गयाजी में पिंडदान के लिए पहुंचे अफ्रिकी श्रद्धालु:पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए किया तर्पण, कहा- गयाजी शांतिपूर्ण-पवित्र स्थान है

गयाजी में पिंडदान के लिए पहुंचे अफ्रिकी श्रद्धालु:पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए किया तर्पण, कहा- गयाजी शांतिपूर्ण-पवित्र स्थान है

गयाजी में बुधवार को अफ्रीका के घाना से 2 श्रद्धालु पहुंचे। उन्होंने अपने पूर्वजों की आत्म की शांति और मोझ के लिए पिंडदान-तर्पण किया। घाना से पहुंचे देवऋषि दास असमुआ ने गयाजी के आध्यात्मिक माहौल की काफी तारीफ की। कहा कि गयाजी बहुत शांतिपूर्ण और पवित्र स्थान है। यहां आकर पिंडदान करने से मन को शांति मिलती है। इसके अलावा कहा कि मैं सनातन धर्म से जुड़ा हूं। अफ्रीका में सनातन धर्म के बारे में लोगों को बताता हूं। वे लोग सोशल मीडिया के माध्यम से भी इसका प्रचार-प्रसार करते हैं। ​कुछ तस्वीरें… ‘हर साल मैं गयाजी आता हूं’ देवऋषि दास असमुआ ने बताया कि पितृपक्ष के मौके पर मैं हर साल गयाजी आता हूं। अफ्रीका से कई लोगों को भी पिंडदान के लिए लाता हूं। अगर आप अपने पूर्वजों का सम्मान नहीं करेंगे, तो आपको भी कभी सम्मान नहीं मिलेगा। आज हम जो भाषा और संस्कृति अपना रहे हैं, वह हमारे पूर्वजों की ही देन है। इसलिए उनका सम्मान करना बेहद जरूरी है। प्राचीन काल से ही भगवान श्रीराम और श्री चैतन्य महाप्रभु जैसे महान व्यक्तित्वों ने भी गयाजी आकर अपने पूर्वजों का श्राद्ध किया था। यहां आकर धार्मिक कार्य करना हमारे लिए सौभाग्य की बात है। पुलिस की सुरक्षा में रहे विदेशी ​घाना से आए पिंडदानियों की सुरक्षा में जिला पुलिस के अधिकारी और कर्मी तैनात रहे। विदेशी मेहमान का पिंडदान की वैदिक क्रिया पूर्ण होने और फिर पिंड को फल्गु में प्रवाहित करने तक जिला पुलिस ने ख्याल रखा। आचार्य लोकनाथ गौड़ ने बताया कि विदेशी पिंडदानी अभी और आने वाले हैं। वे भी पितरों का श्राद्ध करने के लिए आ रहे हैं। गयाजी में बुधवार को अफ्रीका के घाना से 2 श्रद्धालु पहुंचे। उन्होंने अपने पूर्वजों की आत्म की शांति और मोझ के लिए पिंडदान-तर्पण किया। घाना से पहुंचे देवऋषि दास असमुआ ने गयाजी के आध्यात्मिक माहौल की काफी तारीफ की। कहा कि गयाजी बहुत शांतिपूर्ण और पवित्र स्थान है। यहां आकर पिंडदान करने से मन को शांति मिलती है। इसके अलावा कहा कि मैं सनातन धर्म से जुड़ा हूं। अफ्रीका में सनातन धर्म के बारे में लोगों को बताता हूं। वे लोग सोशल मीडिया के माध्यम से भी इसका प्रचार-प्रसार करते हैं। ​कुछ तस्वीरें… ‘हर साल मैं गयाजी आता हूं’ देवऋषि दास असमुआ ने बताया कि पितृपक्ष के मौके पर मैं हर साल गयाजी आता हूं। अफ्रीका से कई लोगों को भी पिंडदान के लिए लाता हूं। अगर आप अपने पूर्वजों का सम्मान नहीं करेंगे, तो आपको भी कभी सम्मान नहीं मिलेगा। आज हम जो भाषा और संस्कृति अपना रहे हैं, वह हमारे पूर्वजों की ही देन है। इसलिए उनका सम्मान करना बेहद जरूरी है। प्राचीन काल से ही भगवान श्रीराम और श्री चैतन्य महाप्रभु जैसे महान व्यक्तित्वों ने भी गयाजी आकर अपने पूर्वजों का श्राद्ध किया था। यहां आकर धार्मिक कार्य करना हमारे लिए सौभाग्य की बात है। पुलिस की सुरक्षा में रहे विदेशी ​घाना से आए पिंडदानियों की सुरक्षा में जिला पुलिस के अधिकारी और कर्मी तैनात रहे। विदेशी मेहमान का पिंडदान की वैदिक क्रिया पूर्ण होने और फिर पिंड को फल्गु में प्रवाहित करने तक जिला पुलिस ने ख्याल रखा। आचार्य लोकनाथ गौड़ ने बताया कि विदेशी पिंडदानी अभी और आने वाले हैं। वे भी पितरों का श्राद्ध करने के लिए आ रहे हैं।  

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