गयाजी के गांधी मैदान में महाअष्टमी पर भव्य आयोजन किया जा रहा है। सेवा भारती संस्था की ओर से कन्या पूजन महोत्सव का आयोजन हो रहा है। जिसमें 2100 कन्याओं का पूजन होगा। इसका मकसद बेटियों का सम्मान और सामाजिक समरसता का संदेश देना है। इस कार्यक्रम में नागालैंड के राज्यपाल नंद किशोर यादव आएंगे। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ करेंगे। करीब 1 घंटे तक महोतस्व में रुकेंगे। इस मौके पर बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार भी मौजूद रहेंगे। नौ साल से हो रहा कन्या पूजन का आयोजन सेवा भारती पिछले नौ वर्षों से गया जी में कन्या पूजन का आयोजन कर रही है। पिछले वर्ष 1100 कन्याओं का पूजन किया गया था। इस बार 2100 कन्याओं को शामिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। आयोजकों का कहना है कि समाज के लोगों के सहयोग और कार्यकर्ताओं के समर्पण से इस कार्यक्रम का विस्तार हो रहा है। संस्था सेवा बस्तियों में रहने वाले वंचित परिवारों के बीच संस्कार, शिक्षा और स्वावलंबन की भावना विकसित करने के लिए विभिन्न गतिविधियां संचालित करती है। कन्या पूजन महोत्सव भी इसी प्रयास का हिस्सा है। इसके जरिए बालिकाओं के प्रति सम्मान बढ़ाने, परिवारों के बीच आत्मीयता कायम करने और सामाजिक सहभागिता को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया जाएगा। गयाजी के गांधी मैदान में महाअष्टमी पर भव्य आयोजन किया जा रहा है। सेवा भारती संस्था की ओर से कन्या पूजन महोत्सव का आयोजन हो रहा है। जिसमें 2100 कन्याओं का पूजन होगा। इसका मकसद बेटियों का सम्मान और सामाजिक समरसता का संदेश देना है। इस कार्यक्रम में नागालैंड के राज्यपाल नंद किशोर यादव आएंगे। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ करेंगे। करीब 1 घंटे तक महोतस्व में रुकेंगे। इस मौके पर बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार भी मौजूद रहेंगे। नौ साल से हो रहा कन्या पूजन का आयोजन सेवा भारती पिछले नौ वर्षों से गया जी में कन्या पूजन का आयोजन कर रही है। पिछले वर्ष 1100 कन्याओं का पूजन किया गया था। इस बार 2100 कन्याओं को शामिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। आयोजकों का कहना है कि समाज के लोगों के सहयोग और कार्यकर्ताओं के समर्पण से इस कार्यक्रम का विस्तार हो रहा है। संस्था सेवा बस्तियों में रहने वाले वंचित परिवारों के बीच संस्कार, शिक्षा और स्वावलंबन की भावना विकसित करने के लिए विभिन्न गतिविधियां संचालित करती है। कन्या पूजन महोत्सव भी इसी प्रयास का हिस्सा है। इसके जरिए बालिकाओं के प्रति सम्मान बढ़ाने, परिवारों के बीच आत्मीयता कायम करने और सामाजिक सहभागिता को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया जाएगा।

