया है। अस्पताल से निकलने वाले मेडिकल कचरे को निर्धारित प्रक्रिया के तहत निपटाने के बजाय परिसर में ही गड्ढे खोदकर जमीन में दबाए जाने की जानकारी मिली है। बताया जा रहा है कि पिछले कई महीनों में 10 से ज्यादा जगहों पर गड्ढे खोदकर मेडिकल कचरा दबाया गया है। वहीं, अस्पताल से निकलने वाले कुल कचरे का करीब आधा हिस्सा ही निर्धारित प्लांट तक पहुंचने की बात सामने आई है। मामले के बाद अस्पताल की कचरा प्रबंधन व्यवस्था और निजी एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। सामान्य और मेडिकल कचरा एक साथ रखने की बात अस्पताल में सामान्य और बायोमेडिकल कचरे को अलग-अलग रखना जरूरी है। इसके लिए अलग-अलग डस्टबिन की व्यवस्था होनी चाहिए। लेकिन मगध मेडिकल अस्पताल में दोनों तरह का कचरा एक साथ मिलाए जाने की बात सामने आई है। इससे मेडिकल कचरे के सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था प्रभावित हो रही है। निगम ने मिश्रित कचरा उठाने से किया इनकार नगर निगम ने सामान्य कचरे में बायोमेडिकल वेस्ट मिलने के बाद उसे उठाने से इनकार कर दिया है। निगम के सहायक लोक स्वास्थ्य पदाधिकारी शुभम कुमार ने कहा कि निगम किसी भी स्थिति में मेडिकल वेस्ट नहीं उठा सकता। अगर निगम के कचरे में मेडिकल वेस्ट मिला हुआ पाया जाता है तो संबंधित अस्पताल पर पांच लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। निगम के कचरा उठाने से इनकार के बाद अस्पताल परिसर में ही कचरा दबाए जाने की बात सामने आई है। सफाई का काम संभाल रही निजी एजेंसी ने जेसीबी की मदद से परिसर में कई जगह गड्ढे खुदवाकर मेडिकल कचरा जमीन में दबाया है। प्लांट तक पहुंच रहा करीब आधा कचरा मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर में मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए सिनर्जी प्लांट मौजूद है। प्लांट के स्थानीय प्रतिनिधि के अनुसार अस्पताल से पहुंचने वाले कचरे में अक्सर सामान्य और मेडिकल कचरा मिला हुआ रहता है। इससे मशीनों के संचालन में परेशानी होती है और कई बार मशीन खराब होने की स्थिति भी सामने आई है। प्रतिनिधि के अनुसार अस्पताल से निकलने वाले कुल कचरे का बमुश्किल आधा हिस्सा ही प्लांट तक पहुंच रहा है। बाकी कचरे को अस्पताल परिसर में अलग-अलग जगहों पर जमीन में दबाए जाने की बात कही गई है। हालांकि, इस पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। जमीन में दबे मेडिकल वेस्ट से प्रदूषण का खतरा मेडिकल कचरे में इस्तेमाल की गई पट्टियां, संक्रमित सामग्री, पुराने मेडिकल सामान, एक्सपायरी दवाइयां और दूसरे जैव-चिकित्सकीय अपशिष्ट शामिल हो सकते हैं। ऐसे कचरे को सामान्य कचरे के साथ मिलाना या निर्धारित प्रक्रिया के बिना जमीन में दबाना स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए खतरा पैदा कर सकता है। बिना निर्धारित प्रक्रिया के जमीन में दबाए गए मेडिकल वेस्ट से मिट्टी और भूजल के प्रदूषित होने का खतरा रहता है। ऐसे में अस्पताल परिसर में दबाए गए कचरे की जांच और उसके सुरक्षित निस्तारण को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पार्षद ने आंदोलन की चेतावनी दी वार्ड नंबर 29 के पार्षद रणधीर कुमार गौतम उर्फ रणधीर रजक ने मामले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि अस्पताल परिसर में पुराने मेडिकल सामान, इस्तेमाल की गई पट्टियां, एक्सपायरी दवाइयां और अन्य मेडिकल वेस्ट को गड्ढा खोदकर जमीन में दबाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वह सोमवार को मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. प्रवीण कुमार अग्रवाल से मुलाकात कर मामले की जानकारी देंगे और व्यवस्था में सुधार की मांग करेंगे। पार्षद ने कहा कि अगर जल्द व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई तो वह मोहल्लेवासियों के साथ आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा कि मगध मेडिकल गरीबों के इलाज का प्रमुख केंद्र है और यहां इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अस्पताल प्रबंधन ने निजी एजेंसी पर डाली जिम्मेदारी मगध मेडिकल कॉलेज के उपाधीक्षक डॉ. प्रवीण कुमार अग्रवाल ने कहा कि अस्पताल प्रशासन की ओर से मेडिकल कचरे को जमीन में दबाने का कोई आदेश नहीं दिया गया है। अस्पताल की सफाई और कचरा निस्तारण की पूरी जिम्मेदारी निजी एजेंसी की है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी। अगर जांच में प्रदूषण को बढ़ावा देने या नियमों की अनदेखी की बात सामने आती है तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मुख्य सवाल यही है कि अस्पताल से निकलने वाले मेडिकल कचरे का कितना हिस्सा निर्धारित प्लांट तक पहुंच रहा है और परिसर में जमीन के नीचे दबाए गए कचरे की वास्तविक मात्रा कितनी है। इसकी जांच के बाद ही स्थिति साफ होगी।

