गयाजी शहर के गांधी मैदान के पास वर्षों से कचरे के अंबार खड़ा करने की नगर निगम परंपरा से अब लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। शहर के बीचों-बीच बने इस डंपिंग यार्ड को हटाने की तैयारी बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार की पहल पर शुरू हो गई है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा है कि विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेले से पहले यहां कचरा डंप होना पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। इसके लिए बातचीत की गई है। आने वाले दिनों में पितृपक्ष के पहले शहर के अंदर गांधी मैदान के पास कचरा डंप नहीं होगा। इसके बाद मोहल्लों से उठाया गया कचरा सीधे शहर के बाहर बने मुख्य डंपिंग पॉइंट नैली दुबहल पर भेजा जाएगा। इससे गांधी मैदान के आसपास रहने वाले लोगों के साथ रोजाना यहां आने वाले लोगों को भी बड़ी राहत मिलेगी। शहर के बीच बना था कचरे का पहाड़ गांधी मैदान शहर का सबसे प्रमुख इलाका है। इस रास्ते से गयाजी से डोभी मुख्य मार्ग भी क्रॉस होता है। वर्षों पूर्व हरिदास सेमिनरी स्कूल के सामने डंपिंग यार्ड बनाया गया था। शहर भर का कचरा सुबह सुबह यहां जमा किया जाता है और फिर यहां उठाकर मुख्य डंपिंग यार्ड नैली दुबहल भेजा जाता है। गांधी मैदान स्थित डंपिंग यार्ड के आसपास घनी आबादी है। रोजाना बड़ी संख्या में लोग यहां सुबह-शाम टहलने पहुंचते हैं। इसके बावजूद मैदान के पास लंबे समय से शहर का कचरा जमा किया जा रहा था। डंपिंग यार्ड के पास निजी और सरकारी स्कूल भी है। पास में सरकारी अभियंताओं का कार्यालय भी है। उसके बगल में संग्राहालय भी है। धीरे-धीरे यहां कचरे का ढेर बड़ा होता गया। यह जगह डंपिंग यार्ड में बदल गई। कचरे से उठने वाली बदबू आसपास के लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनी गई। गर्मी-बरसात के दिनों में स्थिति और खराब हो जाती है। कचरे के कारण इलाके में गंदगी और दुर्गंध का माहौल बना रहता है। स्थानीय लोगों को संक्रामक बीमारियों का भी डर सताता है। लोगों का कहना था कि शहर के बीच इस तरह कचरा जमा होना किसी बड़ी समस्या से कम नहीं है। हालांकि स्थानीय लोगों ने नगर निगम बड़े छोटे जनप्रतिनिधियों व अफसरों से गुहार लगाई थी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। बीते दिनों डॉ. प्रेम कुमार ने पहल की तो स्थिति बदलने के अब आसार लगने लगे हैं। ऐसे में डंपिंग यार्ड हटाने का फैसला स्थानीय लोगों के साथ स्कूली बच्चों के लिए भी राहत वाला कदम माना जा रहा है। गांधी मैदान के पास कचरा जमा नहीं होगा डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि इस समस्या को लेकर वे लंबे समय से गंभीर थे। उन्होंने कई बार नगर निगम प्रशासन के सामने इस मुद्दे को उठाया। अब इसे स्थायी रूप से खत्म करने की दिशा में पहल की गई है। शहर के बीचों-बीच कचरा डंप करने की व्यवस्था नहीं होनी चाहिए। कचरा गाड़ियां मोहल्लों से कूड़ा उठाने के बाद उसे सीधे शहर से बाहर स्थित मुख्य डंपिंग पॉइंट तक ले जाएंगी। इससे गांधी मैदान के पास कचरा जमा नहीं होगा। धीरे-धीरे यहां जमा पुराने कचरे को भी हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। पितृपक्ष मेले से पहले बड़ा बदलाव विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि गयाजी में पितृपक्ष मेला विश्व प्रसिद्ध है। हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पिंडदान और तर्पण के लिए पहुंचते हैं। इस दौरान शहर के प्रमुख इलाकों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है। ऐसे में गांधी मैदान के पास से डंपिंग यार्ड हटाना अहम है। गांधी मैदान आने वालों को भी राहत अगर व्यवस्था तय समय पर लागू होती है तो मेले के दौरान शहर के इस महत्वपूर्ण हिस्से में लोगों को बदबू और गंदगी से राहत मिलेगी। साथ ही बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के सामने गया की बेहतर तस्वीर भी पेश होगी। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि नगर निगम इस व्यवस्था को कितनी तेजी से जमीन पर उतारता है। गयाजी शहर के गांधी मैदान के पास वर्षों से कचरे के अंबार खड़ा करने की नगर निगम परंपरा से अब लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। शहर के बीचों-बीच बने इस डंपिंग यार्ड को हटाने की तैयारी बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार की पहल पर शुरू हो गई है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा है कि विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेले से पहले यहां कचरा डंप होना पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। इसके लिए बातचीत की गई है। आने वाले दिनों में पितृपक्ष के पहले शहर के अंदर गांधी मैदान के पास कचरा डंप नहीं होगा। इसके बाद मोहल्लों से उठाया गया कचरा सीधे शहर के बाहर बने मुख्य डंपिंग पॉइंट नैली दुबहल पर भेजा जाएगा। इससे गांधी मैदान के आसपास रहने वाले लोगों के साथ रोजाना यहां आने वाले लोगों को भी बड़ी राहत मिलेगी। शहर के बीच बना था कचरे का पहाड़ गांधी मैदान शहर का सबसे प्रमुख इलाका है। इस रास्ते से गयाजी से डोभी मुख्य मार्ग भी क्रॉस होता है। वर्षों पूर्व हरिदास सेमिनरी स्कूल के सामने डंपिंग यार्ड बनाया गया था। शहर भर का कचरा सुबह सुबह यहां जमा किया जाता है और फिर यहां उठाकर मुख्य डंपिंग यार्ड नैली दुबहल भेजा जाता है। गांधी मैदान स्थित डंपिंग यार्ड के आसपास घनी आबादी है। रोजाना बड़ी संख्या में लोग यहां सुबह-शाम टहलने पहुंचते हैं। इसके बावजूद मैदान के पास लंबे समय से शहर का कचरा जमा किया जा रहा था। डंपिंग यार्ड के पास निजी और सरकारी स्कूल भी है। पास में सरकारी अभियंताओं का कार्यालय भी है। उसके बगल में संग्राहालय भी है। धीरे-धीरे यहां कचरे का ढेर बड़ा होता गया। यह जगह डंपिंग यार्ड में बदल गई। कचरे से उठने वाली बदबू आसपास के लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनी गई। गर्मी-बरसात के दिनों में स्थिति और खराब हो जाती है। कचरे के कारण इलाके में गंदगी और दुर्गंध का माहौल बना रहता है। स्थानीय लोगों को संक्रामक बीमारियों का भी डर सताता है। लोगों का कहना था कि शहर के बीच इस तरह कचरा जमा होना किसी बड़ी समस्या से कम नहीं है। हालांकि स्थानीय लोगों ने नगर निगम बड़े छोटे जनप्रतिनिधियों व अफसरों से गुहार लगाई थी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। बीते दिनों डॉ. प्रेम कुमार ने पहल की तो स्थिति बदलने के अब आसार लगने लगे हैं। ऐसे में डंपिंग यार्ड हटाने का फैसला स्थानीय लोगों के साथ स्कूली बच्चों के लिए भी राहत वाला कदम माना जा रहा है। गांधी मैदान के पास कचरा जमा नहीं होगा डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि इस समस्या को लेकर वे लंबे समय से गंभीर थे। उन्होंने कई बार नगर निगम प्रशासन के सामने इस मुद्दे को उठाया। अब इसे स्थायी रूप से खत्म करने की दिशा में पहल की गई है। शहर के बीचों-बीच कचरा डंप करने की व्यवस्था नहीं होनी चाहिए। कचरा गाड़ियां मोहल्लों से कूड़ा उठाने के बाद उसे सीधे शहर से बाहर स्थित मुख्य डंपिंग पॉइंट तक ले जाएंगी। इससे गांधी मैदान के पास कचरा जमा नहीं होगा। धीरे-धीरे यहां जमा पुराने कचरे को भी हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। पितृपक्ष मेले से पहले बड़ा बदलाव विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि गयाजी में पितृपक्ष मेला विश्व प्रसिद्ध है। हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पिंडदान और तर्पण के लिए पहुंचते हैं। इस दौरान शहर के प्रमुख इलाकों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है। ऐसे में गांधी मैदान के पास से डंपिंग यार्ड हटाना अहम है। गांधी मैदान आने वालों को भी राहत अगर व्यवस्था तय समय पर लागू होती है तो मेले के दौरान शहर के इस महत्वपूर्ण हिस्से में लोगों को बदबू और गंदगी से राहत मिलेगी। साथ ही बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के सामने गया की बेहतर तस्वीर भी पेश होगी। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि नगर निगम इस व्यवस्था को कितनी तेजी से जमीन पर उतारता है।


