खगड़िया में 4 नदियां खतरे के निशान से ऊपर:अगले 24 घंटे गंगा-बूढ़ी गंडक बढ़ने की आशंका, अधिकारियों की छुट्टी पर तत्काल रोक

खगड़िया में 4 नदियां खतरे के निशान से ऊपर:अगले 24 घंटे गंगा-बूढ़ी गंडक बढ़ने की आशंका, अधिकारियों की छुट्टी पर तत्काल रोक

नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण खगड़िया जिले में बाढ़ की आशंका बढ़ गई है। नेपाल से जलप्रवाह में अचानक वृद्धि होने की स्थिति में जिले की नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने अगले 24 घंटों के लिए विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए हैं। गंगा, कोसी, बागमती और बूढ़ी गंडक सहित प्रमुख नदियों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। जिले में बहने वाली सात नदियों में से चार नदियां पहले से ही खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इनमें गंगा और बूढ़ी गंडक का जलस्तर खतरे के निशान से लगभग 80 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया है। कोसी और बागमती नदियां भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। आवाजाही के लिए नावों का हो रहा परिचालन गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण गोगरी नगर परिषद क्षेत्र के साथ-साथ गोगरी प्रखंड के रामपुर, बोरना, इटहरी और बन्नी सहित कई गांव प्रभावित हुए हैं। इन प्रभावित पंचायतों में लोगों की आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए नावों का परिचालन किया जा रहा है। बाढ़ का असर अब परबत्ता प्रखंड की कई पंचायतों में भी दिखने लगा है। नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण निचले इलाकों में स्थित घरों में धीरे-धीरे बाढ़ का पानी घुस रहा है। इससे ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। प्रभावित लोगों ने आशंका जताई है कि यदि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है। बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों ने सरकार और जिला प्रशासन से प्रभावित इलाकों में पर्याप्त संख्या में नावें उपलब्ध कराने तथा लोगों की सुरक्षा के लिए तत्काल आवश्यक इंतजाम करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर बढ़ने पर आवागमन एक बड़ी समस्या बन सकती है, इसलिए समय पर नावों की व्यवस्था से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

24 घंटे में जलस्तर बढ़ने की आशंका बाढ़ प्रमंडल-1 के कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार सहनी ने बताया कि मंगलवार रात से गंगा और बूढ़ी गंडक का जलस्तर स्थिर रहने के बाद पानी में कमी की स्थिति बनने लगी थी। लेकिन नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र में आकस्मिक बाढ़ की स्थिति के कारण दोनों नदियों में फिर जलस्तर बढ़ने की आशंका है। इसका असर अगले 24 घंटे में दिखाई दे सकता है। उन्होंने बताया कि विभाग पूरी तरह अलर्ट है। संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए गंगा और बूढ़ी गंडक के तटबंधों पर करीब 2 लाख जिओ बैग भरकर रखे गए हैं। जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल कटाव और तटबंधों की सुरक्षा के लिए तत्काल किया जाएगा। कोसी-बागमती फिलहाल स्थिर बाढ़ प्रमंडल-2 के कार्यपालक अभियंता मनीष कुमार ने बताया कि कोसी और बागमती नदी का जलस्तर फिलहाल स्थिर है। नेपाल से आने वाले पानी का इन दोनों नदियों पर फिलहाल कोई बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर लगातार निगरानी की जा रही है। संभावित जलस्तर वृद्धि को देखते हुए सभी अंचल अधिकारियों और थाना प्रभारियों को नदी एवं तटबंध के आसपास रहने वाले लोगों के लगातार संपर्क में रहने का निर्देश दिया गया है। ग्रामीणों को समय रहते जलस्तर बढ़ने की सूचना देने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी रखने को कहा गया है। एसडीआरएफ की टीम को भी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया गया है। एफसीडी-1 और एफसीडी-2 के कार्यपालक अभियंताओं को तटबंधों की नियमित निगरानी करने तथा चौकीदारों से लगातार फीडबैक लेने को कहा गया है। अधिकारियों की छुट्टी पर तत्काल रोक संभावित बाढ़ की स्थिति को लेकर डीएम विक्रम विरकर ने संबंधित अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को आपात स्थिति में बिना देरी किए कार्रवाई करने और विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने का निर्देश दिया। डीएम ने सभी संबंधित अधिकारियों के पूर्व से स्वीकृत और स्वीकृति के लिए लंबित अवकाश को तत्काल प्रभाव से स्थगित रखने का निर्देश दिया है। प्रशासन का पूरा फोकस फिलहाल नदियों के जलस्तर, तटबंधों की सुरक्षा और संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव व्यवस्था पर है। नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण खगड़िया जिले में बाढ़ की आशंका बढ़ गई है। नेपाल से जलप्रवाह में अचानक वृद्धि होने की स्थिति में जिले की नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने अगले 24 घंटों के लिए विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए हैं। गंगा, कोसी, बागमती और बूढ़ी गंडक सहित प्रमुख नदियों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। जिले में बहने वाली सात नदियों में से चार नदियां पहले से ही खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इनमें गंगा और बूढ़ी गंडक का जलस्तर खतरे के निशान से लगभग 80 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया है। कोसी और बागमती नदियां भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। आवाजाही के लिए नावों का हो रहा परिचालन गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण गोगरी नगर परिषद क्षेत्र के साथ-साथ गोगरी प्रखंड के रामपुर, बोरना, इटहरी और बन्नी सहित कई गांव प्रभावित हुए हैं। इन प्रभावित पंचायतों में लोगों की आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए नावों का परिचालन किया जा रहा है। बाढ़ का असर अब परबत्ता प्रखंड की कई पंचायतों में भी दिखने लगा है। नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण निचले इलाकों में स्थित घरों में धीरे-धीरे बाढ़ का पानी घुस रहा है। इससे ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। प्रभावित लोगों ने आशंका जताई है कि यदि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है। बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों ने सरकार और जिला प्रशासन से प्रभावित इलाकों में पर्याप्त संख्या में नावें उपलब्ध कराने तथा लोगों की सुरक्षा के लिए तत्काल आवश्यक इंतजाम करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर बढ़ने पर आवागमन एक बड़ी समस्या बन सकती है, इसलिए समय पर नावों की व्यवस्था से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

24 घंटे में जलस्तर बढ़ने की आशंका बाढ़ प्रमंडल-1 के कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार सहनी ने बताया कि मंगलवार रात से गंगा और बूढ़ी गंडक का जलस्तर स्थिर रहने के बाद पानी में कमी की स्थिति बनने लगी थी। लेकिन नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र में आकस्मिक बाढ़ की स्थिति के कारण दोनों नदियों में फिर जलस्तर बढ़ने की आशंका है। इसका असर अगले 24 घंटे में दिखाई दे सकता है। उन्होंने बताया कि विभाग पूरी तरह अलर्ट है। संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए गंगा और बूढ़ी गंडक के तटबंधों पर करीब 2 लाख जिओ बैग भरकर रखे गए हैं। जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल कटाव और तटबंधों की सुरक्षा के लिए तत्काल किया जाएगा। कोसी-बागमती फिलहाल स्थिर बाढ़ प्रमंडल-2 के कार्यपालक अभियंता मनीष कुमार ने बताया कि कोसी और बागमती नदी का जलस्तर फिलहाल स्थिर है। नेपाल से आने वाले पानी का इन दोनों नदियों पर फिलहाल कोई बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर लगातार निगरानी की जा रही है। संभावित जलस्तर वृद्धि को देखते हुए सभी अंचल अधिकारियों और थाना प्रभारियों को नदी एवं तटबंध के आसपास रहने वाले लोगों के लगातार संपर्क में रहने का निर्देश दिया गया है। ग्रामीणों को समय रहते जलस्तर बढ़ने की सूचना देने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी रखने को कहा गया है। एसडीआरएफ की टीम को भी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया गया है। एफसीडी-1 और एफसीडी-2 के कार्यपालक अभियंताओं को तटबंधों की नियमित निगरानी करने तथा चौकीदारों से लगातार फीडबैक लेने को कहा गया है। अधिकारियों की छुट्टी पर तत्काल रोक संभावित बाढ़ की स्थिति को लेकर डीएम विक्रम विरकर ने संबंधित अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को आपात स्थिति में बिना देरी किए कार्रवाई करने और विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने का निर्देश दिया। डीएम ने सभी संबंधित अधिकारियों के पूर्व से स्वीकृत और स्वीकृति के लिए लंबित अवकाश को तत्काल प्रभाव से स्थगित रखने का निर्देश दिया है। प्रशासन का पूरा फोकस फिलहाल नदियों के जलस्तर, तटबंधों की सुरक्षा और संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव व्यवस्था पर है।  

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