पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता योगेंद्र साव ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें ‘भ्रष्ट मुख्यमंत्री’ बताया है। शुक्रवार को हजारीबाग में खासमहल जमीन से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान प्रशासन और योगेंद्र साव के बीच नोकझोंक का मामला सामने आया। इसी दौरान के बताए जा रहे दो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं। एक वीडियो में योगेंद्र साव मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर आरोप लगाते हुए कहते नजर आ रहे हैं कि जब भी मुख्यमंत्री मुश्किल में आते हैं तो कभी एल खियांग्ते तो कभी विनय चौबे को जिम्मेदार ठहराया जाता है। उन्होंने सरकार पर राज्य को कॉरपोरेट के हाथों सौंपने और जल-जंगल-जमीन के लिए बने झारखंड को बेचने का आरोप भी लगाया। दूसरे वीडियो में वह अंचलाधिकारी के साथ तीखी बहस करते और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते नजर आ रहे हैं। इन वीडियो को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा ने भी इसे अपने X हैंडल से साझा किया है। जेसीबी के सामने बैठ गए योगेंद्र साव शुक्रवार को सदर अंचलाधिकारी सह खासमहल पदाधिकारी आशुतोष पुलिस बल के साथ हजारीबाग के खासमहल होल्डिंग नंबर-302 की 50 डिसमिल जमीन से अतिक्रमण हटाने पहुंचे थे। प्रशासन की जेसीबी कार्रवाई के लिए आगे बढ़ी तो योगेंद्र साव उसके बकेट के सामने बैठ गए और कार्रवाई का विरोध किया। स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। इसके बाद प्रशासन की टीम ने जमीन पर बनी गोशाला और पीसीसी सड़क को जेसीबी से तोड़ दिया। प्रशासन का कहना है कि पिछले दो महीने में इस जमीन को चार बार अतिक्रमणमुक्त कराया जा चुका है। इसके बावजूद जमीन पर दोबारा गोशाला और पीसीसी सड़क बनाने की शिकायत मिली थी। खासमहल जमीन को लेकर प्रशासन और साव के बीच विवाद पहले भी सामने आ चुका है। प्रशासन जमीन को सरकारी खासमहल भूमि बताते हुए कार्रवाई करता रहा है। योगेंद्र साव बोले- जमीन का एटॉर्नी पावर मेरे पास पूर्व मंत्री योगेंद्र साव ने प्रशासन की कार्रवाई को गलत बताते हुए कहा कि संबंधित जमीन का एटॉर्नी पावर उनके पास है। उन्होंने खासमहल जमीन के नवीनीकरण के लिए उपायुक्त को आवेदन दिया है। उनका दावा है कि रिज्यूम जमीन के मामले में उन्होंने राज्य के भू-राजस्व मंत्री से भी मुलाकात की है।
उनके अनुसार, अतिक्रमण हटाने के लिए सदर सीओ के पास उपायुक्त या एसडीओ का कोई आदेश नहीं था। उन्होंने कहा कि जमीन उनकी है। खासमहल मैनुअल के आधार पर वह कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। सीओ बोले- अवैध कब्जे की शिकायत के बाद कार्रवाई दूसरी ओर, सदर सीओ सह खासमहल पदाधिकारी आशुतोष का कहना है कि होल्डिंग नंबर-302 की 50 डिसमिल जमीन का सर्वे कर उसे रिज्यूम करने के लिए उपायुक्त और आयुक्त के माध्यम से सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। प्रशासन के अनुसार, रिज्यूम के लिए प्रस्तावित जमीन पर अवैध कब्जे और गोशाला व पीसीसी सड़क निर्माण की शिकायत के बाद कार्रवाई की गई। अब वायरल वीडियो और जमीन विवाद दोनों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

