कृष्ण जन्मभूमि को लेकर संतों की बैठक

कृष्ण जन्मभूमि को लेकर संतों की बैठक

भोजपुर से मथुरा पहुंचे परमपूज्य संतश्री देवराहा शिवनाथ जी महाराज ने शुक्रवार को जुलेंदी स्थित चित्रगुप्त पीठाधीश्वर डॉ. स्वामी सच्चिदानंद चित्रगुप्त महाराज से मुलाकात की। इस दौरान दोनों संतों के बीच धार्मिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों पर चर्चा हुई। श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े विषय को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाने और संत समाज की भूमिका को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया। इस मौके पर बड़ी संख्या में साधु-संत, शिष्य और श्रद्धालु उपस्थित रहे। संतश्री देवराहा शिवनाथ जी महाराज के मथुरा पहुंचने पर डॉ। स्वामी सच्चिदानंद चित्रगुप्त महाराज ने उनका स्वागत किया। दोनों संतों ने एक-दूसरे से धार्मिक विषयों पर संवाद किया और आशीर्वाद लिया। बातचीत में मथुरा की आध्यात्मिक परंपरा के साथ भोजपुर से पहुंचे संतों के जुड़ाव पर भी चर्चा हुई। संतश्री देवराहा शिवनाथ जी महाराज ने कहा कि श्रीकृष्ण की जन्मभूमि करोड़ों सनातनियों की आस्था से जुड़ी है। इस विषय को लेकर समाज में जागरूकता और एकजुटता जरूरी है। उन्होंने कहा कि संतों के मार्गदर्शन में शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से आगे की दिशा तय की जाएगी। किसी प्रकार का विवाद खड़ा करना उद्देश्य नहीं है, बल्कि धार्मिक आस्था और परंपरा के प्रति लोगों को जागरूक करना लक्ष्य है। देशभर के संतों को जोड़ने पर दिया जा रहा है जोर संतश्री ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े विषय पर देशभर के संतों और श्रद्धालुओं को एक मंच पर लाकर व्यापक चर्चा की आवश्यकता है। वहीं डॉ। स्वामी सच्चिदानंद चित्रगुप्त महाराज ने कहा कि धार्मिक और सामाजिक विषयों पर संत समाज का मार्गदर्शन महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आगे की गतिविधियों को भी संत समाज के मार्गदर्शन में आगे बढ़ाया जाएगा। मुलाकात के दौरान भोजपुर से लाई गई शिला और अखंड दीप को लेकर भी चर्चा हुई। बताया गया कि शिला और अखंड दीप को भोजपुर समेत पूरे बिहार में भ्रमण कराया जाएगा। कृष्ण भक्तों से अपील की गई कि वे अखंड दीप से दीप जलाकर अपने घरों में रखें। संतों के अनुसार यह अखंड दीप तब तक जलाने का संकल्प है, जब तक मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति का उद्देश्य पूरा नहीं हो जाता। भोजपुर से मथुरा पहुंचे परमपूज्य संतश्री देवराहा शिवनाथ जी महाराज ने शुक्रवार को जुलेंदी स्थित चित्रगुप्त पीठाधीश्वर डॉ. स्वामी सच्चिदानंद चित्रगुप्त महाराज से मुलाकात की। इस दौरान दोनों संतों के बीच धार्मिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों पर चर्चा हुई। श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े विषय को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाने और संत समाज की भूमिका को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया। इस मौके पर बड़ी संख्या में साधु-संत, शिष्य और श्रद्धालु उपस्थित रहे। संतश्री देवराहा शिवनाथ जी महाराज के मथुरा पहुंचने पर डॉ। स्वामी सच्चिदानंद चित्रगुप्त महाराज ने उनका स्वागत किया। दोनों संतों ने एक-दूसरे से धार्मिक विषयों पर संवाद किया और आशीर्वाद लिया। बातचीत में मथुरा की आध्यात्मिक परंपरा के साथ भोजपुर से पहुंचे संतों के जुड़ाव पर भी चर्चा हुई। संतश्री देवराहा शिवनाथ जी महाराज ने कहा कि श्रीकृष्ण की जन्मभूमि करोड़ों सनातनियों की आस्था से जुड़ी है। इस विषय को लेकर समाज में जागरूकता और एकजुटता जरूरी है। उन्होंने कहा कि संतों के मार्गदर्शन में शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से आगे की दिशा तय की जाएगी। किसी प्रकार का विवाद खड़ा करना उद्देश्य नहीं है, बल्कि धार्मिक आस्था और परंपरा के प्रति लोगों को जागरूक करना लक्ष्य है। देशभर के संतों को जोड़ने पर दिया जा रहा है जोर संतश्री ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े विषय पर देशभर के संतों और श्रद्धालुओं को एक मंच पर लाकर व्यापक चर्चा की आवश्यकता है। वहीं डॉ। स्वामी सच्चिदानंद चित्रगुप्त महाराज ने कहा कि धार्मिक और सामाजिक विषयों पर संत समाज का मार्गदर्शन महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आगे की गतिविधियों को भी संत समाज के मार्गदर्शन में आगे बढ़ाया जाएगा। मुलाकात के दौरान भोजपुर से लाई गई शिला और अखंड दीप को लेकर भी चर्चा हुई। बताया गया कि शिला और अखंड दीप को भोजपुर समेत पूरे बिहार में भ्रमण कराया जाएगा। कृष्ण भक्तों से अपील की गई कि वे अखंड दीप से दीप जलाकर अपने घरों में रखें। संतों के अनुसार यह अखंड दीप तब तक जलाने का संकल्प है, जब तक मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति का उद्देश्य पूरा नहीं हो जाता।  

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