नागौर. डीडवाना पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठग गिरोह का भंडाफोड़ कर गिरोह से जुड़े चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही 61 लाख रुपए की साइबर ठगी के इस मामले का खुलासा कर अन्य आरोपियों की तलाश शुरू की है। यह गिरोह लोगोंको शेयर मार्केट में निवेश करवा कर बड़ा मुनाफा दिलाने का झांसा देता था। इसके बाद डेल्टा ऐल्गोएप डाउनलोड करवा कर साइबर ठगी करता था।
डीडवाना पुलिस अधीक्षक डॉ. प्यारे लाल शिवरान के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हिमांशु शर्मा और सायबर थानाधिकारी भानू प्रताप सिंह राठौड के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया है।
पुलिस ने 61 लाख रुपए की साइबर ठगी के मामले में विपिन कुमार सिंह पुत्र प्रकाश सिंह (35) निवासी ग्राम जजाला नगरा, बलिया, पुलिस थाना नगरा उत्तरप्रदेश हाल निवासी चांदमारी बडा लालपुर वाराणसी, प्रशान्त पाठक पुत्र ब्रहमानन्द (34) निवासी प्राइमरी स्कुल के सामने भीटी रामनगर, पुलिस थाना रामनगर, वाराणसी उत्तरप्रदेश, दीपक कुमार उर्फ अरमान सिंह पुत्र राम स्वरूप यादव (34) मूल निवासी करपी बाजार, पुलिस थाना अरवल, बिहार, हाल निवासी गुरूकृपा अपार्टमेण्ट, कतरास रोड सरदार मोहल्ला जिला धनबाद झारखण्ड व मोहम्मद रिजवान खान पुत्र मोहम्मद हसमत (27) निवासी फुसबगंला भागा कचंन क्लिनिक के पास झरिया, पुलिस थाना जोरापोखर, जिला धनबाद झारखण्ड को गिरफ्तार किया है।
यह है मामला
गत 3 सितम्बर को सुनिल कुमार ने साईबर पोर्टल 1930 पर शिकायत दी कि मेरे साथ अज्ञात लोगों की ओर से फेसबुक पर लगी शेयर मार्केट में रुपए लगाने की पोस्ट को देखकर दिए गए व्हाट्सएप पर जुडा। आरोपियों ने उसे अच्छा लाभ देने का झांसा देकर विश्वास में लेकर डेल्टा एल्गोएप डाउन लोड करवा दिया। उसमें शेयर मार्केट में लगाने के लिए 61 लाख 50 हजार रुपए डलवा लिए। इस एप्प पर मेरी रकम एवं लाभ दिखाई देता है मगर रुपए निकाल नहीं सकता। तब मैंने जानकारी कि तो पता चला कि मेरे साथ में ठगी कर मेरे से रुपए डलवा कर आरोपियों ने निकाल लिए है।
इस तरह हुई पुलिस कार्रवाई
पुलिस निरीक्षक सतपाल सिंह, हवलदार सुरेश कुमार, सिपाही ताराचन्द व सुगनाराम की टीम गठित की गई। टीम ने खातों की डिटेल प्राप्त कर विश्लेषण किया गया तथा परिवादी से अनुसंधान किया। साइबर तकनीकी साक्ष्य प्राप्त कर विपिन कुमार निवासी बलिया, जिसके खाते में परिवादी से ठगी के 43 लाख रुपए डालकर निकाले गए उसका पता लगाया। इसका पीछा कर वाराणसी से गिरफ्तार किया गया। पुलिस जांच मे सामने आया कि इस खाता को प्रशान्त पाठक निवासी भीटी रामनगर को दिया हुआ है। प्रशान्त पाठक को वाराणसी से गिरफ्तार किया गया। प्रशान्त ने इस खाता को राम के मार्फत अरमान सिंह को दिया हुआ था। जिस पर अरमान सिंह द्वारा उपयोग में लिए मोबाइल के तकनीकी साक्ष्य एकत्रित किए। कई शहरों में पीछा कर लखनऊ से उसे पकड़ा। अरमान सिंह का वास्तविक नाम दीपक कुमार है। इसके साथ मोहम्मद रिजवान को गिरफ्तार किया गया। जिनसे अनुसंधान जारी है।
इस तरह देते वारदात को अंजाम
साइबर ठगी की गैंग फेसबुक पर शेयर मार्केट में रुपए लगाने के तरीके बताने का विज्ञापन दिखा कर सम्पर्क करने पर अच्छा लाभ दिलवाने का लालच देते। इसके बाद में पीड़ित के मोबाइल में डेल्टा ऐल्गोएप डाउनलोड करवा देते। शुरूआत में पीड़ित से पहले विश्वास के लिए छोटी रकम डलवाते है। रुपए डलवाने के बाद उसको अच्छा लाभ दिखाते। लालच में आकर वह बडी रकम उसमे डाल देता है।
मोबाइल सिम में एपीके फाइल रन करवा कर एक्सेस
विदेशों में बैठे गैंग के सदस्य रुपए डलवाने के लिए खातों की व्यवस्था करने वाली शाखा से सम्पर्क कर ठगी के रुपए डलवा लेते है। इसके बाद खाते धारक को अपने कब्जे में रखने के लिए गैग की दूसरी शाखा से सम्पर्क कर कर वह शाखा खाता धारक को ठगी राशी का कमीशन देना तय कर अलग-अलग बडे शहरों की होटल में रूकवाते है। उस खाता धारक की मोबाइल सिम को अन्य मोबाइल में डालकर एपीके फाइल रन करवा कर एक्सेस मुख्य शाखा को देते है। जिस पर वह पीड़ित के खाते से प्राप्त होने वाले रुपए निकाल कर दूसरे खाते में डाल सकें। इसके बाद यूएसडीटी को रुपए में बदलवा कर अन्य खातों में डलवा कर ठगी को अंजाम देते है।

