Yellow Tongue Symptoms: सुबह सोकर उठने के बाद जब हम ब्रश करते हैं, तो अक्सर जीभ की तरफ ध्यान ही नहीं जाता। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारी जीभ सेहत का हाल बताने में बड़ा काम करती है? अगर आपकी जीभ पर हल्की या गाढ़ी पीली परत जमने लगी है, तो इसे बिल्कुल भी हल्के में मत लीजिए। ज्यादातर मामलों में तो यह मुंह की ठीक से सफाई न करने की वजह से होता है, लेकिन कभी-कभी यह पेट या शरीर के अंदर चल रही किसी दिक्कत का इशारा भी हो सकता है। आइए जानते हैं कि जीभ पीली क्यों पड़ती है और इसे घर पर कैसे ठीक कर सकते हैं।
Yellow Tongue क्या होती है?
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, जीभ का पीला पड़ना या उस पर पीली परत जमना ज्यादातर मामलों में एक मामूली और अस्थायी समस्या होती है।हमारी जीभ की सतह पर छोटे-छोटे उभार होते हैं, जिन्हें पैपिला (Papillae) कहा जाता है। जब इन उभारों में खाना, बैक्टीरिया, मृत कोशिकाएं (Dead cells) और गंदगी जमा होने लगती है, तो जीभ का रंग पीला दिखाई देने लगता है। इसके अलावा, हमारा खाना-पीना और तंबाकू जैसी चीजें भी इन जमी हुई कोशिकाओं को पीला रंग दे देती हैं।
जीभ पीली क्यों होती है?
- जीभ की सफाई न करना।
- कम पानी पीना (मुंह सूखना)।
- बीड़ी, सिगरेट या गुटखा।
- ज्यादा दवाइयां या एंटीबायोटिक लेना।
- पेट की खराबी।
- पीलिया।
जीभ पीली होने पर और क्या-क्या महसूस होता है?
क्लीवलैंड क्लिनिक और हेल्थलाइन के मुताबिक, अगर जीभ पर पीली परत जमी है, तो आपको यह सब भी देखने को मिल सकता है;
- मुंह में जमा बैक्टीरिया की वजह से सांसों से गंदी बदबू आने लगती है।
- खाने का स्वाद न मिलना।
- ऐसा लगता है जैसे जीभ एकदम सूखी और चिपचिपी हो गई है।
डॉक्टर से कब संपर्क करें
हेल्थलाइन के अनुसार, अगर आपको जीभपीली पड़ने के साथ ये लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए;
- पेट में दर्द।
- मल में खून आना।
- उल्टी करना।
- बुखार।
- आसानी से चोट लगना और खून बहना।
- दो सप्ताह बाद भी पीलापन नहीं जाता।
- आपकी त्वचा या आपकी आंखों का सफेद भाग भी पीला है।
- आपकी जीभ में दर्द हो रहा है।
इससे छुटकारा पाने के तरीके
- जीभ को रोज साफ करें।
- खूब सारा पानी पीएं।
- गुनगुने पानी में नमक डालकर गरारे करें।
- सिगरेट और गुटखे से दूरी बनाएं।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

