तेल-गैस संकट फिर गहराया! सऊदी पाइपलाइन पर ड्रोन हमले के बाद कच्चा तेल 110 डॉलर के पार

तेल-गैस संकट फिर गहराया! सऊदी पाइपलाइन पर ड्रोन हमले के बाद कच्चा तेल 110 डॉलर के पार

Saudi Arabia Brent Crude Oil: तेल बाजार में एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। सऊदी अरब की अहम तेल पाइपलाइन बंद होने से दुनिया में कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस खबर का असर तेल की कीमतों पर तुरंत दिखाई दिया। सोमवार को ब्रेंट क्रूड करीब 5 फीसदी महंगा हो गया। इसकी कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।

इस तेजी के पीछे कई वजहें हैं। ईरान के साथ चल रहा संघर्ष पहले ही तेल बाजार पर दबाव बना रहा है। वहीं, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में टैंकरों की आवाजाही भी सामान्य नहीं है। ऐसे में सऊदी पाइपलाइन का बंद होना सप्लाई संकट को और गंभीर बना सकता है।

ड्रोन हमले के बाद बंद हुई अहम पाइपलाइन

सऊदी अरब ने अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को बंद कर दिया है। यह पाइपलाइन करीब 1,200 किलोमीटर लंबी है। इस पर हूती विद्रोहियों के ड्रोन हमले से नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है।

बता दें इस पाइपलाइन की क्षमता काफी बड़ी है। यह रोजाना करीब 70 लाख बैरल कच्चा तेल ले जा सकती है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि सऊदी अरब इसके जरिए तेल को लाल सागर तक पहुंचा सकता है। इससे तेल के जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की जरूरत कम पड़ती है। अब पाइपलाइन बंद होने से यह वैकल्पिक रास्ता भी प्रभावित हो गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, इसकी मरम्मत में तीन से पांच हफ्ते लग सकते हैं। हालांकि, कुछ हिस्सों में काम इससे पहले शुरू होने की उम्मीद है।

होर्मुज संकट ने बढ़ाई मुश्किल

तेल बाजार पहले ही तनाव में है। ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से टैंकरों की आवाजाही काफी कम हुई है। यह रास्ता दुनिया के लिए बेहद अहम है। बड़ी मात्रा में तेल इसी मार्ग से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचता है। ऐसे में सऊदी पाइपलाइन का लंबे समय तक बंद रहना नई परेशानी खड़ी कर सकता है। तेल की सप्लाई कम हुई तो कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है।

तेल शिपमेंट को सामान्य करने की कोशिशों को भी झटका लगा है। ईरान और खाड़ी देशों के बीच ओमान में होने वाली बैठक टाल दी गई। इससे तत्काल समाधान की उम्मीद कमजोर हुई है।

सऊदी उत्पादन और ग्लोबल स्टॉक पर भी दबाव

सऊदी अरब का तेल उत्पादन भी पहले ही घट चुका है। OPEC के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में उत्पादन 19 लाख बैरल प्रतिदिन घटकर 62.38 लाख बैरल रह गया। यह 1990 के बाद सबसे कम रिपोर्ट किया गया स्तर बताया गया है। दूसरी ओर, चीन ने अगस्त में कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई। उसकी इन्वेंट्री में कमी आई थी। अमेरिका का स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व भी ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर के करीब है। इसका मतलब साफ है। अगर सप्लाई में रुकावट लंबी चली, तो बाजार के पास झटके को संभालने का कुशन कम हो सकता है।

ट्रेडर्स अब सऊदी पाइपलाइन और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, दोनों पर नजर रख रहे हैं। अगर दोनों रास्तों पर परेशानी बनी रही, तो ग्लोबल ऑयल मार्केट में सप्लाई की कमी और बढ़ सकती है। इसका असर आने वाले दिनों में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।

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