कार-बाइक की स्पीड से लगता है डर? क्लीवलैंड क्लिनिक से जानें Speed Phobia यानी Tachophobia क्या है

कार-बाइक की स्पीड से लगता है डर? क्लीवलैंड क्लिनिक से जानें Speed Phobia यानी Tachophobia क्या है

Tachophobia Symptoms: क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि कार या बाइक की तेज रफ्तार देखते ही आपका दिल तेजी से धड़कने लगता है? या फिर किसी तेज चलती गाड़ी में बैठते ही हाथ-पैर ठंडे पड़ जाते हैं और घबराहट से दम घुटने जैसा महसूस होने लगता है? अगर हां, तो इसे महज एक आम डर मानकर टालने की गलती न करें। यह टेकोफोबिया (Tachophobia) हो सकता है। टेकोफोबिया तेज रफ्तार या स्पीड का डर होता है। यह एक तरह का एंग्जायटी डिसऑर्डर (Anxiety Disorder) है, जिससे पीड़ित इंसान तेज चलने वाली गाड़ियों, झूलों या यहां तक कि तेज दौड़ने से भी बुरी तरह डरने लगता है। आइए समझते हैं कि टेकोफोबिया क्या है, इसके क्या लक्षण हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है।

क्या होता है टेकोफोबिया (Tachophobia)?

क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, टेको का मतलब होता है रफ्तार और ‘फोबिया’ का मतलब होता है डर। जब किसी इंसान को तेज स्पीड से हद से ज्यादा और अनियंत्रित डर लगने लगे, तो उसे टेकोफोबिया कहते हैं। यह डर सिर्फ गाड़ी चलाने तक सीमित नहीं रहता। कई बार मरीज को;

  • कार, बस, ट्रेन या फ्लाइट में बैठने से डर लगता है।
  • वाटर पार्क या मेले के तेज झूलों (जैसे रोलर कोस्टर) में जाने से घबराहट होती है।
  • यहां तक कि खुद के तेज भागने या किसी दूसरे को तेज गाड़ी चलाते देखने से भी पसीना आने लगता है।

कोफोबिया के मुख्य लक्षण क्या हैं?

  • दिल की धड़कनें तेज होना।
  • सांस लेने में तकलीफ होना।
  • हाथ-पैर कांपना और पसीना आना।
  • चक्कर आना और जी मिचलाना।
  • मजबूरन गाड़ी से बाहर निकलने का मन करना।

यह डर क्यों बैठ जाता है दिमाग में?

टेकोफोबिया होने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं, लेकिन सबसे मुख्य कारण दिमाग में बैठा कोई पुराना अनुभव होता है;

  • कोई पुराना एक्सीडेंट।
  • किसी अपने का खोना।
  • कंट्रोल खोने का डर।
  • बचपन की कोई बात।

इस डर से बाहर कैसे निकलें?

अगर यह डर आपकी नॉर्मल लाइफ और ट्रैवल को खराब कर रहा है, तो इन आसान तरीकों से आप राहत पा सकते हैं;

  • धीरे-धीरे शुरुआत करें (Exposure)।
  • गहरी सांसें लें (Breathing Exercises)।
  • ध्यान भटकाएं।
  • थेरेपी की मदद लें।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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