गयाजी- देर रात पांच प्रतिमाओं का विसर्जन:संवेदनशील इलाके से पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में गुजरी; डीएम, एसएसपी, एसडीएम रहे मौजूद

गयाजी- देर रात पांच प्रतिमाओं का विसर्जन:संवेदनशील इलाके से पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में गुजरी; डीएम, एसएसपी, एसडीएम रहे मौजूद

दशहरा की रात। घड़ी में साढ़े 12 बज रहे थे। जामा मस्जिद के पास सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे। डीएम शशांक शुभंकर, एसएसपी सुशील कुमार और एसडीएम अनिल कुमार रमन समेत प्रशासन के अधिकारी मौके पर मौजूद थे। दूसरी ओर मां के भक्तों का उत्साह चरम पर था। ढोल-नगाड़ों की गूंज, जयकारे और सड़क पर मस्ती में नाचते श्रद्धालु। इसी माहौल के बीच शहर की पांच दुर्गा प्रतिमाओं को संवेदनशील जामा मस्जिद के पास से विसर्जन के लिए क्रॉस कराया गया। प्रतिमाएं एसएसबी, बिसेप, जिला पुलिस की बड़ी संख्या में मौजूदगी में निकाली गई। जामा मस्जिद की सड़क के दोनों ओर बैरिकेडिंग की गई थी और बैरिकेडिंग के एंड व बाहर फोर्स खड़े कर दिए गए थे ताकि प्रतिमाएं पूरी सुरक्षा के बीच जामा मस्जिद के पास से शांति पूर्वक निकाली जा सके। दुखहरणी मंदिर मोहल्ले, गोलपत्थर, तुतवाड़ी, नई गोदाम और झिलगंज की प्रतिमाएं इस रास्ते से गुजरीं। सभी प्रतिमाएं रात 9 बजे ही अपने-अपने पंडालों से निकल चुकी थीं। लेकिन भक्तों के उत्साह के कारण इन्हें दुखहरणी मंदिर तक पहुंचने में ही साढ़े 12 बज गए जबकि सभी प्रतिमाएं एक किलोमीटर के रेडियस के तहत पंडाल में स्थापित की गई थीं। मंदिर के गेट पर आरती, फिर आगे बढ़ा कारवां रात करीब 12 बजे दुखहरणी मंदिर के पुजारी ने मंदिर के गेट पर सभी प्रतिमाओं की आरती की। इसके बाद प्रतिमाएं जामा मस्जिद की ओर बढ़ीं। प्रशासन की कोशिश थी कि प्रतिमाएं निर्धारित रास्ते से आगे बढ़ती रहें। पुलिस अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता भी श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील करते रहे। लेकिन भक्तों का अंदाज अलग था। प्रतिमा को कंधे पर उठाते, कुछ कदम आगे बढ़ते और फिर सड़क पर रख देते। इसके बाद ढोल-नगाड़ों की धुन पर जयकारे गूंजने लगते। कभी श्रद्धालु सड़क पर बैठकर जयकारे लगाते तो कभी खड़े होकर जमकर नाचते। इस दौरान पूरा इलाका मां के जयकारों से गूंजता रहा। प्रशासन की निगरानी में संवेदनशील इलाका गुजरा जामा मस्जिद के पास संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। डीएम और एसएसपी खुद मौके पर मौजूद रहे। एसडीएम अनिल कुमार रमन समेत अन्य अधिकारी भी लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए थे। पुलिस प्रशासन ने प्रतिमाओं को आगे बढ़ाने के लिए काफी मशक्कत की। समाजसेवियों ने भी श्रद्धालुओं से सहयोग कर जुलूस आगे बढ़ाने की अपील की। लेकिन उनकी एक भी अपील काम नहीं आई। प्रतिमाएं भक्तों की मनमर्जी से ही अपने गंतव्य की बढ़ाई गईं। इस दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि और पीस कमेटी के सदस्य भी मौजूद रहे। इनमें इकबाल हुसैन, मोती करीमी, बृजनंदन पाठक, भाजपा नेता संतोष सिंह, अधिवक्ता राजीव नारायण, जदयू नेता जितेंद्र दास और संतोष कुमार शामिल थे। देर रात तक चले इस घटनाक्रम में प्रशासन की निगरानी के बीच पांचों प्रतिमाओं को संवेदनशील रास्ते से आगे बढ़ाया गया। दशहरा की रात। घड़ी में साढ़े 12 बज रहे थे। जामा मस्जिद के पास सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे। डीएम शशांक शुभंकर, एसएसपी सुशील कुमार और एसडीएम अनिल कुमार रमन समेत प्रशासन के अधिकारी मौके पर मौजूद थे। दूसरी ओर मां के भक्तों का उत्साह चरम पर था। ढोल-नगाड़ों की गूंज, जयकारे और सड़क पर मस्ती में नाचते श्रद्धालु। इसी माहौल के बीच शहर की पांच दुर्गा प्रतिमाओं को संवेदनशील जामा मस्जिद के पास से विसर्जन के लिए क्रॉस कराया गया। प्रतिमाएं एसएसबी, बिसेप, जिला पुलिस की बड़ी संख्या में मौजूदगी में निकाली गई। जामा मस्जिद की सड़क के दोनों ओर बैरिकेडिंग की गई थी और बैरिकेडिंग के एंड व बाहर फोर्स खड़े कर दिए गए थे ताकि प्रतिमाएं पूरी सुरक्षा के बीच जामा मस्जिद के पास से शांति पूर्वक निकाली जा सके। दुखहरणी मंदिर मोहल्ले, गोलपत्थर, तुतवाड़ी, नई गोदाम और झिलगंज की प्रतिमाएं इस रास्ते से गुजरीं। सभी प्रतिमाएं रात 9 बजे ही अपने-अपने पंडालों से निकल चुकी थीं। लेकिन भक्तों के उत्साह के कारण इन्हें दुखहरणी मंदिर तक पहुंचने में ही साढ़े 12 बज गए जबकि सभी प्रतिमाएं एक किलोमीटर के रेडियस के तहत पंडाल में स्थापित की गई थीं। मंदिर के गेट पर आरती, फिर आगे बढ़ा कारवां रात करीब 12 बजे दुखहरणी मंदिर के पुजारी ने मंदिर के गेट पर सभी प्रतिमाओं की आरती की। इसके बाद प्रतिमाएं जामा मस्जिद की ओर बढ़ीं। प्रशासन की कोशिश थी कि प्रतिमाएं निर्धारित रास्ते से आगे बढ़ती रहें। पुलिस अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता भी श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील करते रहे। लेकिन भक्तों का अंदाज अलग था। प्रतिमा को कंधे पर उठाते, कुछ कदम आगे बढ़ते और फिर सड़क पर रख देते। इसके बाद ढोल-नगाड़ों की धुन पर जयकारे गूंजने लगते। कभी श्रद्धालु सड़क पर बैठकर जयकारे लगाते तो कभी खड़े होकर जमकर नाचते। इस दौरान पूरा इलाका मां के जयकारों से गूंजता रहा। प्रशासन की निगरानी में संवेदनशील इलाका गुजरा जामा मस्जिद के पास संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। डीएम और एसएसपी खुद मौके पर मौजूद रहे। एसडीएम अनिल कुमार रमन समेत अन्य अधिकारी भी लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए थे। पुलिस प्रशासन ने प्रतिमाओं को आगे बढ़ाने के लिए काफी मशक्कत की। समाजसेवियों ने भी श्रद्धालुओं से सहयोग कर जुलूस आगे बढ़ाने की अपील की। लेकिन उनकी एक भी अपील काम नहीं आई। प्रतिमाएं भक्तों की मनमर्जी से ही अपने गंतव्य की बढ़ाई गईं। इस दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि और पीस कमेटी के सदस्य भी मौजूद रहे। इनमें इकबाल हुसैन, मोती करीमी, बृजनंदन पाठक, भाजपा नेता संतोष सिंह, अधिवक्ता राजीव नारायण, जदयू नेता जितेंद्र दास और संतोष कुमार शामिल थे। देर रात तक चले इस घटनाक्रम में प्रशासन की निगरानी के बीच पांचों प्रतिमाओं को संवेदनशील रास्ते से आगे बढ़ाया गया।  

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