स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर भारतीय संसद के राज्यसभा सचिवालय स्थित बालयोगी सभागार में आज एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रतिष्ठित समारोह में बिहार के लाल और नालंदा जिले के कवि संजीव मुकेश अपनी देशभक्ति से ओतप्रोत कविताओं का पाठ करेंगे। अपने मौलिक अंदाज और ऊर्जावान गीतों के लिए देशभर में पहचाने जाने वाले संजीव मुकेश इस महफिल में राष्ट्र प्रेम का रंग बिखेरते नजर आएंगे। विविधता में एकता का दिखेगा स्वरूप राज्यसभा सचिवालय कर्मचारी मनोरंजन क्लब की ओर से आयोजित यह कार्यक्रम दोपहर 3 बजे से शुरू होगा। इसमें गीत, संगीत, नृत्य और कविताओं के माध्यम से देश की ‘विविधता में एकता’ की भावना को प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही, मातृभूमि को आजादी दिलाने वाले वीर सपूतों को कृतज्ञता ज्ञापित की जाएगी। इस आयोजन में सचिवालय के अधिकारियों और कर्मचारियों के अलावा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के कार्यक्रम प्रभाग के कलाकार और देश के जाने-माने कवि-कवयित्रियां शिरकत करेंगे। संजीव मुकेश इससे पहले ऑस्ट्रेलिया के सिडनी स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास में भी बिहार दिवस के अवसर पर अपनी कविताओं का जलवा बिखेर चुके हैं। ‘गांव का लड़का’ के नाम से मशहूर हैं संजीव मुकेश साहित्यिक गलियारों में ‘गांव का लड़का’ के उपनाम से विख्यात संजीव कुमार मुकेश नालंदा जिले के अस्थावां प्रखंड अंतर्गत जीयर गांव के मूल निवासी हैं। साहित्य उन्हें विरासत में मिला है। उनके पिता उमेश प्रसाद ‘उमेश’ भी मगही और हिंदी के वरिष्ठ साहित्यकार हैं। वर्तमान में दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के मुख्यालय में कार्यरत मुकेश मगही और हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए जन-जागृति अभियान भी चला रहे हैं। उनकी रचनाएं न केवल संस्कारों की बात करती हैं, बल्कि युवाओं में नई चेतना भी जगाती हैं। मगही पान जैसी मिठास लिए उनकी कविताएं श्रोताओं के अंतर्मन तक उतर जाती हैं। उनके द्वारा रचित गीत ‘यही तो मेरा देश है’ और ‘चलें! हम प्रेरित करें बिहार’ काफी लोकप्रिय रहे हैं। कई संस्थानों में दमदार प्रस्तुति दे चुके हैं संजीव ने कई राष्ट्रीय चैनलों पर अपनी दमदार प्रस्तुति दी है। इसके अलावा आईआईटी पटना, आईसीसीआर-पटना, सीएसआईआर-आईआईएमटी भुवनेश्वर, आईसीएआर नई दिल्ली, केसरिया महोत्सव, थावे महोत्सव और सिंहेश्वर महोत्सव जैसे प्रमुख संस्थानों एवं सांस्कृतिक उत्सवों में भी वे काव्यपाठ कर चुके हैं। साहित्यिक योगदान के लिए मिल चुके हैं दर्जनों प्रतिष्ठित सम्मान हिंदी और मगही साहित्य में उनके उत्कृष्ट व अनवरत योगदान के लिए संजीव मुकेश को देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है। उन्हें हाल ही में प्रथम अंतरराष्ट्रीय बिहार गौरव सम्मान 2026 से अलंकृत किया गया है। इसके पूर्व उन्हें विश्व हिंदी सेवा सम्मान 2020 (नई दिल्ली), पंडित सतीश कुमार मिश्र सम्मान 2021 (पटना), पंडित महेंद्र सिंह स्मृति काव्य पुरस्कार 2022 (देहरादून), बिहार मैत्री संघ काव्य सम्मान 2023 (हंसराज कॉलेज, दिल्ली), कैलाश गौतम लोक भाषा सम्मान 2023 (प्रयागराज), छठ सेनानी अवार्ड 2024 (नई दिल्ली) और भारत मंडपम में प्राप्त बिहार गौरव सम्मान 2024 से सम्मानित किया जा चुका है। उनकी सबसे बड़ी साहित्यिक उपलब्धियों में से एक उनका चर्चित देशभक्ति गीत ‘यही तो मेरा देश है’ रहा है। इस गीत की प्रासंगिकता और लोकप्रियता को देखते हुए इसका प्रसारण गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या (25 जनवरी 2024) पर आकाशवाणी के सभी नेटवर्क पर एक साथ 22 भारतीय भाषाओं में अनुदित करके किया गया था। संसद भवन में होने वाले उनके आगामी काव्यपाठ को लेकर साहित्य प्रेमियों और बिहारवासियों में खासा उत्साह है। स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर भारतीय संसद के राज्यसभा सचिवालय स्थित बालयोगी सभागार में आज एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रतिष्ठित समारोह में बिहार के लाल और नालंदा जिले के कवि संजीव मुकेश अपनी देशभक्ति से ओतप्रोत कविताओं का पाठ करेंगे। अपने मौलिक अंदाज और ऊर्जावान गीतों के लिए देशभर में पहचाने जाने वाले संजीव मुकेश इस महफिल में राष्ट्र प्रेम का रंग बिखेरते नजर आएंगे। विविधता में एकता का दिखेगा स्वरूप राज्यसभा सचिवालय कर्मचारी मनोरंजन क्लब की ओर से आयोजित यह कार्यक्रम दोपहर 3 बजे से शुरू होगा। इसमें गीत, संगीत, नृत्य और कविताओं के माध्यम से देश की ‘विविधता में एकता’ की भावना को प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही, मातृभूमि को आजादी दिलाने वाले वीर सपूतों को कृतज्ञता ज्ञापित की जाएगी। इस आयोजन में सचिवालय के अधिकारियों और कर्मचारियों के अलावा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के कार्यक्रम प्रभाग के कलाकार और देश के जाने-माने कवि-कवयित्रियां शिरकत करेंगे। संजीव मुकेश इससे पहले ऑस्ट्रेलिया के सिडनी स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास में भी बिहार दिवस के अवसर पर अपनी कविताओं का जलवा बिखेर चुके हैं। ‘गांव का लड़का’ के नाम से मशहूर हैं संजीव मुकेश साहित्यिक गलियारों में ‘गांव का लड़का’ के उपनाम से विख्यात संजीव कुमार मुकेश नालंदा जिले के अस्थावां प्रखंड अंतर्गत जीयर गांव के मूल निवासी हैं। साहित्य उन्हें विरासत में मिला है। उनके पिता उमेश प्रसाद ‘उमेश’ भी मगही और हिंदी के वरिष्ठ साहित्यकार हैं। वर्तमान में दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के मुख्यालय में कार्यरत मुकेश मगही और हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए जन-जागृति अभियान भी चला रहे हैं। उनकी रचनाएं न केवल संस्कारों की बात करती हैं, बल्कि युवाओं में नई चेतना भी जगाती हैं। मगही पान जैसी मिठास लिए उनकी कविताएं श्रोताओं के अंतर्मन तक उतर जाती हैं। उनके द्वारा रचित गीत ‘यही तो मेरा देश है’ और ‘चलें! हम प्रेरित करें बिहार’ काफी लोकप्रिय रहे हैं। कई संस्थानों में दमदार प्रस्तुति दे चुके हैं संजीव ने कई राष्ट्रीय चैनलों पर अपनी दमदार प्रस्तुति दी है। इसके अलावा आईआईटी पटना, आईसीसीआर-पटना, सीएसआईआर-आईआईएमटी भुवनेश्वर, आईसीएआर नई दिल्ली, केसरिया महोत्सव, थावे महोत्सव और सिंहेश्वर महोत्सव जैसे प्रमुख संस्थानों एवं सांस्कृतिक उत्सवों में भी वे काव्यपाठ कर चुके हैं। साहित्यिक योगदान के लिए मिल चुके हैं दर्जनों प्रतिष्ठित सम्मान हिंदी और मगही साहित्य में उनके उत्कृष्ट व अनवरत योगदान के लिए संजीव मुकेश को देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है। उन्हें हाल ही में प्रथम अंतरराष्ट्रीय बिहार गौरव सम्मान 2026 से अलंकृत किया गया है। इसके पूर्व उन्हें विश्व हिंदी सेवा सम्मान 2020 (नई दिल्ली), पंडित सतीश कुमार मिश्र सम्मान 2021 (पटना), पंडित महेंद्र सिंह स्मृति काव्य पुरस्कार 2022 (देहरादून), बिहार मैत्री संघ काव्य सम्मान 2023 (हंसराज कॉलेज, दिल्ली), कैलाश गौतम लोक भाषा सम्मान 2023 (प्रयागराज), छठ सेनानी अवार्ड 2024 (नई दिल्ली) और भारत मंडपम में प्राप्त बिहार गौरव सम्मान 2024 से सम्मानित किया जा चुका है। उनकी सबसे बड़ी साहित्यिक उपलब्धियों में से एक उनका चर्चित देशभक्ति गीत ‘यही तो मेरा देश है’ रहा है। इस गीत की प्रासंगिकता और लोकप्रियता को देखते हुए इसका प्रसारण गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या (25 जनवरी 2024) पर आकाशवाणी के सभी नेटवर्क पर एक साथ 22 भारतीय भाषाओं में अनुदित करके किया गया था। संसद भवन में होने वाले उनके आगामी काव्यपाठ को लेकर साहित्य प्रेमियों और बिहारवासियों में खासा उत्साह है।


