केरलम के पूर्व राज्यपाल ने KPSC Chairman को हटाने की राष्ट्रपति से की सिफारिश

केरलम के पूर्व राज्यपाल ने KPSC Chairman को हटाने की राष्ट्रपति से की सिफारिश

केरलम के पूर्व राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने एक दुर्लभ ‘‘कदम’’ के तहत केरल लोक सेवा आयोग (केपीएससी) के खिलाफ कथित अनियमितताओं की शिकायतों के बाद इसके अध्यक्ष एम आर बैजू को पद से हटाने की सिफारिश की है। सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी। आर्लेकर वर्तमान में तमिलनाडु के राज्यपाल हैं।

इससे पहले वह केरलम के राज्यपाल होने के साथ ही तमिलनाडु का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे थे। लोक भवन के सूत्रों ने बताया कि तमिलनाडु स्थानांतरित किए जाने से करीब एक सप्ताह पहले आर्लेकर ने राष्ट्रपति को पत्र भेजकर केपीएससी के अध्यक्ष को हटाने की सिफारिश के कारणों का उल्लेख किया। आर्लेकर के बाद केरलम के राज्यपाल के रूप में ओम प्रकाश माथुर को नियुक्त किया गया।

लोक भवन के सूत्रों के अनुसार, आर्लेकर ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर आयोग में कथित अनियमितताओं के आरोपों और उसके कामकाज की जांच का हवाला देते हुए एम आर बैजू को पद से हटाने की सिफारिश की। अधिकारियों के मुताबिक, राज्य के इतिहास में इस तरह का कदम पहले कभी नहीं उठाया गया। केरल लोक सेवा आयोग राज्य में सरकारी पदों पर भर्ती की जिम्मेदारी संभालता है।

यह घटनाक्रम तब सामने आया, जब राज्य योजना बोर्ड के प्रमुख पद के लिए पीएससी की परीक्षा में कथित अनियमितताओं की अपराध शाखा ने जांच की। बाद में, इस जांच में पीएससी की अन्य परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को भी शामिल कर लिया गया। लोक भवन के सूत्रों ने बताया कि युवा मोर्चा और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने आर्लेकर के राज्यपाल रहते हुए उन्हें शिकायत सौंपी थी, जिसके बाद उन्होंने इन आरोपों पर पीएससी के आंतरिक सतर्कता प्रकोष्ठ से रिपोर्ट मांगी थी।

सूत्रों ने बताया कि आर्लेकर ने इस मामले को उच्चतम न्यायालय के पास भी भेजा था। तमिलनाडु स्थानांतरित किए जाने के बाद आर्लेकर को 23 अक्टूबर को केरलम के राज्यपाल के पद से मुक्त कर दिया गया था। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की युवा शाखा युवा मोर्चा ने आर्लेकर के इस कदम का स्वागत किया और इस वैधानिक निकाय को भंग करने की मांग की।

युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष मनुप्रसाद ने पीटीआई-भाषा से कहा, “हमने (अनियमितताओं को लेकर) राज्यपाल से शिकायत की थी। इस आधार पर उन्होंने रिपोर्ट मांगी और राष्ट्रपति को सिफारिश भेजी। हम यह भी चाहते हैं कि आयोग के कामकाज की विस्तृत जांच हो।”
उन्होंने कहा, “हम भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ राष्ट्रपति से मुलाकात का समय लेने की कोशिश कर रहे हैं।

समय मिलने पर केरलम से एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति से मुलाकात करेगा, जिसमें युवा मोर्चा के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे जो राज्य में पीएससी के कामकाज और बेरोजगारी से जुड़ी अपनी चिंताओं को उनके सामने रखेंगे।”
इस बीच, विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने आरोप लगाया कि लोक भवन ने पीएससी अध्यक्ष को हटाने और आयोग को भंग करने की सिफारिश कर असंवैधानिक कदम उठाया है। उन्होंने राज्य सरकार से इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की। माकपा के वरिष्ठ नेता विजयन ने कहा कि पीएससी के अध्यक्ष और सदस्यों को केवल संविधान के अनुच्छेद 317 में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करके ही पद से हटाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 316 के तहत, पीएससी के सदस्यों की नियुक्ति छह साल के कार्यकाल के लिए की जाती है। राष्ट्रपति किसी अध्यक्ष या सदस्य को कदाचार के आधार पर केवल तभी हटा सकते हैं, जब उच्चतम न्यायालय मामले की जांच कर ले। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सदस्यों के खिलाफ ऐसी कोई जांच नहीं की गई थी इसलिए राज्यपाल के पास ऐसी सिफारिश करने का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं था।

वहीं, स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने आर्लेकर द्वारा उठाए गए इस कदम का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा जांच के आदेश दिए जाने के बाद इस भर्ती संस्था में कथित अनियमितताएं सामने आ गई हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *