कैमूर के मोहनिया स्थित कर्मनाशा समेकित जांच चौकी बिहार सरकार को हर महीने करोड़ों रुपए का राजस्व देती है। यह चौकी प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण बन गई है। सूरज ढलते ही पूरा परिसर अंधेरे में डूब जाता है। यहां लगी हाई-मास्ट और स्ट्रीट लाइटें लंबे समय से खराब पड़ी हैं, लेकिन अधिकारियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया है। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों का आरोप है कि यह अंधेरा किसी तकनीकी खराबी के कारण नहीं है। उनका कहना है कि यह एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है। रात के अंधेरे का फायदा उठाकर यहां अवैध वसूली की जाती है। चालकों के अनुसार, जब लाइटें जलती हैं, तो सीसीटीवी और आम लोगों की नजर हर गतिविधि पर रहती है। इसलिए भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए जानबूझकर लाइटों को ठीक नहीं कराया जा रहा है। सरकार को राजस्व का हो रहा नुकसान अंधेरे के कारण सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है। साथ ही, राष्ट्रीय राजमार्ग पर दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है। सुरक्षा के लिहाज से इतने संवेदनशील स्थान पर रोशनी की व्यवस्था न होना बड़ी प्रशासनिक चूक है। करोड़ों का राजस्व देने वाली इस जांच चौकी पर यह स्थिति संबंधित विभाग और अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाती है। अब देखना होगा कि यह खबर सामने आने के बाद जिला प्रशासन कोई कदम उठाता है या अवैध वसूली का यह खेल ऐसे ही चलता रहेगा। कैमूर के मोहनिया स्थित कर्मनाशा समेकित जांच चौकी बिहार सरकार को हर महीने करोड़ों रुपए का राजस्व देती है। यह चौकी प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण बन गई है। सूरज ढलते ही पूरा परिसर अंधेरे में डूब जाता है। यहां लगी हाई-मास्ट और स्ट्रीट लाइटें लंबे समय से खराब पड़ी हैं, लेकिन अधिकारियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया है। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों का आरोप है कि यह अंधेरा किसी तकनीकी खराबी के कारण नहीं है। उनका कहना है कि यह एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है। रात के अंधेरे का फायदा उठाकर यहां अवैध वसूली की जाती है। चालकों के अनुसार, जब लाइटें जलती हैं, तो सीसीटीवी और आम लोगों की नजर हर गतिविधि पर रहती है। इसलिए भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए जानबूझकर लाइटों को ठीक नहीं कराया जा रहा है। सरकार को राजस्व का हो रहा नुकसान अंधेरे के कारण सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है। साथ ही, राष्ट्रीय राजमार्ग पर दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है। सुरक्षा के लिहाज से इतने संवेदनशील स्थान पर रोशनी की व्यवस्था न होना बड़ी प्रशासनिक चूक है। करोड़ों का राजस्व देने वाली इस जांच चौकी पर यह स्थिति संबंधित विभाग और अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाती है। अब देखना होगा कि यह खबर सामने आने के बाद जिला प्रशासन कोई कदम उठाता है या अवैध वसूली का यह खेल ऐसे ही चलता रहेगा।

