क्या लाल सागर में हूतियों से भिड़ेगी अमेरिकी सेना? पूर्व CIA अधिकारी बोले- दखल देने के लिए मजबूर हो सकता है US

क्या लाल सागर में हूतियों से भिड़ेगी अमेरिकी सेना? पूर्व CIA अधिकारी बोले- दखल देने के लिए मजबूर हो सकता है US

Red Sea Crisis: यमन के लाल सागर के तटीय इलाके पर हूती विद्रोहियों के कब्जे और रणनीतिक रूप से अहम बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में सऊदी के जहाजों के लिए बढ़ते खतरे के बाद अमेरिका पर सैन्य दखल देने का दबाव बढ़ रहा है। CIA के पूर्व अधिकारी स्कॉट उहलिंगर ने अल जजीरा से बात करते हुआ कहा है कि भले ही व्हाइट हाउस ने अभी तक सीधे सैन्य हमले की मांगों को नहीं माना है, लेकिन जमीनी हालात बिगड़ने की वजह से वाशिंगटन को लाल सागर में दखल देने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

सऊदी अरब को छोड़ना नामुमकिन : स्कॉट उहलिंगर

उहलिंगर के मुताबिक, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अच्छी तरह जानते हैं कि अमेरिकी सेना पहले से ही दुनिया भर में कई मोर्चों पर उलझी हुई है। इसलिए, बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य को खुला रखने के लिए सेना पर अतिरिक्त बोझ डालना आसान फैसला नहीं होगा। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि सऊदी-समर्थित यमनी सेनाओं को हूथियों के हाथों भारी सैन्य नुकसान उठाना पड़ा है।

उहलिंगर ने कहा कि अगर अमेरिका इस नाजुक मोड़ पर सऊदी अरब को सैन्य मदद नहीं देता है, तो किंगडम मुश्किल स्थिति में फंस सकता है। उसका तेल निर्यात या तो पहले ही 30 साल के निचले स्तर पर पहुंच चुका है या पहुंचने वाला है। इस आर्थिक और कूटनीतिक झटके से बचने के लिए अमेरिका को सऊदी अरब की मदद के लिए आगे आना होगा।

मोचा और मारिब को बचाने के लिए एयर सपोर्ट दे सकता है अमेरिका

CIA के पूर्व अधिकारी ने संकेत दिया कि अमेरिका की संभावित मदद शुरू में एयर सपोर्ट के रूप में हो सकती है। इससे सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन को मोचा बंदरगाह को हूती कब्जे से छुड़ाने या रणनीतिक रूप से अहम शहर मारिब की रक्षा करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने साफ किया कि अमेरिकी सेना में ऐसे ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देने की पूरी क्षमता है, लेकिन असली सवाल यह है कि यह अभियान कितने समय तक चलेगा।

लंबा खिंचा अभियान तो घेराबंदी होगी कमजोर: स्कॉट उहलिंगर

स्कॉट उहलिंगर ने चेतावनी दी कि अगर यह मिलिट्री ऑपरेशन तीन हफ्ते या एक महीने से ज्यादा चलता है, तो इससे इस इलाके में अमेरिकी नौसेना पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में अमेरिका को अपने पैसिफिक फ्लीट से कुछ डिस्ट्रॉयर और युद्धपोतों को बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में फिर से तैनात करना पड़ सकता है। अमेरिका अब तक ऐसा करने से बचता रहा है क्योंकि पैसिफिक में चीन से संभावित खतरा उसकी मुख्य रणनीतिक चिंता बनी हुई है। हालांकि, अगर लाल सागर का शिपिंग रूट ब्लॉक हो जाता है, तो अमेरिका के लिए पैसिफिक से युद्धपोतों को हटाकर वहां तैनात करना जरूरी हो जाएगा।

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