गयाजी में 2 पंचायत रोजगार सेवकों की बर्खास्तगी के विरोध में बिहार राज्य पंचायत रोजगार सेवक संघ ने सोमवार को बैठक की। जो गांधी मैदान स्थित गांधी मंडप में हुई। बैठक की अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष देवबली कुमार और उपाध्यक्ष विपिन कुमार सिंह ने की। बैठक में जिले के पंचायत रोजगार सेवकों ने प्रशासन की कार्रवाई पर नाराजगी जताई है। उन्होंने बर्खास्त किए गए दोनों पंचायत रोजगार सेवकों की 2 दिनों के अंदर सेवा बहाली की मांग की। संघ के अध्यक्ष देवबली कुमार ने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय में बहाली नहीं हुई, तो आंदोलन शुरू किया जाएगा।
10 अगस्त को समीक्षा हुई थी 10 अगस्त को प्रधान सचिव, ग्रामीण विकास विभाग की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक हुई थी। इसमें गयाजी जिले में मनरेगा और अन्य ग्रामीण विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। योजनाओं की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई गई। इसके बाद जिले स्तर पर संबंधित पंचायतों में योजनाओं की प्रगति और ई-एमआर जारी करने की स्थिति की जांच की गई। जांच में पाया गया कि नीमचक बथानी प्रखंड की ग्राम पंचायत मई के पंचायत रोजगार सेवक विनय कुमार ने सक्रिय जॉब कार्डधारियों की संख्या के अनुसार सरकारी योजनाओं के लिए जरूरी ई-एमआर जारी नहीं किया। इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इसे लापरवाही और वरीय अधिकारियों के आदेश की अनदेखी मानते हुए विनय कुमार का अनुबंध समाप्त करने का आदेश दिया गया। ‘इतनी कठोर कार्रवाई उचित नहीं है’ संघ की ओर से जारी पत्र में बताया गया कि 14 अगस्त को जारी दो अलग-अलग पत्रों के माध्यम से जिले के दो पंचायत रोजगार सेवकों को बर्खास्त किया गया है। संघ का आरोप है कि बर्खास्तगी के लिए 25 मार्च 2022 के पत्र संख्या-196 को मुख्य आधार बनाया गया है। हालांकि, इस पत्र में कई प्रकार के शास्ति दंड का प्रावधान है। संघ का कहना है कि सेवा अवधि और मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इतनी कठोर कार्रवाई उचित नहीं है। संघ ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में ‘विकसित भारत- गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ योजना में कृषि क्षेत्र में काम होने के कारण इसे ‘लीन पीरियड’ माना गया है। ऐसे समय में काम की उपलब्धता कम होना स्वाभाविक है।
3 महीने से मानदेय का भुगतान नहीं संघ ने कहा कि जिले में पंचायत रोजगार सेवकों को करीब तीन महीने से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। कम मानदेय में काम करने वाले कर्मियों के सामने परिवार चलाने की गंभीर चुनौती है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से समस्याओं का समाधान करने के बजाय बर्खास्तगी की कार्रवाई करना कर्मचारियों के प्रति संवेदनहीन रवैया है। गयाजी में 2 पंचायत रोजगार सेवकों की बर्खास्तगी के विरोध में बिहार राज्य पंचायत रोजगार सेवक संघ ने सोमवार को बैठक की। जो गांधी मैदान स्थित गांधी मंडप में हुई। बैठक की अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष देवबली कुमार और उपाध्यक्ष विपिन कुमार सिंह ने की। बैठक में जिले के पंचायत रोजगार सेवकों ने प्रशासन की कार्रवाई पर नाराजगी जताई है। उन्होंने बर्खास्त किए गए दोनों पंचायत रोजगार सेवकों की 2 दिनों के अंदर सेवा बहाली की मांग की। संघ के अध्यक्ष देवबली कुमार ने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय में बहाली नहीं हुई, तो आंदोलन शुरू किया जाएगा।
10 अगस्त को समीक्षा हुई थी 10 अगस्त को प्रधान सचिव, ग्रामीण विकास विभाग की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक हुई थी। इसमें गयाजी जिले में मनरेगा और अन्य ग्रामीण विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। योजनाओं की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई गई। इसके बाद जिले स्तर पर संबंधित पंचायतों में योजनाओं की प्रगति और ई-एमआर जारी करने की स्थिति की जांच की गई। जांच में पाया गया कि नीमचक बथानी प्रखंड की ग्राम पंचायत मई के पंचायत रोजगार सेवक विनय कुमार ने सक्रिय जॉब कार्डधारियों की संख्या के अनुसार सरकारी योजनाओं के लिए जरूरी ई-एमआर जारी नहीं किया। इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इसे लापरवाही और वरीय अधिकारियों के आदेश की अनदेखी मानते हुए विनय कुमार का अनुबंध समाप्त करने का आदेश दिया गया। ‘इतनी कठोर कार्रवाई उचित नहीं है’ संघ की ओर से जारी पत्र में बताया गया कि 14 अगस्त को जारी दो अलग-अलग पत्रों के माध्यम से जिले के दो पंचायत रोजगार सेवकों को बर्खास्त किया गया है। संघ का आरोप है कि बर्खास्तगी के लिए 25 मार्च 2022 के पत्र संख्या-196 को मुख्य आधार बनाया गया है। हालांकि, इस पत्र में कई प्रकार के शास्ति दंड का प्रावधान है। संघ का कहना है कि सेवा अवधि और मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इतनी कठोर कार्रवाई उचित नहीं है। संघ ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में ‘विकसित भारत- गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ योजना में कृषि क्षेत्र में काम होने के कारण इसे ‘लीन पीरियड’ माना गया है। ऐसे समय में काम की उपलब्धता कम होना स्वाभाविक है।
3 महीने से मानदेय का भुगतान नहीं संघ ने कहा कि जिले में पंचायत रोजगार सेवकों को करीब तीन महीने से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। कम मानदेय में काम करने वाले कर्मियों के सामने परिवार चलाने की गंभीर चुनौती है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से समस्याओं का समाधान करने के बजाय बर्खास्तगी की कार्रवाई करना कर्मचारियों के प्रति संवेदनहीन रवैया है।

